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RBSE 12th Result: फेरी लगाकर घर चलाने वाले माता-पिता के बेटे ने 12वीं परीक्षा में किया कमाल, रिजल्ट आते ही खुश हो गए परिजन

Ajit Devi Poojak Motivational Story: अजीत की माता पिता राजेश देवी पूजक रिक्शे पर फेरी लगाकर पुराने कपड़े एवं साड़ियों के बदले बर्तन देते हैं। छात्र अजीत देवी पूजक भी सहयोग करते हैं।

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अलवर

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Akshita Deora

Apr 01, 2026

RBSE 12th Result

अजीत देवी पूजक का फोटो: पत्रिका

12th Commerce Result 2026: राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) की 12वीं कक्षा का परिणाम घोषित होने के बाद कई प्रेरणादायक कहानियां सामने आ रही हैं। आर्थिक तंगी और मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद कई छात्रों ने मेहनत के दम पर अच्छे अंक हासिल किए हैं। ऐसी ही एक कहानी अजीत देवी पूजक की है, जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद 12वीं कॉमर्स में 67 प्रतिशत अंक प्राप्त कर अपने परिवार का नाम रोशन किया।

गुजराती परिवार से हैं अजीत

अजीत देवी पूजक गुजराती परिवार से संबंध रखते हैं। उन्हें गुजराती भाषा के अलावा हिंदी का अधिक ज्ञान नहीं है, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने हिंदी माध्यम से पढ़ाई करते हुए अच्छा प्रदर्शन किया। अग्रवाल उच्च माध्यमिक विद्यालय में अध्ययन करते हुए अजीत ने 12वीं कॉमर्स में 67 प्रतिशत अंक हासिल किए। वह अपने परिवार में सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे छात्र बन गए हैं। रिजल्ट की जानकारी मिलते ही माता-पिता की आंखों से खुशी के आंसू निकल पड़े।

फेरी लगाकर चलाते हैं घर

अजीत के माता-पिता राजेश देवी पूजक रिक्शे पर फेरी लगाकर पुराने कपड़े और साड़ियों के बदले बर्तन देने का काम करते हैं। इसी काम से परिवार का गुजारा चलता है। अजीत भी पढ़ाई के साथ-साथ माता-पिता का हाथ बंटाते हैं। पूरा परिवार किराए के मकान में एक ही कमरे में रहता है। सीमित साधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद अजीत ने पढ़ाई जारी रखी और बिना किसी ट्यूशन के यह सफलता हासिल की।

मजदूर पिता की बेटी कल्पना ने भी किया अच्छा प्रदर्शन

अलवर शहर के ब्रह्मचारी मोहल्ला निवासी कल्पना शर्मा ने भी 12वीं आर्ट्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए 79 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं । कल्पना के पिता शिव शंकर शर्मा एक दुकान पर प्लास्टिक के सामान बेचने का काम करते हैं और मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं । परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं है और उनका खुद का मकान भी नहीं है । वे किराए के मकान में रहते हैं ।

मुश्किल हालात में भी नहीं छोड़ी पढ़ाई

आर्थिक तंगी के बावजूद कल्पना ने कभी पढ़ाई छोड़ने के बारे में नहीं सोचा। मेहनत और लगन के साथ पढ़ाई जारी रखी और अच्छे अंक हासिल कर अपने माता-पिता का सपना पूरा किया।