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अलवर ईएसआइसी नर्सिंग घोटाला: वार्ड ब्वॉय के पास रहती थी भर्ती की फाइल, पत्नी सहित परिचितों को भर्ती कराया, अभ्यर्थियों से पैसे लिए

भर्ती की फाइल एक वार्ड ब्वॉय को सौंपी गई, जो कि एसीबी को उसके कमरे से मिली। एमजे सोलंकी कम्पनी के फील्ड इंचार्ज भी वार्ड ब्वाय संपर्क में रहता था। ईएसआइसी प्रशासन की ओर से अभ्यर्थियों की भर्ती में इसी की भूमिका अहम थी।
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अलवर

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Lubhavan Joshi

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Updated: 23 Jun 2021, 12:23 PM IST

Alwar ESIC Hospital Nursing Scam ACB Called Ward Boy For Investigation

अलवर ईएसआइसी नर्सिंग घोटाला: वार्ड ब्वॉय के पास रहती थी भर्ती की फाइल, पत्नी सहित परिचितों को भर्ती कराया, अभ्यर्थियों से पैसे लिए

अलवर. ईएसआइसी मेडिकल कॉलेज व अस्पताल भर्ती में जरा भी पारदर्शिता नहीं बरती गई। यह पूरी भर्ती कुछ चुनिंदा लोगों की मनमर्जी से की गई। यहां भर्ती की फाइल एक वार्ड ब्वॉय को सौंपी गई, जो कि एसीबी को उसके कमरे से मिली। एमजे सोलंकी कम्पनी के फील्ड इंचार्ज भी वार्ड ब्वाय संपर्क में रहता था। ईएसआइसी प्रशासन की ओर से अभ्यर्थियों की भर्ती में इसी की भूमिका अहम थी। इस वार्ड ब्वाय को ईएसआइसी अस्पताल के एक सहायक निदेशक का भी संरक्षण प्राप्त था। उसी के चलते वह कम्पनी के फील्ड इंचार्ज के संपर्क में रहता था। भर्ती प्रक्रिया में वार्ड ब्वॉय की अहम भूमिका के चलते एसीबी ने मंगलवार को उसको पूछताछ के लिए जयपुर बुलाया। इसके मोबाइल डेटा को भी एसीबी ने अपने कब्जे में ले लिया।

पत्नी सहित परिवारजनों को भर्ती करवाया

इस वार्ड ब्वाय ने ईएसआइसी अस्पताल में पत्नी, भाई व एक अन्य रिश्तेदार को भी भर्ती कराया। अपनी पत्नी को डेटा एंट्री ऑपरेटर पद पर भर्ती कराया और रजिस्ट्रेशन काउंटर पर उसकी ड्यूटी भी लगवा दी। वहीं परिचित रिश्तेदारों को एमआर तकनीशियन और नर्सिंग ऑर्डरली (वार्ड ब्वॉय) के पद पर भी भर्ती करवा दिया।

इस वार्ड ब्वाय के सरकारी क्वार्टर पर एसीबी ने 17 जून की रात को एक बजे छापा मारा। जिसमें इस टेंडर से संबधित अन्य दस्तावेज जब्त किए। वार्ड ब्वाय होने के बावजूद इसको सामान्य शाखा जैसे महत्वपूर्ण और विशेष दर्जा वाली शाखा का दायित्व सौंपा हुआ था, जिसमें रहते हुए इसने पिछले 2 साल से लगभग 1 करोड़ की खरीदारी अस्पताल के लिए की है।

भर्ती हुए नर्सिंगकर्मियों ने माना, जनप्रतिनिधियों की सिफारिश से लगे हैं

भर्ती में कहीं भी पारदर्शिता नहीं बरती गई। विभिन्न पदों पर परिजन या जानकर भर्ती हुए या फिर जनप्रतिनिधियों की शिफारिश से। भर्ती हुए अभ्यर्थियों ने स्वीकार किया कि उन्हें भर्ती कराने के लिए जनप्रतिनिधियों ने शिफारिश की। वहीं अधिकतर अभ्यर्थियों को पैसे लेकर भर्ती किया गया। जिसकी राशि एसीबी ने जब्त की और आरोपियों को गिरफ्तार किया। संविदा पर हुई पहली भर्ती में ही धांधली से ईएसआइसी अस्पताल की छवि धूमिल कर दी गई।