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अलीगढ़ में सिर्फ तीन दिन का कोयला शेष, बिजली बनाने वाली एक यूनिट हुई बंद

हरदुआगंज तापी परियोजना में कोयले के भारी संकट के चलते बिजली की 110 मेगावाट की इकाई बंद कर दी गइ है। वहीं कोयले के स्टाक की कमी से ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली संकट गहराने की आशंका जताई जा रही है। वर्तमान में ताप विद्युत परियोजना की उत्पादन क्षमता 200 मेगावाट कम हो गई है।

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अलीगढ़ जिले की हरदुआगंज तापी परियोजना (Harduaganj Tapi Project) पिछले काफी दिनों ये भारी कोयला संकट से जूझ रही है। इसके चलते बिजली की करीब 110 मेगावाट की एक इकाई बंद हो गई है। बताया से भी जा रहा है, यहां सिर्फ तीन दिन के कोयले का स्टाक बचा है। अधिकारियों का दावा है कि जल्द ही वह कोयले की इस कमी की आपूर्ति कर लेंगे। जिसके बाद फिर से बंद इकाई में उत्पादन शुरू हो पाएगा। वहीं कोयले के स्टाक की कमी से ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली संकट गहराने की आशंका जताई जा रही है। वर्तमान में ताप विद्युत परियोजना की उत्पादन क्षमता 200 मेगावाट कम हो गई है।

1270 मेगा वाट का हो रहा उत्पादन

दरअसल, कासिमपुर पावर हाउस स्थित हरदुआगंज तापीय परियोजना में कोयला की कमी की वजह से पिछले दिनों 110 मेगा वाट की एक यूनिट बंद कर दी गई थी। तापीय परियोजना की सबसे बड़ी 660 मेगा वाट की यूनिट के साथ ही 250 मेगा वाट 250 मेगा वाट की यूनिटों में बिजली का उत्पादन हो रहा है, बताया जा रहा है कि हरदुआगंज तापीय परियोजना में 1270 मेगा वाट का उत्पादन होता है। उधर, बिजली संकट के चलते करीब 200 मेगावाट उत्पादन में कमी आई है। 660 मेगावाट इकाई को पूरी क्षमता से चलाने के लिए प्रतिदिन लगभग 9 हजार मीट्रिक टन कोयले की आवश्यकता होती है और सभी इकाइयों को चलाने के लिए प्रतिदिन 22 हजार मीट्रिक टन से अधिक कोयले की आवश्यकता होती है। लेकिन कोयले की कमी के कारण एक यूनिट बंद होने से बिजली उत्पादन में कमी आई है।

शहर, कस्बों व ग्रामीण क्षेत्रों में कटौती

कोयला संकट की वजह से उत्पादन में गिरावट से बिजली संकट शुरू हो गया है। जनपद में उसका असर भी दिखने लगा है। शहर, कस्बों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में अघोषित कटौती होने लगी है। पहले मंडल एवं जिला मुख्यालय को 24 घंटे, तहसील को 22 घंटे एवं गांवों को 18 घंटे बिजली आपूर्ति दी जा रही थी। कोयला संकट गहराने के बाद कटौती शुरू हो गई है। अधिकारी भी स्वीकार रहे हैं कि वर्तमान समय में शहरी क्षेत्र में साढ़े 23 घंटे की आपूर्ति हो रही है जबकि अलग-अलग क्षेत्र में टुकड़ों में एक से लेकर दो घंटे तक की कटौती हो रही है। कस्बों एवं गांवों में भी एक से तीन घंटे या उससे अधिक की अघोषित कटौती हो रही है।