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बाबा बरछी बहादुर की दरगाह के आगे झुक गयी थी अंग्रेजी हुकूमत

सैकड़ों साल पुरानी इस दरगाह के बारे में मान्यता है कि यहां जो भी चादर चढ़ाकर इबादत करता है उसकी हर मन्नत पूरी होती है।

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Amit Sharma

Nov 04, 2016

dargaagh

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अलीगढ़।
कठपुला के पास स्थित बरछी बहादुर की दरगाह पर हिन्दू-मुस्लिम, सिख-ईसाई सभी समुदाय के लोग इबादत करने दूर-दूर से आते हैं। सैकड़ों साल पुरानी इस दरगाह के बारे में मान्यता है कि यहां जो भी चादर चढ़ाकर इबादत करता है उसकी हर मन्नत पूरी होती है। यहां हर रोज सैकड़ों लोग आते हैं। जिसके चलते सुरक्षा के लिहाज से दरगाह परिसर को पूरी तरह सीसीटीवी से लैस किया गया है।


हटनी पड़ी थी रेलवे लाइन

कहा जाता है कि अंग्रेज अफसर जब अलीगढ़ में रेलवे ट्रैक बिछा रहे थे तो बाबा बरछी बहादुर की दरगाह के पास की कुछ जमीन की जरूरत पड़ी। अनजाने में दरगाह को भी कुछ नुकसान पहुंचा दिया गया। लेकिन जब काम शुरू हुआ तो बड़ी-बड़ी मशीनें और इंजन दरगाह के पास पहुंच कर आगे ही नहीं बढ़ पाते। कई दिनों तक कवायद हुई, लेकिन काम नहीं बना। बात जब पूरे शहर में बात फैली तो बुजुर्गों ने बताया कि दरगाह को नुकसान पहुंचाए बिना काम हो तो यकीनन मंजिल मिलेगी, आखिरकार अंग्रेज अफसरों को दरगाह छोड़कर काम करना पड़ा। दरगाह को छोड़ने के बाद जब काम शुरू हुआ तो रेलवे लाइन धड़ाधड़ बिछती गई और रेल इंजन सरपट दौड़ने लगे। ये बात अलीगढ़ के एतिहासिक दस्तावेजों में दर्ज सत्य घटना है।


सीसीटीवी कैमरों से लैस है दरगाह

दरगाह के रेलवे ट्रैक की ओर के हिस्से में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं जिसमें ट्रेनों के साथ रेलवे ट्रैक की भी निगरानी होती है। इसका एक महीने का पूरा रिकॉर्ड भी मौजूद रहता है। दरगाह कमेटी ने सुरक्षा को देखते हुए सीसीटीवी कैमरे लगा कर एक रिकॉर्ड रूम भी बनाया है। कैमरों से वीडियो फुटेज और पूरा रिकॉर्ड देखने की सुविधा भी मौजूद है।


इतिहास में दर्ज है दरगाह

बाबा बरछी बहादुर दरगाह के इमाम हाफिज नसीम खान बताते हैं कि अजमेर के ख्वाजा गरीब नवाज ने ख्वाजा कुतुबद्दीन बख्तियार काकवी को अपना शागिर्द बनाया था और बाबा बरछी बहादुर काकवी के साथी थे। बाबा बरछी बहादुर का नाम सैयद तहबुर अली था, उनके अनुयायी हजरत जोरार हसन ने सबसे पहले बरछी बहादुर पर उर्स की शुरुआत की थी। बाबा बरछी बहादुर के अलावा हजरत शमशुल आफरीन शाहजमाल की दरगाह भी अलीगढ़ के इतिहास में दर्ज बहुत पुरानी दरगाह है।’


दरगाह के पास नहीं हुआ है कोई भी रेल हादसा

बाबा बरछी बहादुर दरगाह के सेक्रेटरी नूर मोहम्मद ने बताया कि दरगाह की सुरक्षा को देखते हुए जब सीसीटीवी कैमरे लगाए गए तो एक कैमरा रेलवे ट्रैक की ओर लगाए ताकि ट्रैक और ट्रेनों की निगरानी में रेलवे की मदद की जा सके। ये बाबा की दुआ है कि आज तक अलीगढ़ रेलवे स्टेशन से कठपुला की ओर कोई भी रेल हादसा नहीं हुआ है। सवा सौ साल से बाबा यहां के मालिक और पहरेदार हैं।


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