अस्पतालों में कोरोना मरीजों के लिए बैड खाली नहीं, तीन हजार बैड की क्षमता वाला अस्पताल परिसर खाली पड़ा

- एक हजार करोड़ की लागत से बने अस्पताल में केवल 60 बैड की मंजूरी
- व्यवस्था सुधारनी है तो लेना होगा बड़ा निर्णय

 

By: Lubhavan

Updated: 14 May 2021, 02:09 PM IST

अलवर. कोरोना की दूसरी लहर में मरीज इस कदर तेजी से बढ़े हैं कि स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं। चिकित्सक हाथ जोड़कर कह रहे हैं कि उनके पास संसाधन नहीं है। अलवर के सरकारी व निजी अस्पतालों में कोरोना मरीजों के लिए बैड मिलना बेहद मुश्किल हो गया है। वहीं दूसरी ओर अलवर में एक हजार करोड़ की लागत से बना विश्व स्तर का अस्पताल खाली पड़ा है। अलवर के एमआईए स्थित ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल परिसर में इतनी क्षमता है कि यहां 3 हजार बैड का कोविड डेडिकेटेड अस्पताल बनाया जा सकता है। ईएसआईसी परिसर में 500 बैड का अस्पताल खाली पड़ा है। वहीं मेडिकल कॉलेज के विभिन्न हॉस्टल और अन्य बिल्डिंग में इतने कमरे हैं कि यहां 3 हजार बैड लगाए जा सकते हैं।इस एक बिल्डिंग में जिले में सभी कोरोना मरीजों को एक साथ भर्ती किया जा सकता है जिससे अन्य अस्पताल कोरोना मुक्त हो सकें। लेकिन इतने बड़े अस्पताल में प्रशासन ने केवल 60 बैड की ही मंजूरी दी है। जिनमें से ऑक्सीजन के मात्र 23 बैड हैं।

इन भवनों में लग सकते हैं कोरोना मरीजों के लिए बैड

ईएसआईसी अस्पताल में 500 बैड की व्यवस्था है। जिसमें 10 ऑपरेशन थिएटर और 5 आईसीयू हैं। जिनका इंफ्रास्ट्रक्चर भी आधुनिक है। इसके आलावा रेजिडेंट्स डॉक्टर्स के लिए 10 मंजिल के भवन में 110 से ज्यादा कमरे हैं। इंटरनीज हॉस्टल 10 मंजिल का भवन है जिसमें करीब 100 कमरे हैं। ब्वॉयस हॉस्टल में भी 100 से अधिक कमरे हैं। वहीं नर्स हॉस्टल में 105, मरीजों के परिजनों के ठहरने के भवन में 24 कमरे, कम्युनिटी सेंटर में 30 कमरे व कुछ हॉल भी हैं। वहीं कर्मचारियों के रहने के लिए बनाए गए 200 से अधिक टूबीएचके फ्लैट भी खाली हैं। अगर इस परिसर को कोरोना डेडिकेटेड बना दिया जाए तो जिले के अन्य 40 कोरोना डेडिकेटेड अस्पतालों और सीएचसी से भार कम हो जाए। इससे वहां सामान्य मरीजों का भी अच्छे से इलाज हो सकेगा।

जयपुर में सरकारी बैड 2500, इससे ज्यादा अकेले ईएसआईसी में बन सकते हैं

प्रदेश की राजधानी जयपुर में कोरोना मरीजों के लिए सरकारी बैड 2500 के करीब हैं। प्रदेश के सबसे बड़े कोविड डेडिकेटेड अस्पताल आरयूएचएस में 1200 बैड्स की सुविधा है। वहीं एसएमएस जयपुर में 1 हजार बैड्स हैं। इसके आलावा जयपुरिया, ईएसआईसी व अन्य अस्पतालों में 300 के करीब बैड्स कोरोना मरीजों के लिए हैं। अलवर में पड़ोस के राज्यों से भी मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। ऐसे में ईएसआईसी को कोविड डेडिकेटेड कर दिया जाए तो बेहतर व्यवस्था हो सकेगी।


कोरोना की शुरुआत में किए थे तत्काल इंतजाम

कोरोना महामारी की शुरुआत में चीन से एयरलिफ्ट कर लाए गए भारतीयों को इसी अस्पताल में रखा जाना था। जिसके लिए 300 कमरे रिज़र्व रखे गए थे। उनके खाने-रहने की सभी व्यवस्थाएं की गई थी। यहां 26 दिन के लिए 18 डॉक्टर व 30 नर्सिंग स्टाफ की ड्यूटी लगाई गई थी। यह सब इंतजाम शॉर्ट नोटिस पर कर दिए थे। लेकिन अब इन व्यवस्थाओं की दरकार है, तो कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा।

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Lubhavan Desk
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