
राज्य और केंद्र सरकार की अच्छी मंशा पर गंगा नदी अभी भी प्रदूषित : इलाहाबाद हाईकोर्ट
प्रयागराज. गंगा सफाई अभियान लगातार चल रहा है। पर अभी सफाई पर कुछ भी कहना बेमानी है। गंगा नदी में बहने वाले सीवरेज और व्यापार अपशिष्ट की समस्या उजागर करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहाकि, गंगा साफ रखने के लिए राज्य सरकार के साथ-साथ केंद्र सरकार की अच्छी मंशा के बावजूद डायवर्जन की वजह से गंगा नदी अभी भी प्रदूषित है। उत्तर प्रदेश में गंगा की कुल लम्बाई 1450 किमी है।
महंत मधु मंगल शरण दास शुक्ला ने हाईकोर्ट में एक याचिका में कहाकि, चूंकि राज्य सरकार ने एक पाइप लाइन बिछाने की अनुमति दी है, जिस वजह से सीवरेज या व्यापार अपशिष्ट नदी में जा रहा है। हाईकोर्ट ने याचिका को स्थगित करते हुए यह निर्देश दिया कि, एसटीपी या ईटीपी माध्यम से सीवरेज और व्यापार अपशिष्ट के उपचार मामलों का प्रबंधन करने वाले संबंधित विभाग/निकाय के सर्वोच्च अधिकारी इस मामले में हलफनामा दाखिल करें।
बिना उपचार नहीं :- हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि, सीवरेज और व्यापार अपशिष्ट को बिना उपचार नहीं निकाला जाएगा। यदि हलफनामा दाखिल करने और सीवरेज या व्यापार अपशिष्ट को निकालने के लिए पाइपलाइन का काम करने के बाद भी नदी में अनुपचारित पानी पाया जाता है, तो अभिसाक्षी को जिम्मेदार बनाया जाएगा, जिसमें सीआरपीसी धारा 430 के तहत मुकदमा चलाया जाएगा।
प्रदूषित पानी के गंभीर परिणाम :- कोर्ट ने सम्बंधित अधिकारी को आगाह किया कि, जिम्मेदारी के साथ हलफनामा देना चाहिए। कोर्ट ने कहा, पाइप लाइन के काम की अनुमति देते समय अशोधित सीवरेज या व्यापारिक बहिःस्राव को नदी में नहीं बहाया जाए। यही कारण है कि एसटीपी और ईटीपी डालने के बाद भी अशोधित पानी निकल जाता है। इसका कारण यह है कि ईटीपी/एसटीपी की क्षमता बहे हुए पानी से कम रहती है या एसटीपी/ईटीपी का रखरखाव नहीं किया जाता है ताकि उसमें आने वाले पानी की पूरी मात्रा को ट्रीट किया जा सके। अधिकारी ने दूसरे की मिलीभगत के परिणामस्वरूप बिना उपचार के पानी की निकासी की। परिणामस्वरूप प्रदूषित पानी भी नदी में बह जाता है, जिसके गंभीर परिणाम होते हैं।"
अशोधित पानी क्यों बहाया जाता है? :- हाईकोर्ट ने अंत में महाधिवक्ता से साफ कहाकि, नदियों को सीवरेज और व्यापार अपशिष्ट की नाली के लिए आसान लक्ष्य के रूप में क्यों लिया जाता है। एसटीपी/ईटीपी स्थापित करने के बावजूद नदियों को प्रदूषित करने वाले अशोधित पानी को क्यों बहाया जाता है।
एक नजर :-
नमामि गंगे के लिए बीस हजार करोड़ :- गंगा को साफ करने के लिए जून, 2014 में ‘नमामि गंगे’ कार्ययोजना तैयार की गई। पांच साल में बीस हजार करोड़ रुपए खर्च कर गंगा को साफ करना था। यह रकम तीस साल में खर्च रकम का चार गुना है।
1986 में गंगा एक्शन प्लान :- इससे पूर्व वर्ष 1986 में भारत सरकार ने गंगा एक्शन प्लान शुरू किया था। फरवरी 2009 में गंगा को राष्ट्रीय नदी का दर्जा प्रदान किया गया। अगस्त 2009 में राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण का गठन कर अभियान के दूसरे चरण को शुरू किया गया था। इन अभियानों का मुख्य उद्देश्य गंगा में उपचारित जल डालना था।
चालीस फीसद आबादी गंगा पर निर्भर :- गंगा की कुल लंबाई 2525 किमी की है। इसमें 468.7 अरब मीट्रिक पानी साल भर में प्रवाहित होता है। यह देश के कुल जल स्रोत का 25.2 फीसद भाग है। देश की चालीस फीसद आबादी गंगा पर निर्भर है।
यूपी के 1450 किमी लम्बाई में बहती है गंगा :- उत्तर प्रदेश में गंगा की कुल लम्बाई 1450 किमी है। बिजनौर, गढ़मुक्तेश्वर, सोरों, फर्रुखाबाद, कन्नौज, बिठूर, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, मीरजापुर, गाज़ीपुर जिले को कवर करती है।
Published on:
11 Sept 2021 01:13 pm

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