
कला कॉलेज में भ्रष्टाचार की कला, पांच माह भी नहीं टिका बीस लाख का भवन, आई दरारें
अलवर. सार्वजनिक निर्माण विभाग के कार्य में गुणवत्ता की पोल एक बार फिर खुल गई। विभाग की ओर से बाबूशोभाराम राजकीय कला कॉलेज में लगभग 20 लाख रुपए की लागत से बनवाए प्रशासनिक भवन की नींव जरा सी बारिश में धंस गई। इससे भवन की दीवारें चटक गई। सीमेन्ट व बजरी उखड़ बाहर आ गई और दीवारों में गहरी दरारें बन गई। इससे भवन के बुनियादी ढांचे पर भी खतरा बन गया है। कॉलेज में इस भवन का निर्माण हाल ही राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) के तहत राज्य सरकार से प्राप्त अनुदान से कराया गया था। इस साल जनवरी माह में सार्वजनिक निर्माण विभाग ने इस भवन को कॉलेज प्रशासन को हस्तांतरित किया। खास बात ये है कि कॉलेज प्रशासन की ओर से इस भवन में अभी बैठना भी शुरू नहीं किया गया, उससे पहले ही इसकी नींव व दीवारें चरमरा गई। नींव के धंसने का असर भवन के फर्श पर भी पड़ा। इससे फर्श में भी बड़ी-बड़ी दरारे आ गई हैं। भवन का एक हिस्सा भी झुक गया है।
छात्रों का बैठना कराया बंद
नए प्रशासनिक भवन में फिलहाल परीक्षा केन्द्र संचालित था। जिसमें विभिन्न विषयों की परीक्षाएं आयोजित होती थी। इसके लिए भवन में टेबल-कुर्सियां आदि बिछी हुई थी। भवन की नींव के धंसने व दीवारों के चटकने के बाद कॉलेज प्रशासन ने यहां परीक्षाएं संचालित कराना व छात्रों को बिठाना बंद करा दिया। कॉलेज प्रशासन की मानें तो इस भवन में बैठना अथवा परीक्षा कराना खतरे से खाली नहीं है। कभी भी भवन का कोई हिस्सा गिर सकता है।
बारिश सिर पर, ढह सकता है भवन
जरा सी बारिश में नींव के धंस जाने से बरसात में इस भवन के ढहने का खतरा भी बन गया है। दरअसल, मानसून सिर पर है। जिले में अभी बारिश की ढंग से शुरुआत भी नहीं हुई है। ऐसे में जोरदार बारिश आने पर यदि यह भवन ढह गया तो कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी। जानकारों की मानें तो भवन की नींव में पोल है। बारिश के दिनों में यह पोल और बढ़ जाएगी। इससे भवन को खतरा उत्पन्न हो सकता है।
आखिर कौन है जिम्मेदार?
करीब बीस लाख रुपए की लागत से बने इस भवन की नींव के धंसने का कारण क्या रहा? भवन निर्माण के दौरान विभागीय इंजीनियरों को इसकी जानकारी कैसे नहीं लगी? क्या भवन के निर्माण के समय नींव की जांच नहीं की गई? ऐसे कई सवाल हैं, जो जवाब मांगते हैं। नियमानुसार कार्य व गुणवत्ता की जांच के बाद ही भुगतान होता है। क्या इस भवन के मामले में ऐसा नहीं हुआ? हुआ तो यह चूक कैसे हुई? विभागीय अधिकारियों को इन सभी बातों पर गौर कर मामले की जांच करनी चाहिए, तभी सरकारी धन का दुरुपयोग रुक सकेगा।
पहले भी चटक चुकी है दीवार
सार्वजनिक निर्माण विभाग के कार्य की कलई पहले भी खुल चुकी है। विभाग की ओर से इंदिरा गांधी स्टेडियम में लगभग साढ़े चार करोड़ की लागत से बनवाए गए बहुउद्देशीय इन्डोर हॉल की दीवारें भी पिछले दिनों दरक गईं। जिनकी दरारों को छिपाने के लिए विभाग ने आनन-फानन में उनमें सीमेन्ट तो भरवा दिया, लेकिन दीवारों पर बने निशां अब भी विभागीय कार्य की गुणवत्ता की पोल खोल रहे हैं।
हमने संबंधित विभाग को पत्र लिखकर भवन की हालत से अवगत करा दिया है। कॉलेज प्रशासन को यह भवन करीब पांच माह पहले ही हैंडओवर किया गया था। भवन में दरारें आने के बाद से इसमें बच्चों को बिठाना भी बंद कर दिया गया है।
- डॉ. आरसी खण्डूरी, प्राचार्य, आट्र्स कॉलेज अलवर
आट्र्स कॉलेज के नए प्रशासनिक भवन की नींव धंसने की जानकारी मिली है। रविवार को इसका मौका देखा जाएगा। साथ ही इसकी दीवारों में आई दरारों को भरवाया जाएगा।
जेसी पाठक, सहायक अभियंता सानिवि अलवर
Published on:
24 Jun 2018 08:46 am
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