
gajendra singh shekhawat
अजमेर.
भारत 5600 लीटर पानी में एक किलो चावल उगाता है, जबकि चीन में 350 लीटर पानी में एक किलो चावल की पैदावार हो रही है। इजरायल 70 प्रतिशत समुद्र के खारे पानी को पेयजल के रूप में उपयोग कर रहा है। पानी के कमी और सीमित उपयोगिता के उदाहरणों से हमें सावधान हो जाना चाहिए। यह बात केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने सोफिया कॉलेज में दो दिवसीय सेमिनार के शुभारंभ पर कही।
वॉटर ए फोकस ऑन द फ्यूचर एंड इनोवेशन पर बोलते हुए शेखावत ने कहा कि भारत की सालाना औसत बरसात 1190 मिलीमीटर है। इसके रूप में 4 लाख मिलियन क्यूबिक मीटर पानी बरसता है। दुर्भाग्य से दो लाख मिलियन क्यूबिक मीटर पानी समुद्र में व्यर्थ बह जाता है। बचे हुए पानी का करीब 85 प्रतिशत हिस्सा कृषि और 15 प्रतिशत में औद्योगिक, घरेलू और अन्य कार्यों में उपयोग होता है। भारत तेजी से बदल रहा है। यह दुनिया की बढ़ती हुई अर्थशक्ति है, लेकिन पानी के बगैर हम कैसे टिके रह सकते हैं। इससे पहले उपाचार्य डॉ. रानी ने स्वागत किया। संयोजक डॉ. ज्योति चंदेल ने धन्यवाद दिया।
बदल रही प्रकृति और मौसम
वाटरमैन राजेंद्र सिंह ने कहा कि अंधाधुंध जलदोहन से धरती की प्रकृति और मौसम बदल चुके हैं। हमें प्रकृति को पुनजीर्वित करना है, तो पानी का मूल्य समझना होगा। नीर, नारी और नदी के सम्मान के चलते भारत विश्व गुरू कहलाता था। राजस्थान सहित कई राज्यों में शहरी-ग्रामीण इलाकों में जलस्तर 250 से 400 मीटर तक गिर चुका है।
सेमिनार में यह विचार आए सामने
-2025 तक 1 करोड़ लोगों को स्वच्छ पेयजल मिलना मुश्किल
2045 तक 3 करोड़ लोगों के सामने पानी गंभीर संकट
-विद्यार्थी समझाएं लोगों को पानी का सीमित इस्तेमाल करना
-हर घर-दफ्तर, शहर-गांव सहेजे बरसात के पानी को
-समुद्र और दूषित पेयजल को तकनीकी इस्तेमाल से बनाया जाए पीने लायक
Published on:
25 Feb 2020 08:24 am
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