
बनास नदी पर बने बीसलपुर बांध के गेटों से छोड़ा जा रहा पानी
अजमेर. यदि राज्य सरकार (state goverment) की इच्छाशक्ति प्रबल होती। दूरगामी लाभ की सोच रखी होती। बांध की भराव क्षमता बढ़ाने के लिए सिंचाई और जलदाय विभाग के तखमीने को अमल में लाया जाता तो बीसलपुर बांध ( bisalpur dame) का लाखों गैलन पानी बेकार नहीं बहता। इस साल बांध की पूर्ण भराव क्षमता से अधिक पानी आने पर बांध प्रशासन को गेट खोलने पड़े। इस साल मानसून काफी मेहरबान रहा। ऐसे में बांध में पानी की खूब आवक रही।
नतीजतन 19 अगस्त से बांध के गेट खोले जाते रहे। यह सही है कि बांध से अब तक 87 टीएमसी पानी छोड़ा जा चुका है। इसी पानी से अजमेर, जयपुर व टोंक जिले को पांच वर्ष (five year) तक की जलापूर्ति की जा सकती थी।
साल 2007 के बाद बीसलपुर बांध के भराव क्षेत्र में बरसात की कमी होती रही है। वर्ष 2010 में बांध के बुरे दिन भी आए और बहुत कम पानी रह गया था। इसके चलते जलापूर्ति व्यवस्था गड़बड़ा गई। इसके बाद भी सरकार ने बांध की भराव क्षमता बढ़ाने के मसौदे को गंभीरता से नहीं लिया।
मानसून से पहले बीसलपुर बांध ( bisalpur dame) में जलस्तर घट रहा था। तब जाकर सरकार की नींद खुली और बांध के पैंदे में जमी मिट्टी हटाने के तहत मुंबई की एक कंपनी से सर्वे कराने की सोची, लेकिन अभी तक इस पर भी कोई तैयारी नहीं है। गनीमत यह रही कि इस बार बारिश ने पिछले सारे रेकार्ड तोड़ दिए। इशके चलते बीसलपुर बांध छलछला गया।
थमी नहीं है निकासी
अक्टूबर माह में भी बांध का एक गेट खोलकर 18 हजार क्यूसेक पानी की निकासी की जा रही है। इस गेट को 3 मीटर खोला गया है। बनास नदी के त्रिवेणी पर पिछले तीन-चार दिनों से पानी की अच्छी आवक रही। इसके चलते बांध में लगातार पानी की आवक बनी हुई है।
बीसलपुर बांध (bisalpur dame) के निर्माण के बाद से यह पांचवीं बार पूर्ण रूप से भरा है। बीसलपुर बांध से अजमेर व आसपास के क्षेत्र को वर्ष 1994 से पानी की सप्लाई शुरू की गई थी। जयपुर व आसपास के क्षेत्र को वर्ष 2009 से जलापूर्ति की गई। बांध बनने के बाद से अब तक साल 2004, 2006, 2014 तथा 2016 तथा २०१९ में अपने पूर्ण भराव क्षमता तक पहुंचा है।
नहरों में पानी छोड़ा जाता तो....
बीसलपुर बांध परियोजना की दायीं एवं बायीं मुख्य नहर से 256 गांव की करीब 81 हजार 600 हैक्टेयर भूमि सिंचित हो जाती है। इसमें बांध की 56.61 किलोमीटर लंबी दायीं मुख्य नहर से 69 हजार 393 इख्तियार भूमि व 18.65 किलोमीटर लंबी बायीं मुख्य नहर से 122207 हैक्टेयर भूमि की सिंचाई के लिए करीब 8 टीएमसी पानी दिया जाता है। 87 टीएमसी पानी को यदि नहरों में छोडक़र सिंचाई में काम में लिया जाता तो 11 वर्ष तक का सिंचाई का कार्य हो जाता।
ईसरदा बांध (esarda dame) छलछला जाता..
बीसलपुर बांध से इस वर्ष जितना पानी छोड़ा गया। अगर ईसरदा बांध बना हुआ होता तो करीब 8 बार इस पानी से भर सकता था। ईसरदा कोपर डेम की भराव क्षमता 10.77 टीएमसी है। राज्य सरकार की कथित लापरवाही से अभी तक यह बांध नहीं बना है। बीसलपुर बांध (bisalpur dame) बनास नदी पर बना हुआ है। इसी तरह ईसरदा बांध भी बनास नदी पर ही बनाया जा रहा है जो सवाईमाधोपुर जिले में है।
ब्राह्मणी नदी प्रोजेक्ट से मिल सकता है फायदा
पूर्व मुख्यमंत्री ने जुलाई 2014 में जारी बजट में जिला चित्तौड़ की तहसील बेगूं में ब्राह्मणी नदी पर बांध का निर्माण कर बीसलपुर बांध में वाटर डायवर्जन के लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने की घोषणा की थी। विभाग बीते 5 साल में केवल फिजिबिलिटी रिपोर्ट ही तैयार करवा सका।
मुख्यमंत्री ने फरवरी 2018 में जारी बजट में कहा था कि बीसलपुर बांध पिछले 16 साल में केवल 4 बार ही पूरा भरा है। इसमें पानी की आवक बढ़ाने के लिए 6 हजार करोड़ की लागत वाली ब्राह्मणी बनास परियोजना तैयार की है। इस परियोजना से जयपुर, अजमेर व टोंक जिले लाभान्वित होने की उम्मीद थी।
राज्य सरकार (state govt.) ही करेगी निर्णय
मनीष कुमार बंसल, सहायक अभियंता सिंचाई विभाग बीसलपुर परियोजना के अनुसार राज्य सरकार ने बांध की भराव क्षमता 350.50 आरआर मीटर कर रखी है। बांध में पानी घटाने बढ़ाने का कार्य राज्य सरकार के स्तर का है। अगर सरकार चाहे तो बांध का जलस्तर बढ़ा सकती है। बीसलपुर बांध से 19 अगस्त से गेट खोल कर अब तक 87 टीएमसी पानी की निकासी की जा चुकी है।
हर साल 18 टीएमसी पानी का उपयोग
रामनिवास जांगिड़, सहायक अभियंता जलदाय विभाग केकड़ी ने बताया कि बीसलपुर बांध से हर वर्ष 18 टीएमसी पानी पीने के उपयोग में लिया जाता है। वर्तमान में अजमेर जिले को करीब 300 एमएलडी एवं जयपुर को 500 एमएलडी पानी प्रतिदिन दिया जा रहा है। बांध से की गई निकासी के पानी से करीब 5 वर्ष तक के पीने का पानी हो जाता।
Published on:
09 Oct 2019 06:30 am
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