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एम्स जैसा अलवर का ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज भवन, केन्द्र सरकार को सौपेंगे रिपोर्ट

अलवर के एमआइए में मेडिकल कॉलेज भवन का निरीक्षण करने आई सब कमेटी की रिपोर्ट अगले सप्ताह स्टैण्डिग कमेटी को मिलेगीना राष्ट्र का नुकसान है।

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एम्स जैसा अलवर का ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज भवन, केन्द्र सरकार को सौपेंगे रिपोर्ट

एम्स जैसा अलवर का ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज भवन, केन्द्र सरकार को सौपेंगे रिपोर्ट

अलवर. दिल्ली एम्स (अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान) के पैटर्न पर ही अलवर के एमआइए में इएसआइसी मेडिकल कॉलेज का भवन बनाया गया है। इस भवन में एम्स की तरह ही मेडिकल कॉलेज चलाया जाना बेहतर होगा। भवन इस तरह बनाया गया है कि केवल जांच मशीनें लाना शेष है। पिछले माह अलवर में ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज भवन का निरीक्षण करने आइ तीन सदस्यीय टीम आगामी सप्ताह में स्टैण्डिंग कमेटी को रिपोर्ट सुपुर्द करने वाली है। इसके बाद केन्द्र सरकार यह तय करेगी कि अलवर का ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज में एम्स शुरू किया जाए। या पीपीपी मॉडल या किसी तीसरे पैटर्न पर मेडिकल कॉलेज को संचालित किया जाए।

एम्स व पीपीपी मॉडल की अधिक संभावना
इएसआइसी मेडिकल कॉलेज भवन में एम्स या फिर पीपीपी मॉडल आधारित मेडिकल कॉलेज संचालित किए जाने की अधिक संभावनाएं हो गई हैं। पिछले माह भवन का निरीक्षण करने आई तीन सदस्यों की टीम के प्रमुख डॉ. केशव ने बताया कि भवन पूरी तरह से एम्स जैसा बना हुआ है। टीम अपनी रिपोर्ट आगामी सप्ताह में सुपुर्द कर देगी। जिसके आधार पर स्टैण्डिंग कमेटी में विस्तार से चर्चा होगी। फिर आखिर में ईएसआईसी को तय करना है कि किस आधार पर मेडिकल कॉलेज को शुरू किया जाना बेहतर होगा।

850 करोड़ के भवन में केवल मशीनें लगाना शेष
रिपोर्ट सौंपने से पहले कमेटी के सदस्यों ने बताया कि इएसआइसी के जरिए अलवर में बनाया गया भवन बहुत अच्छी गुणवत्ता का लगता है। मेडिकल कॉलेज की जरूरत के अनुसार बना है। इस 850 करोड़ रुपए की लागत से बने भवन में मशीनें लाना शेष रहा है। एेसा भी नहीं है कि मेडिकल कॉलेज औद्योगिक क्षेत्र में है तो उससे कोई दिक्कत रहेगी। मेडिकल कॉलेज का संचालन शुरू होने के बाद आसपास में जरूरत के अनुसार सुविधाएं भी खड़ी होती रहेंगी।

आइसोलेशन वार्ड बनने के बाद आया ध्यान
करीब छह साल के बाद अलवर के मेडिकल कॉलेज भवन पर केन्द्र सरकार का ध्यान गया है। अब लगता है कि सरकार इसे शुरू करने का जल्दी कोई निर्णय ले सकेगी। वैसे भी जांच कमेटी के सदस्यों ने माना है कि इतने अच्छे भवन को काम में नहीं ले