
अलवर.रामगढ़. अंकल मुझे गाड़ी से बाहर निकालो, मैं मर जाऊंगा। गर्दन तक पानी व दलदल में डूबे बालक की आवाज सुनकर ग्रामीण सन्न रह गए। एकाएक उनकी निगाह पोखर में गिरी गाड़ी की बीच की सीट में फंसे बालक पर गई। उन्होंने बच्चे को बचाने में देर नहीं की। आनन-फानन में उन्होंने गाड़ी की बीच की सीट का शीशा तोड़ बालक को बाहर खींच लिया। यह बच्चा और कोई नहीं पवन जैन के परिवार का आखिरी चिराग दस वर्षीय पीयूष था। जिसने मंगलवार को गमगीन माहौल में अपने पिता, मां और बहनों को मुखाग्नि दी। गांव बहज निवासी शम्भूसिंह ने बताया कि उसका घर पोखर के पास है।
सोमवार रात करीब 11.55 बजे गाड़ी के पोखर में गिरने की आवाज उसके घर तक आई। चीख-पुकार सुनकर गांव के युवक गुलाब, जीतू, नरवीर, शिवराम, ब्रजेश आदि पोखर में कूद पड़े और गाड़ी से लोगों को बाहर निकालने लगे। सबसे पहले उन्होंने पीछे की सीट पर बैठे संजय, उसके पिता पदम सहित संकेत व नितिन को बाहर निकाला। पोखर में पानी से ज्यादा दलदल के चलते इस काम में काफी समय लगा। इसके बाद अन्य लोगों को निकालने के लिए वे पोखर में उल्टी पड़ी गाड़ी को सीधा करने लगे, तभी गाड़ी से एक बच्चे की आवाज आई। अंकल ऐसा मत करो। गाड़ी सीधी की तो मैं मर जाऊंगा। इतना सुनते ही युवकों के कदम ठिठक गए। उन्होंने गाड़ी में झांककर देखा तो बीच की सीट पर गर्दन तक पानी व दलदल में फंसा एक बच्चा विनती भरे स्वर में उसे बाहर निकालने की कह रहा था।
युवकों ने आनन-फानन में बीच की सीट का शीशा तोड़ बच्चे को बाहर खींचा। बाद में यह बच्चा गांव में ही रुका। ग्रामीणों ने इसके कीचड़ से सने कपड़े बदले। उसे चाय-दूध पिलाया। इसके साथ रात्रि में गाड़ी का ड्राइवर बबलू भी गांव में ठहरा। अगले दिन सुबह ताऊ के गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने बालक को उनके सुपुर्द किया।
सीट में बुरी तरह फंस गए मनीषा व इंदिरा
गाड़ी की बीच की सीट पर मनीषा, इंदिरा, परी व पीयूष बैठे थे। उनके पैर रखने की जगह में सामान भरा हुआ था। जिसके बीच उनके पैर फंसे हुए थे। ग्रामीणों ने बताया कि गाड़ी के पलटने पर मनीषा, इंदिरा, परी ने सबसे पहले दम तोड़ा। ग्रामीणों को उनके शव बाहर निकालने के लिए बड़ी मशक्कत करनी पड़ी। बाद में जेसीबी व टै्रक्टरों की मदद से गाड़ी को सीधी कर मृतकों के शवों को बाहर निकाला गया।
Published on:
03 Jan 2018 01:26 pm
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