
कभी घी की मंडी के नाम से विख्यात था अकबरपुर
अलवर जिले का सेठ-साहूकारों का गांव अकबरपुर कभी देसी घी की मण्डी के नाम से प्रसिद्ध था। कस्बे में आजादी से पहले कभी यहां देसी घी की मंडी हुआ करती थी, लेकिन राजनीति के चलते अब सेठ साहूकारों की हवेलिया ंखाली उजाड़ पड़ी हुई है, जिसमें बंदर निवास करते हैं।
अलवर शहर से 17 किलोमीटर दूर अलवर जयपुर हाइवे पर स्थित अकबरपुर कस्बे में पहले कभी देसी घी की मंडी हुआ करती थी। वर्तमान में भी अकबरपुर कस्बे में बड़ी-बड़ी हवेलियां स्थित हैं जिसमें यह हवेलियां खाली और सुनसान पड़ी हुई है जिनमें बंदर निवास करते हैं। अकबरपुर कस्बे के आसपास सरिस्का क्षेत्र में स्थित गांव छिन्डो से निकला देसी घी इक_ा करके लाया जाता था। अकबरपुर का देसी घी देश भर में प्रसिद्ध माना जाता था । अकबरपुर के सेठ साहूकारों के बेल भेलियों से घी जिले भर में वितरण होता था।
सेठों के बैल भी पीते थे देसी घी
ग्रामीणों का कहना है कि अकबरपुर के सेठ महाजनों का यहां देसी घी का व्यापार फैला हुआ था, लेकिन जहां देसी घी बनाया जाता था वर्तमान में वो हवेलियां पूरी तरह सुनसान पड़ी हुई है और अब खंडहर हो रही हैं। देसी घी के टैंक आज भी रखे हुए हैं। इन टैंकों में घी उबालकर पाइप की सहायता से कुंड में डालते थे। जहां कुंड बना हुआ था लेकिन अब क्षतिग्रस्त होकर खराब हो गया है। बताया जाता है कि पहले सेठों के बैल भी देसी घी पिया करते थे जहां कढ़ाई में घी उबलता था। कपूर गुप्ता का कहना है कि हमारी दुकान के आगे से ही घी जाता था, जिसमें आज भी घी के बड़े-बड़े टैंक रखे हुए हैं और घी तैयार करने के लिए कुंड बने हुए थे। ग्रामीण किशोर कुमार शर्मा ने बताया कि कभी देसी घी की मंडी के नाम से प्रसिद्ध अकबरपुर में हवेलियां खण्डहर पड़ी हुई हैं।
सेठ महाजनों का राजनीति में भी था दबदबा
ग्रामीण श्रीचंद्र गुप्ता ने बताया कि अकबरपुर के सेठ महाजनों का राजनीति में भी दबदबा था और आसपास क्षेत्र के लोग उनकी बात मानते थे, लेकिन राजनीति द्वेष के चलते उनका देसी घी का काम ठप हो गया जिसमें राठौड़ नाम से घी बिकता था और 200 पीपे घी के उस समय रोज बिकते थे। अब सेठ साहूकार अकबरपुर को छोडकऱ अलवर चले गए हैं और उनकी हवेलियां खाली पड़ी हुई है जिसमें तीन चौक की बड़ी-बड़ी हवेलियां है।
Published on:
17 Nov 2022 02:07 am
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