एमएमयू में दलितों व पिछड़ों को आरक्षण देने के बयान पर एससी आयोग के अध्यक्ष पर पलटवार

एमएमयू में दलितों व पिछड़ों को आरक्षण देने के बयान पर एससी आयोग के अध्यक्ष पर पलटवार

Amit Sharma | Updated: 03 Jul 2018, 07:55:29 PM (IST) Aligarh, Uttar Pradesh, India

अमुवि ने स्पष्ट किया है कि अमुवि के अल्पसंख्यक दर्जे से सम्बन्धित वाद देश के सर्वोच्च न्यायालय में लम्बित है।

अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय ने आज स्पष्ट किया है कि इसकी व्यवस्था संसद द्वारा पारित एएमयू एक्ट 1981 के अन्तर्गत नियंत्रित है जिसने विश्वविद्यालय को अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा दिया है। इसके अतिरिक्त सभी अल्पसंख्यक संस्थानों को अनुच्छेद 15(5) के अन्तर्गत अन्य संवैधानिक आरक्षणों से मुक्त रखा गया है। अमुवि ने स्पष्ट किया है कि अमुवि के अल्पसंख्यक दर्जे से सम्बन्धित वाद देश के सर्वोच्च न्यायालय में लम्बित है। अमुवि के सहकुलपति प्रोफेसर तबस्सुम शहाब ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष प्रोफेसर राम शंकर कठेरिया से भेंट कर उन्हें इस आश्य से अवगत कराया।


प्रवेश नीति में किसी प्रकार का आरक्षण संबंधी बदलाव संभव नहीं
विश्वविद्यालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि अमुवि ने कभी भी मुसलमानों के आरक्षण की नीति पर कार्य नहीं किया है बल्कि विश्वविद्यालय में धर्म अथवा जाति से अलग केवल इंटरनल छात्र व छात्राओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जाता है। अमुवि ने आगे कहा है कि 2005 के इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्णय पर सर्वोच्च न्यायालय ने रोक लगाई और जब तक अमुवि के अल्पसंख्यक स्वरूप से सम्बन्धित वाद का निर्णय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नहीं लिया जाता, इसकी प्रवेश नीति में किसी प्रकार का आरक्षण संबंधी बदलाव संभव नहीं है। प्रो. तबस्सुम शहाब ने कहा कि उक्त कमीशन द्वारा आरक्षण संबंधी पूछे गये प्रश्नों का उत्तर अमुवि अवश्य देगा।

2- रक्तदान शिविर
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जवाहर लाल नेहरू मेडीकल काॅलेज द्वारा एक रक्तदान शिविर कासिमपुर पावर हाउस, हरदुआगंज, अलीगढ़ के सहयोग से आयोजित किया गया जिसमें 415 स्वयंसेवकों ने रक्तदान किया। विश्वविद्यालय ब्लड बैंक भविष्य में ऐसे और अधिक रक्तदान शिविर आयोजित करेगा। इस अवसर पर एक व्याख्यान द्वारा लोगों को रक्तदान के लाभों के बारे में बताया गया और भ्रांतियों को दूर किया गया। स्वयंसेवा के रूप में रक्तदान की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए रक्तदाताओं के प्रकारों, सुरक्षात्मक उपायों तथा टीटीआई स्क्रीनिंग के बारे में भी बताया गया। यह भी बताया गया कि विश्वविद्यालय ब्लड बैंक अब एनएटी तकनीक का प्रयोग करने की तैयारी में है। यह तकनीक उत्तर प्रदेश में वर्तमान में केवल किंग जाॅर्ज मेडीकल यूनीवर्सिटी तथा पीजीआई लखनऊ में प्रयोग की जा रही है।

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