
प्रतीकात्मक चित्र
दिनेश कुमार शर्मा
अजमेर (Ajmer news). ऊंटों की आबादी बढ़ाने और उनके संरक्षण के लिए राज्य सरकार की ओर से प्रोत्साहन योजना शुरू की गई है, लेकिन इसके बावजूद जमीनी स्तर पर परिणाम अपेक्षित नजर नहीं आ रहे हैं। ऊंटों की संख्या में बहुत अधिक बढ़ोतरी नहीं देखी गई है, जिस पर गत दिनों अदालत ने भी चिंता जताई है।
राज्य सरकार की ओर से 2022-23 में उष्ट्र संरक्षण योजना शुरू की गई। अक्टूबर 2024 के बाद योजना के तहत दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि को 10 हजार से बढ़ाकर 20 हजार रुपए कर दिया। योजना में ऊंट के बच्चे के जन्म के दो माह के भीतर आवेदन करने पर पहली तथा 1 वर्ष पूर्ण होने पर दूसरी किश्त दी जाती है। विभाग की ओर से समीपवर्ती पशु चिकित्सालय के चिकित्सक से भौतिक सत्यापन कराया जाता है। राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे लाभार्थी के खाते में हस्तांतरित होती है। योजना में एक पशुपालक को 5 पशुओं तक के लिए लाभ मिलता है।
आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024-25 में 12 ऊष्ट्रपालक ऊंट के 35 बच्चों के लिए लाभान्वित हुए, जबकि 2025-26 में 25 ऊष्ट्रपालक ऊंट के 78 बच्चों के लिए लाभान्वित हुए। इनमें प्रथम किश्त के रूप में 7 लाख 80 हजार रुपए उपलब्ध कराए गए और दूसरी किश्त प्रक्रियाधीन है। योजना में आवेदन ई-मित्र या मोबाइल के माध्यम से किया जाता है।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 27 मार्च को ऊंटों की घटती संख्या और उसके संरक्षण के प्रयासों के बारे में स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने ऊंटों की घटती संख्या के बारे में स्वप्रेरणा से दर्ज याचिका पर यह आदेश दिया। कोर्ट ने इस बात पर भी चिंता जाहिर की कि कानून में संशोधन के बाद ऊंटों की संख्या में कमी आई है। एक अनुमान के अनुसार वर्ष 2004 में प्रदेश में साढ़े सात लाख ऊंट थे। वर्ष 2015 में कानून बना तो ऊंटों की संख्या घटकर 3.26 लाख और वर्ष 2021 में यह करीब डेढ़ लाख रह गई।
राजस्थान सरकार ने ऊंटों की घटती आबादी और उनके संरक्षण के लिए ‘राजस्थान ऊंट (वध निषेध एवं अस्थायी प्रवासन या निर्यात विनियमन) अधिनियम, 2015’ लागू किया। इसके तहत वध व गैर-कानूनी परिवहन पर पूर्ण प्रतिबंध है। 2022-23 में ‘ऊंट संरक्षण एवं विकास नीति’ शुरू की गई। इसके तहत ऊंटनी के बच्चे पर प्रोत्साहन राशि बढ़ाई गई और 10 ऊंटों तक का मुफ्त बीमा शामिल है।
पूर्व में निर्यात/परिवहन के लिए जिला कलक्टर की अनुमति अनिवार्य थी। इसे सरल बनाते हुए अब एसडीएम व मेला अधिकारी भी कृषि/अन्य कार्यों के लिए ऊंट ले जाने के लिए विशेष परमिट जारी कर सकते हैं। 2015 के कानून के बाद ऊंटों की बिक्री ठप होने और 2022 में सरकार द्वारा संशोधन की आवश्यकता स्वीकार करने के बावजूद, ऊंटों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई। सरकार द्वारा नियमों को अधिक लचीला बनाने और पालन-पोषण को आसान बनाने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
Updated on:
26 Mar 2026 01:11 pm
Published on:
26 Mar 2026 01:11 pm
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