
आदर्श गांव के नक्शे के अनुरूप बसाया अलेई गांव
अलवर. राजगढ़ कस्बे से करीब चार किलोमीटर दूर अरावली पर्वतमालाओं के बीच अलेई गांव की स्थापना करीब तीन सौ वर्ष पूर्व हुई थी। अलेई गांव अरावली की पर्वतमालाओं के नीचे पहाड़ की तलहटी में बसा हुआ है। गांव में सबसे पहले बारह महादेव, हनुमान जी व धूना बाबा की स्थापना की गई थी। इस समय ग्रामीणों के जनसहयोग से बारह महादेव के मंदिर पर बड़ी संख्या में मूर्तियों की स्थापना की गई है।
पुरानी बसावट को छोडक़र अलेई को आदर्श गांव के नक्शे के अनुसार बसाया गया है। मकान, सडक़ व नालियां सन् 1962 में आदर्श गांव घोषित करने के बाद बनाई गई। सरकार के अनुदान से पूरे गांव के मकानों व सडक़ों का निर्माण कार्य किया गया। अलेई से रेलवे स्टेशन करीब तीन किलोमीटर दूरी पर स्थित है। गांव के लोगों का मुख्य व्यवसाय कृषि है। ग्रामवासी बाजरा, मक्का,चना, सरसो, गेहूं की फसल पैदा करते है। इसके अलावा पशुपालन एवं मजदूरी कर ग्रामीण अपना पालन-पोषण करते है। गांव की आबादी करीब एक हजार है । गांव मेंं मीना जाति के 50 व बैरवा जाति के 30 परिवार निवास करते है। करीब पचास लोग सरकारी सेवा में है। दो सौ बीघा जमीन है जिसमें सौ बीघा असिंचित है।
दूर दराजसे आते हैं इलाज कराने
अलेई गांव में जोरावर बाबा व मोतीसिंह बाबा के स्थान पर श्रद्धालु टाइफाइड व अन्य बीमारियों का इलाज कराने आते हंै। झाड़े से ही उनका उपचार हो जाता है । धूना बाबा के स्थान पर अग्नि धूने में चौबीस घंटे जलती रहती है।
ग्रामीणों का कहना है कि धूने में कभी अग्नि बुझती नहीं है। बाबा गुप्त रूप से है । किसी भी साधू को धूने पर नही रूकने दिया जाता है।
Published on:
24 Nov 2020 05:40 pm
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