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सरसों कटाई के बाद थ्रेसर से निकालने में जुटे किसान, अच्छे उत्पादन से पूरे हो रहे अरमान…पढ़ें यह न्यूज

इन दिनों खेतों में सरसों की कटाई जोरों पर है। मुख्य बात यह है कि इस बार सरसों के बाजार भाव से ज्यादा समर्थन मूल्य है। हालांकि खरीद अभी शुरू नहीं हुई। किसान परिवार सरसों की कटाई के साथ ही अपनी फसल को थ्रेसर से निकलवा कर बेचान की तैयारी में जुट रहा है। बाजार में आढत की दुकानों और मण्डी में रोजाना सरसों की आवक भी प्रारम्भ हो गई है। किसान सरकारी खरीद की बांट देख रहा है। इधर 1 अप्रेल से प्रारम्भ होने वाली सरकारी खरीद की तैयारी में सरकारी विभाग भी जुटे हुए हैं, जिसकी टेण्डर प्रक्रिया चल रही है।

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After harvesting mustard, farmers are busy in removing it from thresher.

क्षेत्र में इन दिनों खेतों में सरसों की कटाई जोरों पर है।

नौगांवा. कस्बे सहित क्षेत्र में इन दिनों खेतों में सरसों की कटाई जोरों पर है। मुख्य बात यह है कि इस बार सरसों के बाजार भाव से ज्यादा समर्थन मूल्य है। हालांकि खरीद अभी शुरू नहीं हुई। किसान परिवार सरसों की कटाई के साथ ही अपनी फसल को थ्रेसर से निकलवा कर बेचान की तैयारी में जुट रहा है। बाजार में आढत की दुकानों और मण्डी में रोजाना सरसों की आवक भी प्रारम्भ हो गई है। किसान सरकारी खरीद की बांट देख रहा है। इधर 1 अप्रेल से प्रारम्भ होने वाली सरकारी खरीद की तैयारी में सरकारी विभाग भी जुटे हुए हैं, जिसकी टेण्डर प्रक्रिया चल रही है।

किसानों का कहना है कि गत वर्षों में नौगांवा ब्लाॅक सहित रामगढ़ उपखंड क्षेत्र में सरकारी सर्मथन मूल्य बाजार मूल्य की अपेक्षा कम रहे थे, जिसके कारण किसानों का रूझान सरकारी खरीद की तरफ कम रहा था। पिछली बार सरकार ने सरसों का सर्मथन मूल्य 5450 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया था, जो बाजार भाव की अपेक्षा थोडा अधिक था, लेकिन बाद में बाजार भाव में तेजी आने से 5800 रुपए प्रति क्विंटल तक सरसों खरीदी गई। इस बार सरसों का सरकारी सर्मथन मूल्य 5650 रुपए है, जबकि बाजार में सरसों का मूल्य 5200 रुपए प्रति क्विंटल हैं, जिसके कारण खरीद केन्द्रों पर सरसों की आवक अधिक रहने की संभावना है। कुछ किसान तो कटाई के तुरन्त बाद ही सरसों का बेचान कर रहे हैं, तो कुछ भाव बढने और सरकारी खरीद शुरू होने के इंतजार में है। किसानों का मानना है कि सर्मथन मूल्य पर बेचान में पिछले सालों की अपेक्षा थोडा फायदा दिख रहा है, लेकिन बाजार भाव में अगर गत वर्षो की तरह बढोतरी हुई तो बाजार में भेजना ज्यादा फायदेमंद रहेगा, क्योंकि खरीद केन्द्रों पर जिंस को पास और नापास करने सहित भुगतान में देरी जैसी समस्याएं होती है।


गत वर्ष की अपेक्षा बुआई बढ़ी
कृषि विभाग के अनुसार इस बार सरसों की बुवाई गत वर्ष की अपेक्षा बढी है। इस बार अनुमानित उत्पादन 2 लाख 69 हजार मीट्रिक टन के आस-पास रहेगा। सहायक निदेशक कृषि सांख्यिकी डाॅ. अरविन्द कुमार ने बताया कि वर्ष 2023-24 में सरसों की बुआई क्षेत्र सहित जिले में 1 लाख 50 हजार हैक्टेयर में हुई थी। इस बार किसानों से जो रिपोर्ट आ रही है, उसमें उत्पादन अच्छा बताया जा रहा है। सरसों को तरजीह देने का कारण कम मेहनत और कम पानी है। इस बार मौसम की परिस्थितयों के अनुसार गेहूं का उत्पादन अच्छा होने की गुजाइंश है।

2022 में सरसों का भाव था प्रति क्विण्टल 7200

व्यापारियों के अनुसार गत वर्षो के सरसों के भावों की बात की जाए तो वर्ष 2022 में सरसों के शुरुआती भाव 6 हजार रुपए प्रति क्विण्टल से प्रारम्भ हुआ और सरसों के दाम 7200 तक पहुंच गए थे। 2023 के मण्डी भाव 5800 रुपए प्रति क्विंटल रहा। इस बार कंडीशन सरसों के बाजार में शुरुआती भाव 5200 रुपए है। आने वाले समय में इसके बढने के आसार है।


सरकारी खरीद 1 अप्रेल से, ऑनलाइन पंजीयन 22 मार्च से

समर्थन मूल्य पर सरसों की खरीद 1 अप्रेल से होगी, जिसके रजिस्ट्रेशन आँनलाइन होंगे। 22 मार्च से आँनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया प्रारम्भ हो जाएगी। इसके लिए टेण्डर प्रक्रिया की जा रही है, जो शीघ्र पूरी हो जाएगी। सरकार ने सर्मथन मूल्य 5650 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है, जो बाजार भाव से फिलहाल 450 रुपए ज्यादा है। आने वाले दिनों में भी अगर बाजार भाव सर्मथन मूल्य से कम रहे, तो सरकारी केन्द्रों पर खरीद ज्यादा हो पाएगी। बाजार भाव अधिक होने पर ही किसान मंडियों की ओर रूख कर सकते हैं।
गुलाब मीणा डिप्टी रजिस्ट्रार काॅ-ओपरेटिव सोसायटी।

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