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सावधान…ये कचौरी है बीमारियों की तिजौरी, जिन कचौरियों को शौक से खाते हैँ लोग, उनमें मिलावटी और खराब क्वालिटी का सामान

कचौरी-समोसे बेचने वाले इन ठेले और दुकानों पर स्वच्छता और शुद्धता का जरा भी ध्यान नहीं रखा जा रहा है। ठेलों और उनके आसपास साफ-सफाई नहीं होती है।

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अलवर

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Lubhavan Joshi

Jun 10, 2022

Alwar Bad Quality Kachories Selling On Streets

सावधान...ये कचौरी है बीमारियों की तिजौरी, जिन कचौरियों को शौक से खाते हैँ लोग, उनमें मिलावटी और खराब क्वालिटी का सामान

अलवर. जिले में ठेले और दुकानों पर बिक रही कचौरी स्वास्थ्य के लिए जहर से कम नहीं है। दरअसल, इन ठेले और दुकानों पर घटिया क्वालिटी के तेल को बार-बार उबालकर कचौरी तैयार की जा रही है। इन्हें लगातार खाने से लीवर और किडनी तक खराब हो सकते हैं तथा स्वास्थ्य पर अन्य दुष्प्रभाव भी पड़ सकते हैं। इसके बावजूद भी चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग बिना फूड लाइसेंस के बिक रही इन कचौरी के ठेले और दुकानों पर किसी भी जगह जांच कार्रवाई नहीं कर रहा है।

अलवर जिले में कचौरी-समोसे के ठेले और दुकानों की संख्या कई हजारों में है। मोटे अनुमान के अनुसार अलवर जिले में रोजाना 30 से 35 लाख रुपए के कचौरी-समोसे बिक जाते हैं। कचौरी-समोसे बेचने वाले इन ठेले और दुकानों पर स्वच्छता और शुद्धता का जरा भी ध्यान नहीं रखा जा रहा है। ठेलों और उनके आसपास साफ-सफाई नहीं होती है। हलवाई बिना एप्रीन पहने मेले-कुचेले कपड़ों में बैठकर गंदे हाथों से ही लोगों को दोने में कचौरी सप्लाई करते रहते हैं। उनके हाथों में न कोई ग्लब्स होते हैं और न ही सिर पर कैप होती है। वहीं, कचौरी तैयार करने में घटिया क्वालिटी का रिफाइंड तेल इस्तेमाल करते हैं। उसी तेल को बार-बार उबालकर उसमें कचौरी तलते रहते हैं। जिससे तेल काफी काला हो जाता है, लेकिन बार-बार उसी तेल का इस्तेमाल करते रहते हैं। कचौरी व सब्जी और कढी बनाने में घटिया क्वालिटी के बेसन, मिर्च-मसाले और मेदा आदि का इस्तेमाल करते हैं। साथ ही सब्जी में एसिड और पोस्त तक डालते हैं। इस तरह से तैयार कचौरी-समोसे स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है।

नालों और शौचालयों के पास ही लग रहे ठेले

अलवर शहर सहित जिलेभर में ज्यादातर जगह नालों और शौचालयों के आसपास ही कचौरी-समोसे के ठेले लगते हैं। नाले और शौचालय की दुर्गन्ध के बीच खड़े होकर लोग कचौरी-समोसे स्वाद लेकर खाते नजर आते हैं। इसके अलावा पास में लोग झूठे दोने डालते हैं। वहीं, आसपास कुत्ते व सूअर आदि जानवर घूमते रहते हैं। जानवर इन झूठे दोने में मुंह मारते रहते हैं। वहीं, इन ठेलों के पास रखा पीने का पानी भी खुले में रखा रहता है।

विभाग किसी भी जगह नहीं कर रहा जांच

शहर सहित जिलेभर में कचौरी-समोसे बेचने वालों ने फूड सेफ्टी के नियमों की धज्जियां उड़ाई हुई हैं। अधिकांश ने फूड लाइसेंस तक नहीं लिए हुए हैं, लेकिन इसके बावजूद चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग इन कचौरी-समोसे के ठेलों और दुकानों पर कार्रवाई तक नहीं कर रहा है। पिछले कई महीनों में विभाग ने एक भी जगह कचौरी के ठेले या दुकान की जांच नहीं की है।

स्वास्थ्य के लिए हो सकता है घातक

चिकित्सकों के अनुसार कचौरी-समोसे में ज्यादातर ठेले और दुकानदार घटिया क्वालिटी के मिर्च-मसाले, बेसन और मेदा का इस्तेमाल करते हैं। इन्हें खाने से स्वास्थ्य पर घातक दुष्प्रभाव हो सकता है। कुछ समय से नियमित रूप से कचौरी-समोसे खाने से लीवर और किडनी तक खराब हो सकते हैं। इसी के साथ पेट सम्बन्धी अन्य बीमारियां भी हो सकती है।