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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अध्यापक के सेवानिवृत्त होने के बाद बर्खास्तगी आदेश पर लगाई रोक, जानिए वजह

यह मामला राज्य सरकार के माध्यमिक शिक्षा विभाग ने एकल जज के आदेश के खिलाफ विशेष अपील दाखिल की थी। खंडपीठ ने एकल जज को गुण दोष पर विचार कर निर्णय के लिए याचिका वापस भेज दिया है। मामले में सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा व न्यायमूर्ति विकास बुधवार की खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दाखिल विशेष अपील पर पारित किया है।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अध्यापक के सेवानिवृत्त होने के बाद बर्खास्तगी आदेश पर लगाई रोक, जानिए वजह

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अध्यापक के सेवानिवृत्त होने के बाद बर्खास्तगी आदेश पर लगाई रोक, जानिए वजह

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अध्यापक से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण फैसला लिया है। सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की खंडपीठ ने राज्य सरकार की अपील को स्वीकार करते हुए एकल जज द्वारा पारित उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसके द्वारा अध्यापक की सेवा समाप्ति आदेश को उसके सेवानिवृत्त होने के बाद के बाद रोक लगा दी गई थी।

यह मामला राज्य सरकार के माध्यमिक शिक्षा विभाग ने एकल जज के आदेश के खिलाफ विशेष अपील दाखिल की थी। खंडपीठ ने एकल जज को गुण दोष पर विचार कर निर्णय के लिए याचिका वापस भेज दिया है। मामले में सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा व न्यायमूर्ति विकास बुधवार की खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दाखिल विशेष अपील पर पारित किया है।

इस अपील पर अधिवक्ता रामानंद पांडेय ने बहस करते हुए तर्क दिया कि बर्खास्तगी आदेश पर रोक लगाने का मतलब याचिका को अंतिम रूप से मंजूर कर लेना होगा, जो नहीं किया जा सकता। एकल जज ने सेवा समाप्ति आदेश पर रोक लगाने का कोई उचित कारण नहीं बताया है।

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मामले में अध्यापक 31 मार्च 2022 को सेवानिवृत्त हो चुका था तो ऐसी स्थिति में उसकी बर्खास्तगी को लेकर 9 मार्च 2022 तथा 15 मार्च 2022 को पारित आदेश पर रोक लगाने का कोई औचित्य नहीं था। झांसी निवासी सहायक अध्यापक प्रमोद कुमार सिंह के अधिवक्ता जीके सिंह का कहना था कि बर्खास्तगी आदेश सक्षम अधिकारी द्वारा पारित नहीं किया गया है। यह भी कहा गया कि याची की नियुक्ति बतौर सहायक अध्यापक जन सहयोगी इंटर कॉलेज बुढ़ाना औरैया में एक जनवरी 1994 को हुई थी। ऐसे में उसे बिना विधिक प्रक्रिया अपनाये बर्खास्त करना गलत था।