
हादसे में घायल मासूम: फोटो पत्रिका नेटवर्क
अजमेर। ब्यावर जिले के जवाजा क्षेत्र में सारोठ चौराहे पर बुधवार दोपहर हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने हर आंख नम कर दी। हादसे में बाइक सवार दम्पती जसवंत और उसकी पत्नी सुनीता की मौत हो गई, जबकि उनके तीन बच्चे गंभीर घायल हो गए। अजमेर के जेएलएन अस्पताल में भर्ती मासूम बच्चे दर्द से कराहते हुए बार-बार मां को पुकारते रहे। कभी पानी के लिए आवाज लगाते तो कभी दर्द के मारे रो पड़ते, लेकिन उन्हें क्या पता कि मां-बाप अब इस दुनिया में नहीं रहे। अस्पताल का यह दृश्य देखकर चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ और यहां आपातकालीन इकाई में मौजूद लोगों की आंखें भी भर आईं।
बुधवार शाम को जेएलएन अस्पताल की आपातकालीन इकाई में ऐसा दृश्य था, जिसने हर किसी को झकझोर दिया। हादसे में घायल 8 वर्षीय जावेद, पांच वर्षीय सादिक और तीन साल की मासूम गौरी को ब्यावर के अमृतकौर अस्पताल से अजमेर रेफर किया गया।
तीनों बच्चे दर्द से कराहते हुए बार-बार मां को पुकार रहे थे। कोई पानी मांगते हुए ‘मां…’ कह रहा था तो कोई दर्द से तड़पकर रो पड़ता। अस्पताल में मौजूद जिस किसी ने मासूम बच्चों के हादसे में जख्मी होने और माता-पिता के देहांत की खबर सुनी तो खुद को सम्भाल नहीं सके। कई लोगों की आंखें नम हो गईं। किसी ने मासूम गौरी का सिर तो किसी ने पैर सहलाते हुए ठीक होने की दुआ की। फिलहाल तीनों बच्चे नर्सिंग स्टाफ व पड़ोस की महिलाओं की देखरेख में अस्पताल में भर्ती है।
अस्पताल सूत्रों के मुताबिक तीनों बच्चों में सबसे ज्यादा चोट गौरी को आई है। उसके शरीर पर बाहरी चोट नहीं है लेकिन सिर में गंभीर चोट है। चिकित्सकों ने सीटी स्कैन कराने के बाद उसे शिशु रोग विभाग की आईसीयू में भर्ती किया है। वहीं भाइयों जावेद और सादिक का भी उपचार चल रहा है। मासूम बच्चों के इलाज में आपातकालीन इकाई के रेजीडेंट व सीनियर डॉक्टर्स ने भी तत्परता दिखाई।
रिश्तेदार साजन ने बताया कि जसवंत गुजरात के जामनगर और राजकोट में मजदूरी करता था। वह दो दिन पहले ही गांव हेतान खेड़ा आया था। बुधवार सुबह वह पत्नी सुनीता और तीनों बच्चों के साथ खरीदारी करने ब्यावर गया था। खरीदारी के बाद पूरा परिवार बाइक से गांव लौट रहा था। इसी दौरान जवाजा के सारोठ चौराहे पर तेज रफ्तार वाहन ने बाइक को टक्कर मार दी। हादसा इतना भीषण था कि जसवंत और सुनीता की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बच्चे गंभीर घायल हो गए।
साजन ने बताया कि जसवंत तीन भाइयों में एक था। परिवार में बूढ़े माता-पिता भी हैं। हादसे की खबर मिलते ही पूरा परिवार सदमे में डूब गया। गांव हेतान खेड़ा में भी शोक की लहर फैल गई। जिस किसी ने भी यह खबर सुनी, वह स्तब्ध रह गया। हर जुबान पर बस यही सवाल था कि आखिर इन मासूम बच्चों का अब क्या होगा, जो एक ही पल में अनाथ हो गए।
Updated on:
28 May 2026 02:01 pm
Published on:
28 May 2026 02:00 pm
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