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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एलएलएम की तीन छात्रों के परिणाम घोषित करने का दिया आदेश, जानिए वजह

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस पंकज भाटिया की खंडपीठ रवि सारथी और 2 अन्य छात्रों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी और बीबीडी यूनिवर्सिटी के आपराधिक और सुरक्षा कानून में विशेषज्ञता के साथ मास्टर ऑफ लॉ डिग्री कर रहे हैं। इसके साथ ही याचिका में उन्होंने दावा किया कि उक्त पाठ्यक्रम के लिए फीस 86,500 रुपये थी, जिसमें से याचिकाकर्ता पहले ही 46,500 रुपये का भुगतान कर चुके हैं, हालांकि, लगभग 40,000 का भुगतान किया जाना बाकी था, इसलिए उनके परीक्षा परिणाम यूनिवर्सिटी प्रशासन ने रोक दिया है।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एलएलएम की तीन छात्रों के परिणाम घोषित करने का दिया आदेश, जानिए वजह

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एलएलएम की तीन छात्रों के परिणाम घोषित करने का दिया आदेश, जानिए वजह

प्रयागराज: लखनऊ में स्थित बाबू बनारसी दास यूनिवर्सिटी में तीन एलएलएम छात्रों की परिणाम रोके जाने को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रिजल्ट घोषित करने का निर्देश दिया है। इन छात्रों का यूनिवर्सिटी प्रशासन ने परीक्षा परिणाम फीस का भुगतान न करने पर रोक दिया था। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस पंकज भाटिया की खंडपीठ रवि सारथी और 2 अन्य छात्रों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी और बीबीडी यूनिवर्सिटी के आपराधिक और सुरक्षा कानून में विशेषज्ञता के साथ मास्टर ऑफ लॉ डिग्री कर रहे हैं।

इसके साथ ही याचिका में उन्होंने दावा किया कि उक्त पाठ्यक्रम के लिए फीस 86,500 रुपये थी, जिसमें से याचिकाकर्ता पहले ही 46,500 रुपये का भुगतान कर चुके हैं, हालांकि, लगभग 40,000 का भुगतान किया जाना बाकी था, इसलिए उनके परीक्षा परिणाम यूनिवर्सिटी प्रशासन ने रोक दिया है।

मामले की जानकारी देते हुए याची ने कोरोना महामारी के कारण पूरी फीस जमा नहीं कर सके। अदालत के समक्ष याचिकाकर्ताओं के वकील पन्ना लाल गुप्ता ने तर्क दिया कि यूजीसी के साथ ही बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने यूनिवर्सिटी को दिशानिर्देश जारी कर कहा है कि वे उन छात्रों के संबंध में फीस के भुगतान से संबंधित मुद्दे पर पुनर्विचार करें, जो कोरोना के दौरान प्रभावित रहे।

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बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने महामारी के मद्देनज़र में छात्रों की कठिनाइयों के प्रति दयालु और विचारशील होने के लिए कानूनी शिक्षा केंद्रों को एक एडवाइज़री जारी की थी। बार काउंसिल ने कानूनी शिक्षा के सभी केंद्रों को निम्नलिखित विशिष्ट निर्देश जारी किए थे, जबकि आम तौर पर कानूनी शिक्षण संस्थानों को छात्रों के प्रति विचारशील होने और इन असाधारण परिस्थितियों के दौरान उन्हें मदद करने के लिए सलाह दी थी।