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UP: जूस बेचने और ताला बनाने वाले को 56 करोड़ का नोटिस, सफाईकर्मी ने 33 और ट्रक ड्राइवर ने किया 3 करोड़ का बिजनेस 

UP Fake Income Tax Notice: उत्तर प्रदेश में आयकर विभाग ने जूस बेचने वाले के यहां 56 करोड़, ताला बनाने वाले के यहां 7 करोड़, सफाईकर्मी के यहां 33 करोड़ और ट्रक ड्राइवर के यहां 3 करोड़ रुपए का नोटिस भेजा है। आइए बताते हैं क्या है पूरा मामला ? 

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UP Fake GST Notice: जिसमे कभी एक लाख रुपये एक साथ नहीं देखे हो यदि उसके यहां इनकम टैक्स करोड़ों का नोटिस भेज दे तो उसके पांव तले जमीन खिसकना लाजमी है। ऐसा ही हुआ है उत्तर प्रदेश के कन्नौज, अलीगढ और मथुरा में। आयकर विभाग के नोटिस के बाद पीड़ितों की परेशानी बढ़ती जा रही है। उनके मन में बस एक ही सवाल कौंध रहा है कि आखिर इतने पैसे हमारे यहां कैसे ? पहले समझते हैं कौन और कहां से हैं ये खाताधारक।

करण कुमार, अलीगढ

अलीगढ जिले के गाजियाबाद-अलीगढ़ हाईवे से करीब 7 किलोमीटर अंदर कस्बा चंडौस कस्बे के रहने वाले करण कुमार 30 साल के करण कुमार स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की खैर ब्रांच में बतौर सफाईकर्मी काम करते हैं। उनकी तनख्वाह 15 हजार रुपए है। आयकर विभाग ने उन्हें 33 करोड़ 88 लाख 85 हजार 368 रुपए का नोटिस भेजा है। 

योगेश शर्मा, अलीगढ

योगेश शर्मा अलीगढ़ के नौरंगाबाद में किराए के मकान में रहते हैं। योगेश ताला कारीगर हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वो रोजाना 200 से 250 रुपए तक कमा पाते हैं। 29 मार्च को इनकम टैक्स का 11 करोड़ 11 लाख रुपए का नोटिस भेजा है। 

रहीस, अलीगढ

अलीगढ के सराय रहमान मोहल्ला में तार वाली गली के रहने वाले रहीस के जूस की दुकान सिविल कोर्ट के सामने है। दुकान का नाम RS जूस कॉर्नर है। आयकर विभाग का मानना है कि रहीस का 2021-22 में सिर्फ चार महीने का टर्नओवर 7 करोड़ 79 लाख 2457 रुपए है। इसी बात पर उन्हें टैक्स जमा करने का नोटिस भेजा गया है। 

अवनेंद्र कुमार, कन्नौज

कन्नौज के छिबारमऊ थाने के हाथिन गांव के रहने वाले रामलाल के बेटे अवनेंद्र कुमार दिल्ली में शर्मा ट्रंसपोर्ट कंपनी में ट्रक चलाते हैं। 25 मार्च को GST के उन्हें दो नोटिस मिले। एक 75,97,040 रुपये का है और दूसरा 2, 89,06,579 रुपये का है।

सौरभ कुमार, मथुरा

मथुरा के औरंगाबाद के दामोदपुरा के सुंदरलाल के बेटे सौरभ कुमार किसान हैं। उनके पास महज 2 बीघे जमीन है। 26 मार्च को भारत सरकार ने आयकर का 30 करोड़ रुपये का नोटिस उनके घर पर भेज दिया। इतनी रकम का नोटिस देख उनके होश उड़ गए।

इन सभी घटनाओं का पैटर्न बिल्ल्कुल एक जैसा है। सभी को एक या दो दिनों के अंतराल में नोटिस मिला है। जिन्हे भी नोटिस मिला है वो छोटे-मोटे व्यापार या नौकरीपेशा लोग हैं। ये कहा जा सकता है कि इनमे से ज्यादातर लोगों को इसकी बेसिक जानकारी भी नहीं होगी। फिर ये नोटिस इनके पास आया कैसे ?

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दरअसल, जिन लोगों को IT विभाग की ओर से नोटिस मिले हैं, उनके आधार कार्ड का गलत इस्तेमाल हुआ हो सकता है। संभव है कि धोखाधड़ी करने वालों ने आधार में दर्ज मोबाइल नंबर भी बदलवा दिया हो, क्योंकि GST से जुड़ा OTP उसी नंबर पर आता है। 1 जनवरी 2021 के बाद GST नंबर प्राप्त करने की प्रक्रिया में कई बड़े बदलाव हुए हैं। अब फिजिकल वेरिफिकेशन की अनिवार्यता खत्म हो गई है, जिससे इस प्रक्रिया का दुरुपयोग भी बढ़ गया है।

 अब क्या है उपाय ? 

इनकम टैक्स विभाग अब यह जांच कर रहा है कि करोड़ों रुपए के ये बिल किस कम्प्यूटर, लैपटॉप या मोबाइल से जेनरेट हो रहे हैं। अगर जिन लोगों के नाम पर ये लेनदेन हो रहा है, उनका वास्तव में इससे कोई लेना-देना नहीं है, तो विभाग इस पहलू को भी ध्यान में रखता है। वह इन लोगों के मोबाइल नंबरों की भी पड़ताल कर रहा है कि क्या इनसे कोई लेनदेन हुआ है या नहीं। कुल मिलाकर, इस केस की जांच लंबी चलती है, लेकिन अंत में नोटिस पाने वालों को राहत मिलने की संभावना रहती है। आशंका यह भी है कि ये फर्में केवल GST चोरी के मकसद से खोली गई हैं, जबकि वास्तव में इनका कोई अस्तित्व नहीं है।