
अलवर बस स्टैण्ड सरकार को रोज दे रहा 25 लाख से अधिक की कमाई, लेकिन सरकार सफेदी तक नहीं करा रही, कुछ ऐसी है हालत
केन्द्रीय बस स्टैण्ड अलवर प्रदेश के ए-श्रेणी का बस स्टैण्ड है और राजस्व में भी अव्वल रहता है, लेकिन इसके बावजूद यहां मॉडर्न बस स्टैण्ड का सपना कई साल बाद भी अधूरा है। हालात यह है कि कई साल से बस स्टैण्ड डिपो में सफेदी तक नहीं कराई गई है।
रोडवेज को घाटे से उभारने के लिए रोडवेज प्रशासन की ओर से करीब एक दशक पहले से अलवर बस स्टैण्ड पर नोन ऑपरेटिव रेवेन्यू अर्जित करने का प्रस्ताव तैयार किया। जिसके तहत यहां कैफेट एरिया और डिजीटल सिनेमा आदि चालू करने पर विचार किया गया। मुख्यालय स्तर पर भी इस प्रस्ताव पर गंभीरता से चर्चा की गई, लेकिन बाद में प्रस्ताव फाइलों में ही दम तोड़ गया। इसके बाद जिला व मुख्यालय स्तर पर कई अधिकारी बदले, लेकिन किसी ने मॉडर्न बस स्टैण्ड के प्रस्ताव को आगे नहीं बढ़ाया।
नहीं हो रहा जमीन का सदुपयोग
अलवर बस स्टैण्ड पर काफी जमीन खाली पड़ी है, जिसका कोई सदुपयोग नहीं हो पा रहा है। लोग यहां कचरा डाल जाते हैं। यदि इस खाली जगह को कॉम्पलेक्स, कैफेट एरिया या पार्क आदि के रूप में विकसित कर दिया जाए तो रोडवेज प्रशासन की आय भी बढ़ेगी और बस स्टैण्ड परिसर की सुंदरता भी।
सफेदी तक नहीं करा रहे
केन्द्रीय बस स्टैण्ड के अलवर और मत्स्य नगर आगार डिपो की हालत यह है कि यहां पिछले कई साल से दीवारों पर सफेदी और रंग तक नहीं कराया गया है। दीवारों के कोने गुटखे के पीक से लाल हो चुके हैं, लेकिन रोडवेज प्रशासन कोई ध्यान नहीं दे रहा है। रोडवेज सूत्रों के अनुसार पिछले मत्स्य नगर आगार की ओर से डिपो में सफेदी और रंग कराने के लिए मुख्यालय को करीब 70 हजार रुपए का प्रस्ताव भेजा था, जिसे ही अब तक मंजूरी नहीं मिल पाई है। दोनों डिपो पर यात्रियों के बैठने की कुर्सियां तक टूटी पड़ी हैं।
फैक्ट फाइल
केन्द्रीय बस स्टैण्ड पर आगार संख्या -2
दोनों आगारों में कुल बसें -
करीब 225
दोनों आगारों की प्रतिदिन कुल आय - 25 से 26 लाख रुपए
अलवर केन्द्रीय बस स्टैण्ड को मॉडर्न बस स्टैण्ड के रूप में विकसित करने को लेकर फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है। डिपो परिसर में सफेदी के लिए प्रस्ताव भिजवाया गया था। जिसे अभी मंजूरी नहीं मिल पाई है।
रामजीलाल मीणा, मुख्य प्रबंधक, मत्स्य नगर आगार।
Published on:
05 Feb 2019 09:54 am
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