
अलवर के इस बड़े बांध में सीवरेज का पानी आस-पास के खेतों के लिए बनेगा वरदान, पानी को साफ कर खेतों में छोड़ा जाएगा
अलवर. मत्स्य औद्योगिक क्षेत्र स्थित अग्यारा बांध कभी दूषित पानी की समस्या के चलते आसपास के गांवों के लिए मुसीबत माना जाता था, वही अग्यारा बांध का पानी अब कई गांवों के खेतों के लिए वरदान साबित होगा। इसका कारण है कि अग्यारा बांध के दूषित पानी के शुद्धिकरण के लिए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का लगना।
अलवर के समीप अग्यारा बांध का पानी लंबे समय से दूषित होने के कारण आसपास के लोगों के लिए बड़ी समस्या थी। बांघ के दूषित पानी के चलते आसपास के गांवों की उपजाऊ भूमि बंजर होने लगी थी। वहीं कुओं का पानी भी दूषित होकर पीने लायक नहीं रह गया था। बांध के दूषित पानी की दुर्गंध से आसपास के गांवों के लोगों को रहना मुश्किल हो गया था। ग्रामीणों ने अग्यारा बांध के दूषित पानी की समस्या से प्रशासन को कई बार अवगत भी कराया।
समीपवर्ती क्षेत्रों के लिए यह दूषित पानी अभिशाप नहीं वरदान बनकर सामने आएगा। इस पानी को सिंचाई के योग्य बनाया जा रहा है। इसमें बीओडी 30 से कम करके 10 किया जा रहा है जिससे यह पानी शुद्ध हो सकेगा। इस काम के लिए अत्याधुनिक प्लांट लगाया गया है जिस पर 12 करोड़ की लागत आएगी। प्लांट लगाने का कार्य शुरु हो गया है जो अगस्त 2020 तक पूरा हो जाएगा।यह काम आएगा पानी-प्रथम चरण में इस बांध का पानी खेतों में सिंचाई के काम आ सकेगा। बाद में इसे अलवर शहर के पार्कों तक लाया जा सकेगा।
इस बारे में अधिशासी अभियंता अशोक मदान का कहना है कि यह कार्य अगले साल पूरा हो जाएगा। इस वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता 20 एमएलडी है। इसके पानी की क्षमता तो इतनी ही रहेगी लेकिन पानी का शुद्धिकरण किया जाएगा। इस प्रयोग के सफल रहने पर इसे प्रदेश के अन्य शहरों में भी अपनाया जाएगा।
ट्रीटमेंट प्लांट का शुद्ध पानी खेतों में जाएगा
अग्यारा बांध के समीप स्थित ट्रीटमेंट प्लांट में आने वाले सिवरेज का पानी अगले साल से शुद्ध होकर खेतों में फसलों को जीवन दान देगा। अगले चरण में इस पानी से अलवर शहर के बड़े पार्कों की फिज़ा बदल सकेगी।अग्यारा बांध में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट कई वर्ष पूर्व से ही चल रहा है। यहां शहर की सिवरेज का पानी आता है। अब केन्द्र सरकार की अमृत योजना के तहत इस पानी का शुद्धिकरण किया जाएगा। इस पानी का शुद्धिकरण कर इसे खेतों तक पहुंचाया जा सकेगा।
यह है बीओडी
बीओडी को बायोकैमिकल ऑक्सीजन डिमांड कहा जाता है। यह एक विशिष्ट समय अवधि पर किसी निश्चित तापमान पर दिए गए पानी के नमूने में कार्बनिक पदार्थों को तोडऩे के लिए एरोबिक जैविक जीवों की ओर से आवश्यक ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। इसके आधार पर ही पानी की गुणवत्ता तय की जाती है।
Published on:
12 Dec 2019 12:31 pm
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