अजमेर. महिलाओं और युवतियों ने शुक्रवार को पारंपरिक ईसर-गणगौर का पूजन किया। बैंड-बाजों और ढोल-ढमाकों के बीच महिलाएं और युवतियां कुओं, हैंडपम्प और जलाशयों से जैलें लेने पहुंची। बाद में घरों में ईसर-गणगौर की कथा सुनी। शहर में मदार, फाॅयसागर रोड नया बाजार, पुरानी मंडी, शास्त्री नगर, आदर्श नगर, वैशाली नगर, पंचशील, मदार गेट, धोलाभाटा, रागमंज, बिहारी गंज, हरिभाऊ उपाध्याय नगर सहित अन्य इलाकों में महिलाएं और युवतियां सिर पर कलश लेकर जैलें लेने पहुंचीं। कलश और लोटे में मोगरे, गुलाब, गैंदे के फूल और हरी घास को विशेष ढंग से सजाया गया। महिलाओं ने बैंड-बाजों की स्वर लहरियों और ढोल-ढमाकों पर नृत्य भी किया।
खोल ए गणगौर माता…
घरों में ईसर-गणगौर की सामूहिक पूजा-अर्चना की गई। महिलाओं ने गौर-गौर गोमती, ईसर पूजे पार्वती…, छड़ी गुलाब की… ईसरजी तो पेचो बांधे…, ऊंचो चंवरो चैखटो जल जमना…, खोल ए गणगौर माता… गीत भी गाए।
शहर में हुए उद्यापन
गणगौर पर धार्मिक मान्यता के अनुसार कई विवाहित महिलाओं ने उद्यापन भी किया। घरों में महिलाओं को बुलाकर घेवर, नुकती, गुलाब जामुन, आलू की सब्जी, पूड़ी, नमकीन और अन्य पकवान खिलाकर उपहार दिए गए। सुहागिनों ने सास-ननद, जेठानी और महिलाओं को सुहाग की सामग्री भेंट की। शाम को ईसर-गणगौर को परम्परानुसार भोग लगाकर पानी पिलाया गया।
निकलेगी गणगौर की सवारी
सोलथम्बा फरिकेन की तरफ से 31 मार्च को शाम 7.30 बजे नया बाजार, आगरा गेट होते हुए राठौड़ बाबा और गणगौर की सवारी गाजे-बाजे के साथ निकाली जाएगी। दूसरे दिन मोदियाना गली में मेहंदी और लच्छे का वितरण होगा। इसी तरह घसेटी धड़े की ईसर-गणगौर की सवारी भी परम्परानुसार निकाली जाएगी। मालूम हो कि अजमेर की गणगौर की सवारियां देखने के लिए दूरदराज से लोग उमड़ते हैं।