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कंगना रनौत के बयान पर किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर हुई नाराज कहा, माफी मांगें

- किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी है। अभिनेत्री कंगना रनौत के बयान पर अपनी नाराजगी जताई। और कहाकि, आजादी की लड़ाई में सभी ने हिस्सा लिया था। ऐसा बयान सभी स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान है।

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Laxmi Narayan Tripathi

Laxmi Narayan Tripathi

प्रयागराज. अभिनेत्री कंगना रनौत के बयान पर किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर (Kinnar Akhara Mahamandaleshwar) लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने नाराजगी जताते हुए कहाकि, कंगना रनौत को देश से माफी मांगनी चाहिए और अपना बयान वापस लेना चाहिए। कंगना का बयान देशद्रोह है।

एक चैनल के कार्यक्रम में कंगना रनौत ने कहा था कि, वर्ष 1947 में आजादी की भीख मिली थी। भारत को असली आजादी 2014 में मिली। सबसे पहले भाजपा सांसद वरुण गांधी की प्रतिक्रिया आई। जिस पर कंगना ने भी जवाब दिया।

बयान लोकतंत्र और संविधान का अपमान :- लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने कहा कि, देश की आजादी के बारे में इस तरह का बयान लोकतंत्र और संविधान का अपमान है। देश के कई महान स्वतंत्रता सेनानियों ने अपना खून बहाया, सत्याग्रह में भाग लिया और अपना सब कुछ बलिदान कर दिया ताकि देश को अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त किया जा सके। कंगना का बयान स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान है।

लोकतंत्र में सभी को बोलने की आजादी :- लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने आगे कहा कि, लोकतंत्र में सभी को बोलने की आजादी है और राजनीतिक बयानबाजी भी की जा सकती है लेकिन देश की आजादी की तुलना 2014 में बनी किसी भी राजनीतिक दल की सरकार से नहीं की जा सकती। 2014 से अब तक देश में बीजेपी की सरकार है, यह स्वागत योग्य है और देश की आजादी के बाद बनी सरकारों के लिए भी यही है।

सभी ने मिलकर लड़ी थी आजादी की लड़ाई - महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने कहा कि, देश की आजादी के बारे में खराब बोलना ठीक नहीं है। कंगना रनौत का यह बयान 'देशद्रोह' की श्रेणी में आता है। प्रचार के लिए इस तरह के बयान देने का अधिकार किसी को नहीं है। सभी ने स्वतंत्रता संग्राम के लिए एक साथ लड़ाई लड़ी थी, चाहे वे कांग्रेस से हों या संघ के लोग। वामपंथी विचारधारा और दक्षिणपंथी सभी ने मिलकर लड़ाई लड़ी थी।

अन्य मूर्तियां भी वापस लाना चाहिए :- महामंडलेश्वर ने कहा कि किन्नर अखाड़ा 108 साल बाद कनाडा से 'माँ अन्नपूर्णा' की मूर्ति वापस लाने का स्वागत करता है। प्रतिमा आज वाराणसी में बाबा काशी विश्वनाथ के पास स्थापित की गई। त्रिपाठी ने कहा कि किन्नर अखाड़ा ऐसे प्रयासों का स्वागत करता है और ब्रिटिश संग्रहालय हमारे धर्म और विरासत से जुड़ी कलाकृतियों से भरा पड़ा है। इसी तरह कई मूर्तियां हैं जो अभी भी विदेशी संग्रहालयों में हैं और उन्हें भी वापस लाया जाना चाहिए।

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