20 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में उर्दू के बिगड़ते स्वरूप पर भारी चिन्ता, दोहा विवि के प्रोफेसर का शोध पढ़ने लायक

-कतर स्थित दोहा विवि के प्रोफेसर डॉक्टर रिजवान अहमद का व्याख्यान-बॉलीवुड में आजकल उर्दू का सही प्रयोग और उच्चारण नहीं हो रहा है।-मुस्लिम युवा भी उर्दू को नहीं समझ रहे हैं, यह नई शिक्षा का प्रभाव है।

3 min read
Google source verification
Aligarh muslim university

Aligarh muslim university

अलीगढ़ । अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के भाषा विज्ञान विभाग द्वारा कतर स्थित दोहा विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉक्टर रिजवान अहमद ने कला संकाय लाउंज में ‘‘सूचीबद्धता, पहचान तथा भाषाई बदलावः उर्दू की उपनिवेशवादी तथा उत्तर उपनिवेशवादी काल्पनिकताएं’’ विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। जिसमें उन्होंने उर्दू भाषा के विविध लहजों तथा भारतीयों की विभिन्न नस्लों के लिये इसके विभिन्न अर्थों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि बॉलीवुड में आजकल उर्दू का सही प्रयोग और उच्चारण नहीं हो रहा है।

ये भी पढ़ें - अब नहीं होगी वाहन चोरी होने की टेंशन, हाईटेक सिक्योरिटी नंबर प्लेट से लगेगी ब्रेक

ये बोले डॉक्टर अहमद
डॉक्टर अहमद ने कहा कि भारत के विभाजन से पूर्व पैदा होने वाली नस्ल उर्दू को मुस्लिम पहचान के लक्षण के रूप में नहीं देखती है। उन्होंने कहा कि उर्दू की विशेष ध्वनियों का विभाजन जो मुसलमानों तथा हिन्दुओं में बराबर रूप से पाया जाता है, उससे भी यह सिद्ध होता है कि इन आवाजों का प्रयोग मुस्लिम पहचान के साथ विशेष नहीं है। डॉक्टर रिजवान अहमद ने कहा कि मुसलमानों तथा हिन्दुओं की विभिन्न नस्लों पर शोध से ज्ञात होता है कि विभिन्न नस्लें उर्दू भाषा को विभिन्न अर्थ देती हैं। उन्होंने कहा कि प्राचीन नस्ल के मुकाबले मुस्लिम युवा, उर्दू के साथ स्वयं को नहीं जोड़ते। मुस्लिम युवाओं की बातचीत में उर्दू की आवाजों के अध्ययन से पता चलता है कि वह तीन से पॉच आवाजों को छोड़ रहे हैं जो उर्दू भाषा के साथ विशेष है।

ये भी पढ़ें - जानिए कौन सा पौधा होगा आपके लिए “लकी”, तरक्की और समृद्धि के लिए इस मानसून लगायें अपनी राशि के हिसाब से ये पौधे

उर्दू के संकेतात्मक अर्थों में परिवर्तन
उन्होंने उर्दू के 160 वर्षीय इतिहास पर चर्चा करते हुए कहा कि उर्दू के संकेतात्मक अर्थों में यह परिवर्तन उन समाजिक एवं राजनीतिक परिवर्तनों का प्रतिबिंब है जो बीसवीं शताब्दी में यहॉ के मुसलमानों के अंदर आई है। उन्होंने बल देते हुए कहा कि भारत में साक्षरता कार्यक्रम और शिक्षा के तरीके में आने वाली परिवर्तन में भी उर्दू के संकेतात्मक अर्थों में परिवर्तन हुआ क्योंकि बहुत से मुसलमानों उर्दू लिखने के लिये देवनागरी को अपनाया जो एक बड़े परिवर्तन का कारण बना।

ये भी पढ़ें - World population day 2019: यदि ऐसे ही बढ़ती रही जनसंख्या, तो परिणाम होगें गंभीर, ये आंकड़े सोचने पर कर देंगे मजबूर...

बॉलीवुड और उर्दू
डॉ. अहमद ने बालीवुड में भाषा के स्तर पर आने वाले परिवर्तनों के विषय पर अपना शोध प्रस्तुत करते हुए उर्दू के प्रयोग में आने वाले परिवर्तन की चर्चा की जिसे हालिया वर्षों में विभिन्न स्कॉलर ने महसूस किया है। डॉ. रिजवान अहमद ने समाजिक एवं भाषाई पहलू से बॉलीवुड के गीतों में प्रयोग होने वाली भाषा तथा उसमें उर्दू के तत्वों का विश्लेषण प्रस्तुत करते हुए कहा कि यह बड़े स्तर पर होने वाले भाषाई परिवर्तन की प्रतीक है। उन्होंने कहा कि पूर्व काल के बॉलीवुड के स्क्रिप्ट लेखक, गीतकार तथा संगीतकार उर्दू से भलीभांति परिचित होते थे तथा अधिकतर की शिक्षा भी उर्दू में हुई थी। उनके स्थान पर नई पीढ़ी के स्क्रिप्ट राइटर, गीतकारों तथा संगीतकारों ने ले ली है जो हिन्दी तथा अंग्रेजी की शैक्षणिक परम्पराओं से सम्बन्ध रखते हैं।

ये भी पढ़ें - सीएम योगी जिस मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर 1076 की खुद कर रहे निगरानी, उसका ये वायरल ऑडियो सुनकर आप भी रह जाएंगे हैरान

टीवी एंकर ऊर्दू का गलत उच्चारण करते हैं
व्याख्यान की अध्यक्षता करते हुए इतिहास विभाग के प्रो. मोहम्मद सज्जाद ने कहा कि टेलीविजन ने बोलचाल की एक नई भाषा तथा नये लहजे का रिवाज दिया है। उन्होंने कहा कि टेलीविजन के न्यूज़ एंकर शब्दों को गलत उच्चारण के साथ धड़ल्ले से प्रयोग करते हैं तथा उन्हें सुनने तथा देखने वाले भी इसके आदी होते जा रहे हैं।

ये भी पढ़ें - amu के डेंटल कॉलेज में क्लीनिकल ट्रेनिंग प्रोग्राम में प्रवेश की तिथि बढ़ी

दिल्ली में मुस्लिम पहचान
इससे पूर्व भाषा विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. एस इम्तियाज हसनैन ने अतिथि वक्ता का संक्षिप्त परिचय कराया तथा उनके शैक्षणिक एवं शोध प्रयासों की विशेष रूप से चर्चा की, जिनमें लेखों में भाषाओं के प्रयोग, दिल्ली में मुस्लिम पहचान तथा बॉलीवुड के गीतों में बदलती हुई भाषाई परम्पराएं शामिल हैं। अंत में डॉ. मोहम्मद जहांगीर वारसी ने अतिथिवक्ता तथा उपस्थितजनों के प्रति आभार व्यक्त किया। व्याख्यान के दौरान शिक्षक व शोधार्थी मौजूद रहे।

ये भी पढ़ें - पति को मुठभेड़ में मारने की धमकी देकर यूपी पुलिस के दरोगा करते रहे महिला के साथ बलात्कार, गर्भवती होने पर...