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एमएचआरडी का मंत्रालय संभालते ही रमेश पोखरियाल का बड़ा निर्णय,केन्द्रीय विवि में हडकंप

पहले भी हुई शिकायते पर नतीजे रहे शून्य

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प्रयागराज | इलाहाबाद विश्वविद्यालय में लंबे समय से विवादों में घिरी शिक्षक भर्ती पर मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने पुनः संज्ञान लिया है । इसके पहले मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में स्मृति इरानी और प्रकाश जावेडकर के कार्यकाल में शिक्षक भर्ती को लेकर शिकायतें होती रही है । लेकिन सरकार बनने के तत्काल बाद मंत्रलाय ने इविवि की शिक्षक भर्ती पर रोक लगा दी है ।जानकारी के अनुसार मंत्रालय कीओर से विवि को पत्र भेजा गया है जिसमें में कहा गया है कि विश्वविद्यालय और कॉलेजों की शिक्षक भर्ती को लेकर कई शिकायतें आई है और जब तक इन सभी विवादों का स्तारण नहीं हो जाती है तब तक नई भर्ती प्रक्रिया नहीं शुरू हो सकेगी ।

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मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा भेजे गए निर्देश में कहा गया है कि जब तक विवादित मामले निस्तारित नहीं हो जाते हैं तब तक भर्ती प्रक्रिया नहीं शुरू की जाएगी बता दें कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय में बीते वर्ष संगठक महाविद्यालयों और मुख्य कैंपस में शिक्षकों की भर्ती हुई जिनमें कई चयनित शिक्षकों को लेकर विवाद रहा लेकिन इन सब को दरकिनार कर विश्वविद्यालय प्रशासन ने होना भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी। और कुलपति ने सभी विरोधो को दरकिनार कर प्रक्रिया की शुरुवात कर दी ।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय में शिक्षकों के 558 पदों के लिए 23 अप्रैल को विज्ञापन जारी किया गया था । 22 मई तक ऑनलाइन आवेदन करके किए गए इस समय आवेदन पत्रों की स्क्रीनिंग की प्रक्रिया विश्वविद्यालय में चल रही है । स्क्रीनिंग प्रक्रिया के बाद जून के अंतिम सप्ताह या जुलाई के पहले सप्ताह तक चयन के लिए साक्षात्कार की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना थी। विश्वविद्यालय में कुलपति रतनलाल हंगलू के खिलाफ कई मामलों को लेकर अनियमितता की शिकायतें एमएचआरडी तक पहुंचती रही है लेकिन दोबारा मोदी सरकार आने के बाद मंत्रालय द्वारा लिए गए निर्णय से हंगलू को बड़ा झटका माना जा रहा है । विवि के एक छात्र नेता की माने तो प्रशासन द्वारा की गई भर्तियों और परीक्षाओं की सही जांच हुई तो कई बड़े नामदार शिक्षकों काला चिठ्ठा खुल जायेगा । वही विवि प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई भी बोलने को तैयार नही है।