
अलवर जिले में 1903 में बन गई थी 8 नगर पालिकाएं, जानिए क्या थे नियम और कितनी थी इनकम
अलवर. जिले में नगर पालिकाओं का अपना ही इतिहास है। अलवर में स्टेट समय में 1903 में नगर पालिका एक्ट लागू हो गया था और 8 नगर पालिकाएं राजगढ़, रामगढ़, बहरोड़, गोविन्दगढ़, तिजारा, बहादरपुर, शाहबाद, अलवर शहर में बनाई गई। उस दौरान नगर पालिका का आनरेरी प्रेसिडेंट, वाइस प्रेसिडेंट व सदस्यों की उप समिति पूर्व शासक की ओर से नाम जद की जाती थी। वर्ष 1918 में लक्ष्मणगढ़, मुण्डावर, थानागाजी और बानसूर में नगर पालिकाएं बनाई गईं, जिनकी आय 6 हजार रुपए थी। वहीं 1919-20 में नौगांवा अलावड़ा, मुबारिकपुर, प्रतापगढ़, नारायणपुर, मौजपुर, कठूमर, किशनगढ़, हरसौली तथा 1920-21 में सभी निजामतों व कस्बों में नगर पालिका स्थापित की गई, तब पूर्व अलवर स्टेट में नगर पालिकाओं की संख्या 21 से 29 हो गई। साथ ही अगले वर्ष यह संख्या बढकऱ 32 तक पहुंच गई।
वर्ष 1928-31 में इनकी आय 35 हजार 800 रुपए तक पहुंच गई। उस समय 5 जुलाई 1934 को हुई सभा में म्यूनिसिपल बोर्ड के सभापति और उप सभापति का चुनाव गैर सरकारी और सरकारी सदस्यों की ओर से करने की मांग की गई, एक अप्रेल 1939 को नगर पालिका सदस्यों की नियुक्ति निर्वाचन के आधार पर करने का निर्णय हुआ, लेकिन इसकी पूर्ण स्वतंत्रता पर थोड़ा अंकुश लगा दिया। निर्वाचन प्रक्रिया में केवल जायदाद (मकान, दुकान वालों) तथा 8 वीं पास वालों को मतदान का अधिकार दिया गया। इसी आधार पर मतदाता सूची बनी और चुनाव हुआ, लेकिन 1945 तक कलक्टर या सरकारी अध्यक्ष ही बनाने का प्रावधान रखा गया। इस प्रकार नगर पालिकाओं नामजद सदस्यों को सामान्य सफाई, रोशनी की व्यवस्था और सांस्कृतिक कार्यक्रम का कार्य करने का अधिकार दिया गया। इलाके में सम्पन्न और प्रतिष्ठित नागरिकों को इसमें राज की ओर से सम्मलित किया जाता था। पिछड़ी जाति और हरिजन व्यक्तियों को भी नगर पालिका का सदस्य अनिवार्य रूप से मनोनीत किया जाता था।
Published on:
30 Nov 2020 12:06 pm
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