14 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

डिलीवरी बॉय को पकड़ा, अब खुलासा किए बगैर छोड़ा

19 दिन बाद भी पुलिस खुलासे से बच रही

3 min read
Google source verification
डिलीवरी बॉय को पकड़ा, अब खुलासा किए बगैर छोड़ा

डिलीवरी बॉय को पकड़ा, अब खुलासा किए बगैर छोड़ा

जिस डिलीवरी बॉय को पकड़ा, खुलासा किए बगैर गुपचुप गिरफ्तार दिखा छोड़ा
अलवर. मूक बधिर बालिका प्रकरण में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। मामले में एक्सीडेंट की थ्योरी मानते हुए पुलिस ने जिस डिलीवरी बॉय को पकड़ा था। उसे घटना का खुलासा किए बगैर ही गुपचुप तरीके से सामान्य धाराओं में गिरफ्तार दिखा छोड़ दिया है। घटना के 19 दिन बाद भी पुलिस खुलासे से बच रही है। एफएसएल रिपोर्ट में पीडि़ता की सलवार पर सीमन मिलने के बाद अब पुलिस घटना को नया रूप देने की तैयारी में है।
शहर के तिजारा फाटक ओवरब्रिज के ऊपर 11 जनवरी की रात 15 वर्षीय मूक बधिर बालिका लहूलुहान हालत में पड़ी मिली थी। जिसके गुप्तांगों से खून बह रहा था। शुरुआत में अलवर पुलिस अधीक्षक ने घटना को लेकर गैंगरेप की आशंका जताई, लेकिन 72 घंटे बाद मेडिकल रिपोर्ट का हवाला देते हुए बलात्कार की घटना से इनकार कर दिया। इसके बाद पुलिस ने मामले में एक्सीडेंट की थ्योरी मानते हुए एक फूड सप्लाई कम्पनी के डिलीवरी बॉय को हिरासत में लिया। पुलिस ने एक्सीडेंट की घटना को सही मानते हुए जयपुर एफएसएल टीम को बुलाकर मौके पर जाकर पीडि़ता की जगह बुत खड़ा कर बाइक से टक्कर मारते हुए घटना का सीन भी री-क्रिएट किया।
सूत्रों के अनुसार पुलिस ने मामले में एक्सीडेंट की थ्योरी को फाइनल मानते हुए यूनुस नाम के डिलीवरी बॉय को कई दिन तक हिरासत में भी रखा, लेकिन जैसे ही जयपुर एफएसएल की रिपोर्ट आई और पीडि़ता की सलवार पर सीमन मिलने की पुष्टि हुई तो अलवर पुलिस ने गुपचुप तरीके से डिलीवरी बॉय को सामान्य एक्सीडेंट की धाराओं में गिरफ्तार दिखा तुरंत थाने से रिहा कर दिया।
सभी एफएसएल रिपोर्ट आई, सिर्फ एक बाकी
मूक बधिर बालिका प्रकरण में जयपुर एफएसएल को जांच के लिए 65 से 70 आइटम भेजे गए थे। शुरुआत में 55 आइटम भेजे गए तथा दूसरे राउण्ड 10-15 आइटम जांच के लिए जयपुर एफएसएल को भेजे गए। जिसमें पीडि़ता के कपड़े, बाल, खून, मिट्टी, पत्थर और मौके से मिले कंडोम आदि भेजे गए। इनमें से सभी आइटम की एफएसएल रिपोर्ट आ चुकी है। जिसमें पीडि़ता की सलवार पर सीमन मिला है। वहीं, मौके से मिले कंडोम और पीडि़ता की सलवार पर मिला सीमन अलग-अलग पाया गया है। इस मामले में अब सिर्फ घटनास्थल पर किए गए एक्सीडेंट के सीन री-क्रिएट की रिपोर्ट आना बाकी है।

अब एफएसएल रिपोर्ट को घुमाने की तैयारी
अलवर के मूक बधिर बालिका प्रकरण ने पूरे देश को हिला दिया था, लेकिन इस सनसनीखेज मामले को राज्य सरकार और पुलिस लगातार घुमाने में लगी हुई है। जयपुर एफएसएल रिपोर्ट में पीडि़ता की सलवार पर सीमन मिलने के बाद भी पुलिस खुलासे के बजाय इस घटना को घुमाने के प्रयासों में लगी है और इसे एक्सीडेंट साबित करने पर तुली है। पीडि़ता की सलवार पर मिले सीमन को लेकर अब पुलिस यह तर्क दे सकती है कि सीमन घर-परिवार में ही अन्य कपड़ों या बिस्तर से भी लग सकता है। जबकि घटना के हालात कुछ और ही बयां कर रहे हैं।

बार-बार लापरवाही उजागर
मूक बधिर बालिका प्रकरण में पुलिस और प्रशासन की बार-बार लापरवाही उजागर हो रही है। घटना को लेकर शुरुआत में अलवर एसपी ने गैंगरेप की आशंका जताई। इसके बाद पूरे देशभर में बवाल मच गया। बाद में पुलिस ने बलात्कार की बात से इनकार कर दिया। फिर तिजारा फाटक ओवरब्रिज के ऊपर सफाई करा घटनास्थल के साक्ष्य ही मिटा दिए। अब पुलिस ने कोई भी खुलासा किए बिना ही डिलीवरी बॉय को गुपचुप तरीके से गिरफ्तार दिखा छोड़ दिया।
एक रिपोर्ट बाकी है
&प्रकरण में पुलिस की ओर से गहनता से अनुसंधान जारी है। कई लोगों से पूछताछ के लिए भी बुलाया गया। जयपुर एफएसएल से सभी रिपोर्ट आ चुकी है सिर्फ एक सीन री-क्रिएट की रिपोर्ट आना बाकी है। सभी जांच और रिपोर्ट पूरी होने के बाद ही मामले में खुलासा किया जाएगा।
- तेजस्विनी गौतम, जिला पुलिस अधीक्षक, अलवर।