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अलवर की शान,अलवर का अभिमान,बाला किला महल खतम होने के कगार पर, जाने क्या है कारण और कौन है जिम्मेदार

बाला किला :
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अलवर

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Prem Pathak

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Updated: 28 Jun 2018, 9:13 AM IST

Alwar : famous historical palace bala quila

अलवर की शान,अलवर का अभिमान,बाला किला महल खतम होने के कगार पर, जाने क्या है कारण और कौन है जिम्मेदार

अलवर राज्य की स्थापना का साक्षी रहा ऐतिहासिक बाला किला इन दिनों अपनी बदसूरती पर आंसू बहाने को मजबूर है। पूर्व शासक राव राजा प्रतापसिंह ने 25 नवम्बर 1775 को बाला किला पर झंडा फहरा कर अलवर राज्य की स्थापना कर राज्य का क्षेत्र बढ़ाया। पूर्व रियासतकाल के दौर एवं आजादी के बाद अलवर ने विकास की कई ऊंचाइयों को छूआ, अलवर राज्य की स्थापना के साक्षी रहे बाला किला को भुला दिया गया। यही कारण रहा कि अपने निर्माणकाल के दौर के बाद बाला किला के विकास की न तो पुख्ता योजना बन पाई और न ही सरकारी तंत्र का इस ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण की ओर ध्यान जा सका।

नतीजा यह रहा कि यह ऐतिहासिक विरासत अभी जरा सी बारिश या तूफान में भरभराकर गिरने की स्थिति में पहुंच गई है। पिछले दिनों दो मई जिले भर में तूफान ने जानमाल व विरासत को भारी नुकसान पहुंचाया। कभी दुश्मन राज्यों की तोपों की गरज के सामने भी सीना तान खड़े रहने वाला बाला किला, तूफान की जरा सी हवा से ही भरभराकर गिरने लगा। तूफान के दौरान इस ऐतिहासिक विरासत बाला किला की दीवारों में दरार आ गई तो मुंढेर पर लगी जालियां भी धराशायी हो गई। प्रशासन भले ही तूफान में मरे व घायल लोगों व पशुओं को मुआवजा देकर अपने दायित्व को पूर्ण समझ बैठा, लेकिन अलवर की स्थापना के प्रतीक बाला किला की मिटती याद और दरकती दीवारों की सुध लेने की सरकारी तंत्र को फुर्सत ही नहीं मिल पाई। सरकारी अनदेखी का नतीजा यह रहा कि मानसून के पूरे यौवन पर आने से पहले ही थोड़ी बारिश से ऐतिहासिक बाला किला के छज्जे टूटकर गिरने लगे तो कही जालियां ध्वस्त होती नजर आई। इतना ही नहीं कभी देश दुनियां के लिए आकर्षण का केन्द्र रहा बाला किला अब पर्यटकों को दुर्घटना का निमंत्रण देता दिखाई पड़ता है। सरकारी तंत्र ने बाला किला को जिले के प्रमुख पर्यटक स्थलों में शुमार किया, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने कभी उसकी सुध नहीं ली, तभी तो पिछले दिनों हुई हल्की सी बारिश में सरकार की ओर से बाला किला की छत पर कराए गए निर्माण कार्य के उखड़ कर सरकारी तंत्र की पोल खोलता दिखाई दिया। अलवर के ऐतिहासिक विरासत बाला किला की मिटती यादों को कैमरे में कैद किया पत्रिका फोटो जर्नलिस्ट नरेश लवानिया ने।