1 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मां और नाबालिग बेटी से दुष्कर्म व ब्लैकमेल करने के आरोपी की अग्रिम जमानत नामंजूर

सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि इस तरह के अपराध करने वाले आरोपी अग्रिम जमानत पाने का हकदार नहीं है। कोर्ट ने याची को दो हफ्ते में अदालत में समर्पण कर जमानत अर्जी दाखिल करने पर कोर्ट को यथाशीघ्र अर्जी तय करने का निर्देश दिया है। मामले में यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने योगेन्द्र कुमार मिश्र की अग्रिम जमानत अर्जी को खारिज करते हुए दिया है।

2 min read
Google source verification
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मां और नाबालिग बेटी से दुष्कर्म व ब्लैकमेल करने के आरोपी की अग्रिम जमानत नामंजूर

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मां और नाबालिग बेटी से दुष्कर्म व ब्लैकमेल करने के आरोपी की अग्रिम जमानत नामंजूर

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ब्लैकमेल करने वाले आरोपी की अग्रिम जमानत नामंजूर करते हुए इनकार कर दिया है। मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने फैसला लिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वीडियो फुटेज तैयार कर ब्लैकमेल करने की धमकी देकर नाबालिग बेटी और मां से दुष्कर्म और अवैध संबंध बनाने के आरोपी अग्रिम जमानत खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा है कि आरोप गंभीर है। इस तरह के आरोपी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी है और कुर्की की कार्रवाई की जा रही है। इसके साथ ही फरार आरोपी की गिरफ्तारी जल्द से जल्द हो।

मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि इस तरह के अपराध करने वाले आरोपी अग्रिम जमानत पाने का हकदार नहीं है। कोर्ट ने याची को दो हफ्ते में अदालत में समर्पण कर जमानत अर्जी दाखिल करने पर कोर्ट को यथाशीघ्र अर्जी तय करने का निर्देश दिया है। मामले में यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने योगेन्द्र कुमार मिश्र की अग्रिम जमानत अर्जी को खारिज करते हुए दिया है।

यह भी पढ़ें: इलाहाबाद हाईकोर्ट: बस्ती विधायक की मुश्किलें बढ़ीं, जाने क्यों बढ़ाई पुलिस ने धाराएं

अपर सत्र न्यायाधीश पॉक्सो वाराणसी ने 30 नवंबर 2021 को याची को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया था। जिस पर यह अर्जी दाखिल की गई थी। याची के वरिष्ठ अधिवक्ता का कहना था कि उसका परिवार है। वह शादीशुदा है। कोर्ट ने कहा- याची ने भरोसा तोड़ा है, राहत पाने का हकदार नहीं उसके बच्चे हैं। शिकायतकर्ता स्कूल में अध्यापिका है। नाबालिग बेटी के साथ अपने पति से अलग रहती है। याची भी उसी स्कूल में चपरासी है। सहमति से संबंध बनाए गए हैं। दोनों साथ रहते हैं। याची का बेटा शिकायतकर्ता की बेटी भाई-बहन जैसे रहते हैं। सबूत के तौर पर फोटोग्राफ और चैट दिखाए।

यह भी पढ़ें: इलाहाबाद हाईकोर्ट: मृतक आश्रित कोटे में योग्यता के आधार पर पद की मांग करना है गलत

मामले में याची का कहना था कि उसने शिकायतकर्ता के नाम से जमीन खरीदने का करार भी किया है। वह शादीशुदा है। इसलिए उससे शादी नहीं कर सकता। अभी उसका तलाक भी नहीं हुआ है। याची ने विक्रय करार के पैसे वापस ले लिए तो उसे दुष्कर्म के आरोप में फंसाया गया है। कोर्ट से गैर जमानती वारंट जारी है। साथ ही कुर्की की कार्रवाई शुरू की गई है। इसलिए अग्रिम जमानत दी जाए। कोर्ट ने कहा कि याची ने पहले भरोसा जीता फिर तोड़ दिया। मां के साथ नाबालिग बेटी से दुष्कर्म किया। वीडियो फुटेज से ब्लैकमेल करने लगा। विवेचना में सहयोग नहीं कर रहा। वारंट और कुर्की आदेश जारी है। ऐसे में वह अग्रिम जमानत पाने का हकदार नहीं है। कोर्ट ने अर्जी खारिज कर दी है।