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बीसलपुर को चाहिए औसत से ज्यादा बरसात, नहीं तो प्यासे रहेंगे जयपुर, अजमेर और टोंक

मानसून मेहरबान नहीं रहा तो तीनों जिलों के लोग होंगे हलकान, जलदाय विभाग के पास अगस्त तक का पानी ही बचा

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Water crisis in ajmer, jaipur and tonk

बीसलपुर को चाहिए औसत से ज्यादा बरसात, नहीं तो प्यासे रहेंगे जयपुर, अजमेर और टोंक

अजमेर/मेवदाकलां. अजमेर, जयपुर एवं टोंक जिले की प्यास बुझाने वाले बीसलपुर बांध में जलस्तर अब तेजी से घटने लगा है। इस मानसून में यदि अच्छी बारिश नहीं हुई तो प्रदेश के तीन जिलों में पेयजल सप्लाई गड़बड़ाने की आशंका है। बताया जा रहा है कि बांध में मात्र 4.76 टीएमसी पानी ही शेष बचा है जिससे जुलाई तक या अगस्त के प्रथम पखवाड़े तक सप्लाई की जा सकती है। वर्तमान में बांध का जलस्तर 307.०1 मीटर है। यह जलस्तर पिछले कुछ वर्षों में सबसे कम है।


बीसलपुर बांध से जुड़ी मुख्य बनास नदी में डूब क्षेत्र के ग्राम पाड़लिया व डाई नदी में बांध से लेकर माल्या नयागांव तथा खारी नदी में नेगडिय़ा पुलिया से लेकर चांदथली तक पानी है। यह तीनों प्रमुख नदियां पहले लबालब थीं, लेकिन जलग्रहण क्षेत्र में इस बार कम बरसात के चलते नदियों में भी पानी सिमट गया। सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार वर्तमान में बांध में लगभग 40 वर्ग किलोमीटर तथा नदियों में करीब 4 से 5 किलोमीटर पानी ही भराव क्षमता का फैला हुआ है। पानी की स्थिति को देखते हुए जलदाय विभाग ने गत वर्ष 29 अगस्त से ही बांध से सप्लाई में कटौती करना शुरू कर दिया था। ऐसी स्थिति 2010 में भी हुई थी, तब बांध का जलस्तर 298.67 आरएल मीटर पहुंच गया था।

कब-कब पहुंचा निम्न स्तर तक

वर्षवार, जल निम्नस्तर आरएल, न्यूनतम लेवल
2010 298.67 308.80

2011 305.63 314.25
2012 309.93 314.19

2013 309.73 315.00
2014 311.60 315.50

2015 311.99 315.00
2016 309.92 315.50

2017 311.87 313.92
2018 309.19 308.07

छह जिलों से आता है बांध में पानी


बीसलपुर बांध में प्रदेश के छह जिलों से बारिश का पानी आता है। बांध में उदयपुर, चितौडग़ढ़, भीलवाड़ा, राजसमंद, टोंक और अजमेर जिलों से पानी आता है। सबसे ज्यादा पानी भीलवाड़ा और चितौडग़ढ़ जिले से आता है। इसके पहले २०१७ में भी बांध में पानी की आवक ठीक रही, लेकिन बीते वर्ष २०१८ में बारिश कम हुई। इसके चलते बांध में पानी नहीं आया।

अवैध खनन भी बना रोड़ा


बीसलपुर बांध के जलग्रहण क्षेत्र से जुड़ी तीनों प्रमुख नदियों से अवैध खनन होने के कारण भी नदियों से आने वाले पानी में रुकावट आती है। न्यायालय की रोक के बावजूद बांध के जलग्रहण क्षेत्र की नदियों से दिन-रात अवैध खनन जारी है। अवैध खनन के चलते जगह-जगह नदियों में गहरे गड्ढे हो गए, जिनमें पानी बांध में पहुंचने से पहले ही रुक जाता है। इसके चलते अवैध खनन भी बांध का जलस्तर बढ़ाने में रोड़ा बना है।

कहां कितना पानी

- प्रतिदिन सप्लाई - 645 एमएलडी

- जयपुर को -370 एमएलडी

- अजमेर को 257 एमएलडी

- टोंक को 18 एमएलडी

बीसलपुर बांध में कम जलस्तर को लेकर पहले ही पानी की कटौती करना शुरू कर दिया था। एेसे में अभी जुलाई माह तक पेयजल सप्लाई का पानी है। चिंता की कोई बात नहीं।

रामनिवास जांगिड़, एईएन, जन स्वास्थ्य अभियंत्रिकी विभाग

बांध के लिए धीमी और रिमझिम बारिश फायदेमंद नहीं रहती है। क्योंकि ऐसी बारिश में पानी का बहाव बांध की ओर तेज नहीं रहता है। पानी की आवक के लिए तेज बारिश की दरकार रहती है। तेज बारिश के कारण पानी बड़ी मात्रा में बहकर बांध तक पहुंचता है। इससे बांध का जलस्तर बढ़ता है।

अरविंद अजमेरा, अधीक्षण अभियंता, जलदाय विभाग, अजमेर