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जूली व देवी सिंह ने पूछा, लिपिक भर्ती में फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र बनाने वालों पर कार्रवाई में देरी क्यों

अलवर में लिपिक भर्ती फर्जीवाड़े को लेकर विधानसभा में सवाल उठे। फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र, बर्खास्तगी और कार्रवाई में देरी पर सरकार से जवाब मांगा गया।

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अलवर

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Ankit Sai

Feb 01, 2026

Tikaram Jully

अलवर: नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली व बानसूर विधायक देवी सिंह शेखावत ने विधानसभा में लिपिक भर्ती व जारी किए गए फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र को लेकर कई सवाल लगाए हैं। उन्होंने पूछा है कि फर्जीवाड़ा करने वाले कितने लोगों को बर्खास्त किया गया और कार्रवाई में देरी क्यों की गई? इन सभी सवालों के जवाब सरकार ने जिला परिषद अलवर से मांगे हैं। साथ ही प्रदेश की अन्य जिला परिषदों से इसको लेकर जवाब मांगे गए हैं। क्योंकि लिपिक भर्ती पूरे प्रदेश में एक साथ हुई थी, जिसको लेकर तमाम लोग कटघरे में हैं।

देवी सिंह ने लगाए यह प्रश्न

  • जिला परिषद में मुख्य कार्यकारी अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर और दूसरे कूट रचित दस्तावेजों से भर्ती होने के कुल कितने प्रकरण सामने आए?
  • कितने शिक्षक लिपिक और ग्राम विकास अधिकारी बर्खास्त किए गए और इनको फर्जी दस्तावेज देने वाले जिला परिषद के अधिकारी, कर्मचारियों पर मुकदमा दर्ज कराया गया या नहीं?
  • जिला कलेक्टर अलवर की ओर से फरवरी 2025 में शासन सचिव को फर्जी लिपिक भर्ती पर भेजी गई दूसरी रिपोर्ट पर शासन सचिव पंचायती राज ने आज तक क्या कार्रवाई की?

जूली ने लगाए यह सवाल

  • मुख्य कार्यकारी अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर से अनुभव प्रमाण पत्र जारी करने के मामले में दोषियों को बर्खास्त करने के सरकारी आदेश के बाद भी इतना विलंब क्यों हुआ, कारण बताएं?
  • फरवरी में उपखंड अधिकारी को जिला परिषद की ओर से भेजी गए रिपोर्ट की प्रति उपलब्ध कराएं।

फर्जीवाड़े की पत्रिका ने खोली पोल

लिपिक भर्ती फर्जीवाड़ा हो या फिर फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र के आधार पर जयपुर के दो लिपिकों को नौकरी देने का मामला हो, यह सभी राजस्थान पत्रिका ने खुलासे किए। जिला प्रशासन की रिपोर्ट में कई केस सामने आ चुके।

प्रशासन ने जिम्मेदार अधिकारी व कार्मिकों पर कार्रवाई के लिए सरकार को पत्र लिखा था, लेकिन अब तक कार्रवाई सामने नहीं आ पाई है।

अलवर के फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र पर नौकरी लगे जयपुर जिला परिषद के दो लिपिक बर्खास्त हो गए, जिसमें एक की गिरफ्तारी हो गई। दूसरी महिला फरार है।

इस तरह हुई जांच


लिपिक भर्ती 2013 तीन चरणों में आयोजित हुई। वर्ष 2017 व 2022 में हुई। वर्ष 2022 में हुई भर्ती के दस्तावेजों की जांच चल रही है। प्रदेश स्तरीय कमेटी 128 केस की जांच कर रही हैं।

वहीं जिला प्रशासन ने 6 केस की जांच की है। इसके अलावा 15 ऐसे केस की जांच की गई है, जिनके अंक अधिक होने के बाद भी लिपिक की नौकरी नहीं दी है।

जिला परिषद ने जिला प्रशासन की रिपोर्ट के बाद दो लिपिकों को बर्खास्त कर केस दर्ज कराया है, लेकिन पुलिस इस मामले की जांच में आगे नहीं बढ़ रही, जबकि जयपुर पुलिस तेजी से मामलों में गिरफ्तारी कर रही है।

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