16 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

अतीक को यूपी की जेल से था खतरा, जान बचाने के लिए गिड़िगिड़ाने लगा था, तब कोर्ट ने शिफ्ट किया था साबरमती

Atiq Ahmed: मंगलवार को माफिया अतीक अहमद को सजा सुनाई गई है। इससे पहले अतीक को कभी कोई सजा नहीं हुई थी। वह गुंडागर्दी करता और खुला घूमता था।

4 min read
Google source verification
photo_2023-03-29_09-21-52.jpg

साल 2006 में हुए उमेश पाल के अपहरण के मामले में दोषी साबित अतीक अहमद को मंगलवार MP-MLA कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह माफिया की पहली सजा है। इसके पहले किसी भी मुकदमे में अतीक को सजा नहीं हो सकी थी। अधिकतर मुकदमों में गवाह बनाए गए लोग अपने बयानों से मुकर गए या मार दिए गए या फिर गवाही देने कोर्ट ही नहीं पहुंच पाते थे।

अतीक को 101 मुकदमे होने के बाद पहली बार मिली सजा
पहले माफिया फिर विधायक और सांसद से अब कैदी बन चुके अतीक अहमद को 44 सालों में पहली बार सजा सुनाई गई है। साल 1979 से अतीक ने अपराध की दुनिया में कदम रखा, तब से लेकर आज तक अतीक अहमद के खिलाफ 101 मुकदमे दर्ज हुए हैं, जिनमें 57 मुकदमों की सुनवाई चल रही है।

साल 2016 और महीना जून का था। उस समय SHUATS यानी सैम हिगिन बाटम इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी एंड साइंसेज कॉलेज में सेमेस्टर एगजाम चल रहे थे। एग्जाम के समय B.Tech के दो छात्र मोहम्मद सैफ सिद्दिकी और शाबिक अहमद नकल करते पकड़े गए, इसके बाद दोनों पर कार्रवाई की गई।

अतीक के करीबी कार्रवाई से थे नाराज कॉलेज में की थी फायरिंग
कार्रवाई से नाराज दोनों छात्रों ने साथियों के साथ 22 नवंबर 2016 को SHUATS परिसर में ही कॉलेज के प्रोफेसर तेजस जैकब की पिटाई की और फायरिंग की। इस मामले में नैनी कोतवाली में सैफ और शाकिब के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई और SHUATS प्रशासन ने छात्रों को कॉलेज से निकाल दिया।

CCTV फुटेज से सामने आया असली चेहरा
गुंडागर्दी और राजनीति से रसूख बना चुके अतीक अहमद का प्रयागराज में सिर्फ नाम ही काफी था। हालात यह थे कि अतीक के नाम पर रंगदारी के साथ वसूली का खेल भी चलने लगा था। अतीक के नजदीकी लोग अपनी पहुंच का फायदा उठाकर वे काम भी किया करते थे। जो सरकार और नियमों को तोड़ने वाले थे। ये दोनों छात्रों ने एग्जाम में नकल की थी और उनपर कार्रवाई हुई थी, वह दोनों ही छात्र अतीक के जानने वाले थे।

काॅलेज की कार्रवाई की बात जब अतीक तक पहुंची, वह भड़क उठा और 14 दिसंबर को अपने लाव-लश्कर के साथ कॉलेज परिसर में पहुंचकर हंगामा कर दिया। इससे पूरे कॉलेज का माहौल खराब हो गया। पूरे मामले को संज्ञान में लेते हुए कॉलेज प्रशासन ने CCTV फुटेज जारी कर दी, जिससे अतीक का असली चेहरा सबके सामने आ गया।

सपा का टिकट मिला, लेकिन कट गया
इस समय तक अतीक को सपा का टिकट मिल चुका था। माफिया अतीक अहमद 1989 से 2004 तक इलाहाबाद वेस्ट सीट से पांच बार विधायक और 2004 से 2009 तक फूलपुर सीट से एक बार सांसद रह चुका है। लेकिन समय बीतने के साथ जब अतीक का नाम गुंडों की लिस्ट में ऊपर आने लगा तो अखिलेश यादव ने अतीक का टिकट काट दिया, जिसके बाद यह मान लिया गया कि अतीक अब नहीं बचेगा, लेकिन गिरफ्तारी तब भी नहीं हुई।

सपा का टिकट कटने से अतीक को काफी नुकसान हो गया था, इससे SHUATS के प्रॉक्टर राम किशन सिंह भी डर गए थे। जिस वजह से उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुरक्षा के लिए याचिका दायर की। केस की सुनवाई मुख्य जज डीवी भोसले और जज यशवंत वर्मा की बैंच ने की। इसी बीच अतीक ने स्पेशल CJM कोर्ट में समर्पण की अर्जी दे दी।

राजू पाल हत्याकाेड में भी जेल गया था अतीक
हाईकोर्ट ने अतीक अहमद की क्रिमिनल हिस्ट्री मांगी और कहा कि अतीक को सरेंडर करने या इससे संबंधित मामला सीधे हाईकोर्ट की देखरेख में हो। डरे हुए प्रॉक्टर ने अपनी याचिका वापस लेनी चाही मगर तब तक देर हो चुकी थी। हाईकोर्ट ने याचिका को वापस करने से अस्वीकार कर इसे जनहित याचिका में बदल दिया।

हाईकोर्ट की सख्ती के बाद बाहुबली अतीक अहमद को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया, लेकिन इसे नाटकीय ढंग से सरेंडर का नाम दिया गया। इसके बाद अतीक अहमद फिर से जेल की सलाखों के पीछे धकेल दिया गया। इससे पहले वह राजू पाल हत्याकांड मामले में आरोपी बनाया गया था, लेकिन वह जमानत पर बाहर घूम रहा था।

देवरिया से बरेली फिर नैनी के बाद साबरमती
साल 2018 के दिसंबर महीने में उत्तर प्रदेश के एक व्यावसायी मोहित जायसवाल ने अतीक अहमद पर आरोप लगाया था कि उसे अतीक की गैंग ने लखनऊ के गोमती नगर से उठाया और देवरिया जेल में ले जाकर पीटा और रंगदारी मांगी गई। मोहित के आरोपों के मुताबिक, घटना के दौरान अतीक अहमद और उसके बेटे भी मौजूद थे।

माफिया अतीक अहमद को साल 2019 में प्रयागराज की नैनी जेल से गुजरात की साबरमती हाई सिक्योरिटी सेंट्रल जेल शिफ्ट किया गया। उस समय अतीक अहमद ने सुप्रीम कोर्ट से सुरक्षा की गुहार लगाते हुए कहा था कि यूपी के जेलों में उसकी जान को खतरा है। इसके बाद शीर्ष कोर्ट के आदेश पर उसे साबरमती जेल भेज दिया गया।

व्यावसायी मोहित जायसवाल का मामला जब मीडिया में उछला तो अतीक अहमद को देवरिया जेल से बरेली शिफ्ट किया गया। इसके बाद वह प्रयागराज की नैनी जेल में लाया गया। तब अतीक अहमद अपनी जान बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट से गिड़िगिड़ाने लगा और उसे साबरमती जेल भेज दिया गया।