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विकास पर भारी पड़ा था जातीय समीकरण, संसदीय क्षेत्र को राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाले को भी मिली थी हार

एक हार के बाद छोड़ दिया शहर ,नहीं आये सियासी मंच पर

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murli manohar joshi

lok sbha chunav

प्रयागराज। देश की सियासत की बात हो और इलाहाबाद की चर्चा ना हो, ये ही नहीं सकता। शहर में राजनीतिक मुद्दे उठे उसमें डॉ मुरली मनोहर जोशी का नाम न आये सम्भव नही। डॉ रीता बहुगुणा जोशी इलाहाबाद लोकसभा सीट पर उम्मीदवार है इस सीट पर अब तक लगातार तीन बार जीतने का रिकॉर्ड डॉ मुरली मनोहर जोशी के नाम दर्ज है।शनिवार को डॉ जोशी के समर्थन में फिल्म स्टार सनी देओल अपना रोड शो करने आ रहे हैं रोड शो में भाजपा के तमाम दिग्गज नेता शामिल होगें लेकिन डॉ मुरली मनोहर जोशी नहो होंगें। हालाकि इस चुनाव में पार्टी ने उनका टिकट काट दिया है वह देश भर में कही प्रचार करते नही दिखें । लेकिन इलाहाबाद संसदीय क्षेत्र में डॉ जोशी को चाहने वालों की कमी नही है। डॉ मुरली मनोहर जोशी के बेहद करीबी रहे चार दशक तक उनके साथ मंच साझा करने वाले भाजपा के वरिष्ठ नेता नरेंद्र देव पांडेय ने पत्रिका से विशेष बातचीत में डॉ जोशी को याद किया।

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कर्मभूमि पर रहा विश्वास
भारतीय जनता पार्टी के पूर्व अध्यक्ष पूर्व केंद्रीय मंत्री इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व शिक्षक देश की सियासत में अहम् स्थान रखने वाले डॉ मुरली मनोहर जोशी की कर्मस्थली इलाहाबाद उन्हें बरबस याद कर रहा है ,अब शहर के कार्यकर्ताओं को उनकी कमी खल रही है। पार्टी के कोर कैडर से जुड़े लोगों के मन में तकलीफ है की सबने डॉ मुरली मनोहर जोशी का प्यार दुलार खो दिया। डाक्टर जोशी कार्यकर्ताओं को भरे मंच पर डाटा करते थे,लेकिन उतना ही स्नेह भी किया करते थे। 1996 1998 और 1999 के आम चुनाव में अपनी कर्मस्थली इलाहाबाद संसदीय सीट से जीतकर हैट्रिक बनाने वाले डॉक्टर जोशी 2004 में मिली हार के बाद उन्हें इस शहर से दूर चले गये। फिर सियासी तौर पर डॉ जोशी लौट कर अपने शहर की तरफ नहीं आए।

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शहर को दी सौगात
शहर को शैक्षिक हब बनाने का सपना लिए डॉ मुरली मनोहर जोशी ने कई लकीरे खींची। जिसमें भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपलआईटी) की स्थापना करवाई। जिले में यमुना पर विशाल पुल बनवाया इलाहाबाद विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाना, मोतीलाल नेहरू इंजीनियरिंग कॉलेज को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान का दर्जा दिलवाने में डॉ जोशी की हम भूमिका रही । वहीं झूसी में भू चुंबकत्व केंद्र की स्थापना शहर में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) का क्षेत्रीय कार्यालय बनवाने के अलावा उन्होंने जिले के यमुनापार में किसानों के लिए सिंचाई की समस्या को देखते हुए कई सौ ट्यूबवेल दिलवाए। इसके अलावा उन्होंने तमाम काम किए।उन्हें यकीन था कि विकास के मुद्दे पर उनके शहर की जनता उन्हें एक बार फिर संसद पहुंचाएगी। लेकिन 2004 के आम चुनाव में उन्हें हार मिली जिससे डॉ जोशी बेहद दुखी हुए। और जातीय गणित के आगे विकास बौना साबित हुआ।

हार के बाद नही लौटे
नरेंद्र देव पांडे बताते हैं कि डॉ जोशी के कार्यकाल में शंकरगढ़ के लिए स्वीकृत की गई आयल रिफाइनरी उस समय स्थापित नही हो पाई थी । 2000, 2001 में जिला प्रशासन ने अधिग्रहण के लिए जमीन चिन्हित कर ली लेकिन प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो सका। जनवरी.फरवरी 2004 में मत्स्य विभाग के फॉर्म हाउस में साइंस सिटी के लिए भूमि पूजन हो गया था। लेकिन शीर्ष भाजपा नेता के जाने के बाद अब तक पूरा नहीं हुआ। 2009 के लोकसभा चुनाव शहर के तमाम लोगों ने उन्हें वापस लाने की कोशिश की लेकिन उन्होंने साफ़ मना कर दिया। कहा अब मैं नहीं आऊंगा यही कारण रहा कि डॉक्टर जोशी बनारस चले गए। 2004 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के टिकट पर कुंवर रेवती रमण सिंह ने डॉ मुरली मनोहर जोशी को 28,409 वोटों से पराजित किया। चुनाव हार के कुछ ही दिनों बाद राज्यसभा सांसद चुने गए। उसके बाद में में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं सहित स्थानीय लोगों और विश्वविद्यालय के तमाम शिक्षकों के अनुरोध के बावजूद इलाहाबाद लोकसभा से चुनाव लडने नहीं आए।