
अलवर. मैं अपने अभिनय को बेहतर बनाने के लिए पात्र की तैयारी एक दिन पहले ही शुरू कर देता हूं। इससे मुझे आत्मसंतुष्टि मिलती है। जब मैंने दुर्योधन का पात्र निभाया तो मेरी उम्र उसके अनुसार सही थी लेकिन आज मुझे रावण का अभिनय करना पड़ रहा है यह आज की उम्र के अनुसार सही है ।
यह कहना था फिल्म अभिनेता पुनीत इस्सर का। जो कि जो कि कारवां फाउंडेशन व रंग थियेटर ग्रुप की ओर से आयेाजित रंग महोत्सव के तहत दिखाए जाने वाले नाटक ‘रावण की रामायण ’ के शुक्रवार को होने वाले मंचन से एक दिन पहले अलवर आए। उदयपुर से होते हुए सडक़ मार्ग से अलवर आए।
1990 में टीवी पर प्रसारित महाभारत नाटक में दुर्योधन का किरदार निभाने के बाद उनको जो पहचान दी वो उनके लिए मील का पत्थर साबित हुई। इसके बाद वो लगातार आगे बढ़ते चले गए।
उन्होंने नाटक के बारे में बताया कि इस नाटक के बाद से मैं रावण के पात्र को वास्तविक जिंदगी में जीने लगा हूं, आप जब देखेंगे तो पता लगेगा की नाटक कैसा था। बातचीत में बताया कि कुली फिल्म में एक फाइट सीन में अमिताब बच्चन को चोट लगने की जो घटना हुई उसे में भूलना चाहता हूं। लेकिन जहां कहीं भी शो के लिए जाता हूं। मेरे फैंस मुझसे इस घटना के बारे में सवाल अवश्य ही करते हैं। फिर से यह घटना मेरे सामने आ जाती है।
महाभारत में पड़ी मार
महाभारत में अभिनय के दौरान भीम को मुझे गदा मारने को कहा गया। जो गदा थी वो 25 किलो वजन की लोहे की गदा थी। सीन में वास्तविकता आए इसलिए भीम तेजी से मार रहे थे। अचानक मुझे इतनी तेज मारा की मेरे शरीर में नील पड़ गई। इनका कहना था कि पैसे की ललक नहीं है। किरदार में जान हो तो लोग वर्षो तक याद करते हैं। उन्होंने बताया कि पिछले एक साल में 40 से ज्यादा शो कर चुके है। एक महिने में लगभग 2 से 3 शो हो ही जाते हैं। किसी भी नाटक, फिल्म, धारावाहिक की स्क्रीप्ट यदि अच्छी लगती है तो ही उसके लिए अभिनय करते हैं। बिग बॉस सीजन 8 के बाद जब बाहर आए तो उन्हें रावण की रामायण का ऑफर मिला। नाटक अच्छा लगा तो तुरंत सहमति दे दी।
Published on:
12 Jan 2018 01:07 pm
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