
अलीगढ़ में वेदपाल की हत्या के बाद घर के बाहर लगी रिश्तेदारों की भीड़।
अलीगढ़ के रेनुका अस्पताल का कमरा नंबर 105 उस दिन अजीब खामोशी से भरा हुआ था। ऑपरेशन के बाद बेड पर लेटा 32 साल का वेदपाल गहरी नींद में था। अस्पताल के उस कमरे में सब कुछ सामान्य दिख रहा था। इसी बीच अचानक चली गोली की आवाज ने अस्पताल की शांति को चकनाचूर कर दिया। लोग मौके पर दौड़कर पहुंचे तो वेदपाल लहूलुहान पड़ा था। उसकी मौत हो चुकी थी।
इस कहानी शुरू होती है मथुरा की एक प्राइवेट कंपनी से। यहां बीए-एलएलबी पास वेदपाल और एक युवती की नजरें मिलीं और दोनों में प्यार हो गया। 5 साल तक चला यह अफेयर उस वक्त जानलेवा मोड़ पर आ गया, जब लड़की के रसूखदार परिवार ने इस रिश्ते को ठुकरा दिया। लड़की का परिवार पुलिस महकमे से ताल्लुक रखता था और उन्हें एक साधारण किसान के बेटे का अपनी बेटी के करीब आना नागवार गुजरा।
बीती 2 फरवरी को जब लड़की के घर बारात आई थीं, तब वेदपाल वहां जा पहुंचा। उसने ऐसा हंगामा किया कि बारात वापस लौट गई और शादी टूट गई। लड़की के घरवालों का गुस्सा सातवें आसमान पर था। उन्होंने वेदपाल की जमकर धुनाई की और उसे पुलिस के हवाले कर दिया। शांति भंग की धाराओं में वेदपाल जेल भेज दिया गया।
वेदपाल के छोटे भाई सोनपाल की मानें तो परिवार को अंदेशा था कि बाहर निकलते ही वेदपाल की जान को खतरा हो सकता है। सोनपाल बताते हैं कि हमने जानबूझकर 14 दिनों तक उसकी जमानत नहीं कराई। हमें लगा कि वह जेल की सलाखों के पीछे सुरक्षित रहेगा और इस बीच लड़की की दूसरी जगह शादी हो जाएगी तो मामला शांत पड़ जाएगा। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
12 फरवरी को जब वेदपाल जेल से छूटा, तो करीब 25 से 30 लोगों ने उसे जेल के बाहर घेर लिया था। इसकी जानकरी होने पर जेल पुलिस को सूचना दी गई। उस वक्त तो पुलिस की सुरक्षा में बचकर वह अलीगढ़ तक आ गया, लेकिन जेल से बाहर आने के बाद भी वेदपाल अपनी जिद पर अड़ा रहा और लड़की को फोन करना बंद नहीं किया।
14 मार्च को लड़की पक्ष के लोग खैर के 2 लोगों से मिले। उनसे कहा कि वेदपाल से कह दो कि अब सुधर जाए। लड़की का रिश्ता हो चुका है। उसे परेशान न करे। वरना अंजाम बुरा होगा। उन लोगों ने वेदपाल को समझाया, लेकिन वेदपाल नहीं माना। इसके बाद उसकी हत्या की योजना बनाई गई। इसके बाद बाकायदा उसकी रेकी की गई। गांव के ही दो भेदियों ने वेदपाल की हर हरकत की जानकारी हमलावरों तक पहुंचाई। जब हाथ के ऑपरेशन के लिए वेदपाल को मैरिस रोड स्थित अस्पताल में भर्ती कराया गया, तो हमलावरों को सटीक मौका मिल गया।
16 मार्च की दोपहर थी। वेदपाल ऑपरेशन के बाद गहरी नींद में था। तभी हमलावर अस्पताल में दाखिल हुए। उन्होंने पहले कई वार्डों की तलाशी के बाद वे कमरा नंबर 105 में जा पहुंचे। वहां सोते हुए वेदपाल के सिर पर तमंचा सटाकर ट्रिगर दबा दिया। इससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई।
पुलिस ने अब तक लड़की के पिता देवेंद्र को गिरफ्तार कर लिया है। वह बागपत में सिपाही हैं। वहीं, आगरा में तैनात सिपाही भाई जितेंद्र हिरासत में है। मुख्य आरोपी पीएसी का जवान चचेरा भाई भूपेंद्र चौधरी अभी फरार है, जिसकी तलाश में पुलिस की तीन टीमें गाजियाबाद से लेकर इटावा तक खाक छान रही हैं।
सोनपाल का कहना है कि लड़की के घरवालों ने पहले ही साफ कर दिया था कि वे उनक हैसियत के मुताबिक नहीं हैं। इस वजह से यह रिश्ता नहीं हो सकता है। वेदपाल के पिता एक साधारण किसान हैं, जबकि लड़की का पूरा परिवार रसूखदार और पुलिस महकमे है।
Updated on:
19 Mar 2026 01:34 pm
Published on:
19 Mar 2026 01:05 pm
बड़ी खबरें
View Allअलीगढ़
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
