
संगमनगरी में माघ मेले की शुरुआत हो गई है। मंगलवार को मेले के पहले दिन लाखों लोगों ने आस्था की डूबकी लगाई। गंगा- यमुना और अदृश्य सरस्वती की त्रिवेणी में साधु- संतों ने पौष पूर्णिमा पर दिन भर स्नान के लिये श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा ।

पौष पूर्णिमा के स्नान पर्व के साथ ही संगम की रेती पर होने वाले एक महीने के कल्पवास की भी शुरुआत हो गई है। प्रशासन के मुताबिक लाखों की तादाद में श्रद्धालु एक महीने तक संगम की रेती पर कल्पवास करेंगे।

देश विदेश से कल्पवासी पौष पूर्णिमा स्नान में आते हैं और माघी पूर्णिमा स्नान तक संगम की रेती पर रहते हैं ।

भारतीय आश्रम परम्परा में गृहस्थ आश्रम को सबसे श्रेष्ठ माना गया है जिसमे साल में ग्यारह महीने घर में रहकर भी बस एक महीने मोह-माया से दूर रहकर पवित्र नदियों के संगम के किनारे वास करके जप तप और साधना से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

मान्यता है कि 33 करोड़ देवी देवता एक महीने तक संगम की रेती में विराजमान रहते है। कल्पवास करने आये श्रद्धालु दिन में तीन बार स्नान करते है एक बार खाना खाते है और भजन कीर्तन करते हैं।