
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
प्रयागराज. Ganges monitoring SDRF jawans गंगा नदी में अब भी शवों को प्रवाहित किया जाना जारी है। रायबरेली में बुधवार को एक साथ पांच शव उतराते मिले। इसके बाद से गंगा नदी में निगरानी और बढ़ा दी गयी है। नदी में कोई यूं ही शवों को प्रवाहित न कर दे या फिर तट के किनारे के बिना समुचित निस्तारण के शव को दफना दे इसके लिए अब जमीन के साथ ही नदी की धारा से निगरानी की जा रही है। इसके लिए गंगा के सभी प्रमुख घाटों पर एसडीआरएफ के बीस-बीस जवानों की टीम तैनात की किया गया है। एसडीआरएफ की टीम मोटरबोट के जरिए गंगा की धारा में भ्रमण करते हुए कब्रों की निगरानी कर रही है।
एसडीआरएफ के जवान गंगा में मोटरबोट पर सवार होकर दूरबीन के जरिये दूर-दूर तक निगहबानी करते हैं। गंगा किनारे दफनाए गए शवों की कब्रों को कोई नुकसान न पहुंचे इस पर निगरानी रखी जा रही है। श्मशान घाट पर लोग अब शवों को चोरी-छिपे दफना नहीं पा रहे हैं। घाटों पर पुलिस का पहरा बिठा दिया गया है। पुलिस की कोशिश है कि गंगा किनारे शव का अंतिम संस्कार लोग लकड़ी के जरिए करें।
परंपरागत शवों को दफनाने में दिक्कत :- गंगा की निगहबानी से अब आम लोगों को अपने प्रियजनों के शवों को दफनाने में दिक्कत आ रही है। स्वाभाविक रूप से मरने वाले लोगों को भी गंगा तट पर धार्मिक रूप से संस्कार करने में पुलिस परेशान करती है। जबकि, सरकार का मानना है कि गरीबी और आर्थिक तंगी की वजह से दाह संस्कार न कर सकने वाले लोग भविष्य में गंगा किनारे शवों को दफनाने के बजाय विद्युत शवदाह गृहों में अंतिम संस्कार करें। हालांकि, अभी कहीं भी विद्युत शवदाहगृह नहीं बने हैं।
रायबरेली में फिर उतराते दिखे पांच शव :- बुधवार को रालपुर, गेगासो, डलमऊ, गोकना घाटों पर गंगा में पांच शव देखे गए। पुलिस ने इनका चिता पर अंतिम संस्कार करवाया। गंगा विचार मंच के राष्ट्रीय संयोजक भरत पाठक का कहना है कि अब भी चोरी छिपे गंगा में शवों को प्रवाहित करना जारी है।
वाराणसी में गंगा में अस्सी से राजघाट तक हरे शैवाल Banaras green algae
इस बीच वाराणसी में गंगा में हरे शैवाल की मात्रा पिछले 24 घंटे में अचानक बढ़ गई है। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण विभाग और नमामि गंगे की ओर से घाट के किनारे रहने वाले मल्लाहों और स्थानीय लोगों को जागरूक किया जा रहा है। बीएचयू के वैज्ञानिकों ने पूर्व में आशंका जताई थी कि हरे शैवाल फिर से गंगा में आ सकते हैं। हरे शैवालों के कारण गंगा में ऑक्सीजन स्तर कम होता जा रहा है। बीते सप्ताह हरे शैवाल आने के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इसे अस्थायी समस्या बताकर जल्द ही स्थिति सामान्य होने की बात कही थी। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की प्राथमिक जांच में भी यह बात सामने आई थी कि गंगाजल में नाइट्रोजन और फास्फोरस की मात्रा निर्धारित मानकों से ज्यादा हो गई है। नदी विज्ञानी प्रो. बीडी त्रिपाठी के अनुसार जब जल के अंदर का तापमान 25 डिग्री सेल्सियस से अधिक होता है तब शैवाल के पनपने के अनुकूल वातावरण बन जाता है।
गैर जरूरी जीवों की संख्या में होती है अप्रत्याशित वृद्धि
बीएचयू में इंस्टीट्यूट आफ एनवायरमेंट एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट के वैज्ञानिक डॉ. कृपाराम ने बताया कि जल में युट्रोफिकेशन प्रक्रिया होने से एल्गी ब्लूम (हरे शैवाल) बनते हैं। ऐसा तब होता है जब जल में न्यूट्रिएंट काफी बढ़ जाते हैं। इस कारण गैर जरूरी स्वस्थ जीवों की संख्या में अप्रत्याशित रूप से वृद्धि होती है।
Published on:
03 Jun 2021 01:49 pm
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