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लौट आए हजारों श्रमिक, नीमराणा में वापस आए 15 हजार प्रवासी श्रमिक

लॉक डाउन के बाद मची अफरा-तफरी के बाद अलवर जिले में प्रवासी श्रमिकों का वापस आने का सिलसिला शुरू हो गया है। अलवर जिले के नीमराणा औद्योगिक क्षेत्र में कई उद्योगों की पहल के चलते यह संभव हो पाया है। इस क्षेत्र में 15 हजार कुशल श्रमिकों को उनके घर से वापस लाकर उनको काम सौंपा गया है। इनका वापसी का खर्चा भी यहां के उद्योगों ने उठाया है तथा इनकी सुविधाओं में विस्तार किया है।

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लौट आए हजारों श्रमिक, नीमराणा में वापस आए 15 हजार प्रवासी श्रमिक

लौट आए हजारों श्रमिक, नीमराणा में वापस आए 15 हजार प्रवासी श्रमिक

लॉक डाउन के बाद मची अफरा-तफरी के बाद अलवर जिले में प्रवासी श्रमिकों का वापस आने का सिलसिला शुरू हो गया है। अलवर जिले के नीमराणा औद्योगिक क्षेत्र में कई उद्योगों की पहल के चलते यह संभव हो पाया है। इस क्षेत्र में 15 हजार कुशल श्रमिकों को उनके घर से वापस लाकर उनको काम सौंपा गया है। इनका वापसी का खर्चा भी यहां के उद्योगों ने उठाया है तथा इनकी सुविधाओं में विस्तार किया है।

लॉक डाउन के बाद से प्रवासी श्रमिकों के घर जाने का सिलसिला अलवर जिले के औद्योगिक क्षेत्रों में भी चला। यहां के नीमराणा औद्योगिक क्षेत्र से 45 हजार श्रमिक अपने गांव को चले गए। इन श्रमिकों के वापस जाने के लिए यहां के उद्योगों ने आपसी सहमति से किया जिससे श्रमिक व उद्योगों में समन्वय बना रह सका। नीमराणा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ने भी इस मामले में श्रमिकों के साथ उन्हें घर तक भेजने के लिए भोजन व वाहनों का इंतजाम करवाया जिससे उद्योगों व श्रमिकों में सौहाद्र्र पूर्ण सम्बन्ध रहे।

नीमराणा औद्योगिक क्षेत्र के कई उद्योगों ने इसमें पहल की और श्रमिकों को फोन करके उनकी जानकारी ली। यही नहीं उन्हें वापस लाने के लिए राजी कर लिया। यही नहीं उनको लाने के लिए उत्तर प्रदेश, बिहार व झारखंड तक बसें भेजी व उनके लिए भोजन का इंतजाम करवाया। यहां आने पर उनको कई दिनों तक का राशन दिया गया।

नीमराणा औद्योगिक क्षेत्र के कई उद्योगों में करीब 15 हजार श्रमिक वापस लौट आए हैं जिनमें गिन्नी इंटरनेशनल, हैवल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, पारले बिस्कुट , रिच फिल्ड इंडिया, डक्कीन एयर कंडीशनिंग, जेडी फूडस, सनडेन विकास, ओजी पैकेजिंग, निहोन व रोचेज ब्रेवरीज मुख्य हैं।

कुशल श्रमिकों के वापस लौटने की आस-

यह वो श्रमिक हैं जो पूरी तरह कुशल हैं। इनके वापस लौटने के पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि इन्हें यहां वेतन 15 हजार प्रतिमाह से अधिक और मकान सहित कई सुविधाएं मिलती थी। ये अपने गांव में नरेगा में रोज काम भी करें तो इतनी राशि नहीं कमा पाएंगे। इनके बच्चे भी यहां स्कूलों में पढ़ रहे हैं जो अपने गृह प्रदेश में नए सिरे से पढ़ेंगे। ऐसे में श्रमिक वापस लौटने लगे हैं। यहां के उद्योगों ने श्रमिकों से निरन्तर सम्पर्क किया जिसके कारण यह संभव हो पाया है।

यह कहते हैं उद्योगपति व श्रम मंत्री-

नीमराणा क्षेत्र से गए श्रमिकों को हमने नाराज करके नहीं भेजा, हम सब उनसे निरन्तर सम्बन्ध स्थापित करते रहे। इसका परिणाम यह रहा कि श्रमिक यहां वापस आने लगे हैं। अब तक करीब 15 हजार श्रमिक अपने काम पर आ गए हैं। हमारे उनसे पहले ही सम्बन्ध अच्छे थे जिसका यह परिणाम सामने आ रहा है।

- के. जी. कौशिक, महासचिव, नीमराणा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन।

हमने अपने घर लौट गए श्रमिकों से सम्पर्क किया तो उन्होंने आने की इच्छा जताई। नीमराणा औद्योगिक क्षेत्र के उद्योग संचालकों ने इसके लिए उनके गांव तक उन्हे यहां तक लाने के लिए बस भेजी। यह एक अच्छी पहल है। उद्योगपतियों व श्रमिकों के बीच आपसी समन्वय आवश्यक है जिसके बिना उद्योग चल नहीं पाएंगे।

- टीकाराम जूली, श्रम राज्य मंत्री, राजस्थान सरकार।