
Rajasthan News: बहरोड़ में प्रशासनिक अधिकारियों की अनदेखी के चलते भू-माफिया कृषि भूमि पर कॉलोनियां काटकर बेरोकटोक बेच रहे हैं। हाईवे, स्टेट हाईवे के आसपास और नगर परिषद, ग्राम पंचायत व बीडा क्षेत्र में बिना भू-रूपांतरण व एनओसी के कॉलोनियां काटने का खेल चल रहा है।
राज्य सरकार को हर साल करोड़ों रुपए का राजस्व नुकसान हो रहा है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी अनदेखी कर रहे हैं। कृषि भूमि पर कॉलोनी विकसित करने के लिए बीडा, तहसीलदार, एसडीएम व जिला कलक्टर की अनुमति और भूमि की किस्म परिवर्तन जरूरी है। लेकिन, क्षेत्र में कट रही एक भी कॉलोनी को कॉलोनाइजर ने कन्वर्ट नहीं करवाया है।
बगैर भू-रूपांतरण के कॉलोनी में बिजली, पानी कनेक्शन और अन्य मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलती हैं। फिर भी कॉलोनाइजर धड़ल्ले से अवैध कॉलोनियां काट रहे हैं। कॉलोनी काटने के दौरान कॉलोनाइजर लोगों को विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध करवाने के वादे करते हैं, लेकिन भूखंड बिकने के बाद लोगों को नजर तक नहीं आते हैं।
कॉलोनाइजर कृषि भूमि का भू-रूपांतरण करवा कर 60 प्रतिशत हिस्से में ही कॉलोनी विकसित कर सकते हैं। बाकी 40 प्रतिशत हिस्से में सुविधाएं विकसित करनी होती हैं। लेकिन, बहरोड़ में कॉलोनाइजर नियमों को ताक पर रखकर 80-90 प्रतिशत हिस्से में कॉलोनी विकसित कर रहे हैं।
कॉलोनी विकसित करने के लिए कॉलोनाइजर को नगर परिषद या सम्बंधित ग्राम पंचायत, पीडब्ल्यूडी, जलदाय विभाग, एनसीआर बोर्ड, बीडा, विद्युत निगम, राजस्व विभाग सहित अन्य विभागों से एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) लेना होता है। लेकिन, बहरोड़ में एक-आध कॉलोनाइजर ही यह अनुमतियां लेकर कॉलोनी विकसित कर रहे हैं।
अवैध कॉलोनियों में प्लॉट खरीद कर मकान बनाने वालों को बैंकों से ऋण नहीं मिल पाता है। क्योंकि इन कॉलोनियों के बीडा, ग्राम पंचायत व नगर परिषद की ओर से भूखंड के पट्टे जारी नहीं किए जाते हैं। जिसके कारण लोग राज्य सरकार की ओर से राहत व छूट दिए जाने का वर्षों तक इंतजार करते रहते हैं।
कृषि भूमि पर कॉलोनी विकसित करने के लिए जमीन कन्वर्जन के लिए सम्बंधित कॉलोनाइजर को बीडा, नगर परिषद, ग्राम पंचायत या फिर राजस्व विभाग को जमीन की डीएलसी दर का 7.5 प्रतिशत राजस्व जमा करवाना होता है। इसके बाद कॉलोनी के लिए जमीन रूपांतरण का कार्य होता है और अन्य विभाग कॉलोनी विकसित करने के लिए एनओसी जारी करते हैं।
बगैर भू-रूपांतरण के विकसित की गई कॉलोनियों को राजस्व विभाग के अधिकारी सिवायचक घोषित करवा सकते हैं। इसके लिए तहसीलदार के माध्यम से एसडीएम कोर्ट में प्रकरण दर्ज करवाया जाता है। इसके बाद एसडीएम जमीन को सिवायचक घोषित कर सकते हैं। इसके लिए पिछले वर्ष मई माह में तहसीलदार बहरोड़ की ओर से 25 अवैध कॉलोनियां चिन्हित कर एसडीएम कोर्ट में प्रकरण दर्ज करवाने के लिए प्रस्ताव भेजे थे। लेकिन, आज तक एक भी कॉलोनी को अधिकारी सिवायचक घोषित नहीं करवा पाए हैं।
बहरोड़ शहर हाईवे, स्टेट हाईवे के पास, झारोड़ा, नारेड़ा, बहरोड़ तर्फ गंगाबिशन, बहरोड़ तर्फ बलराम, बहरोड़ तर्फ डूंगरसी, बहरोड़ तर्फ नैनसुख, बर्डोद, नालपुर, कारोडा, मांचल, कांकरदोपा, तसींग, जयसिंहपुरा, मुंडियाखेड़ा, नासरपुर में सबसे अधिक अवैध कॉलोनियां स्थित हैं।
राजस्व विभाग, बीडा, नगर परिषद के अधिकारी अवैध कॉलोनियों के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर सिर्फ नोटिस जारी करते हैं और उसके बाद नोटिस फाइलों में बंद कर दिए जाते हैं।
अवैध कॉलोनियों को लेकर तहसीलदार, एसडीएम को अधिक से अधिक प्रकरण दर्ज करने के लिए निर्देश दे रखे हैं। इसके साथ ही बीडा को भी कार्रवाई करने के लिए पत्र लिखा गया है।- ओपी सहारण, एडीएम कोटपूतली बहरोड़
बहरोड़ क्षेत्र में कट रही अवैध कॉलोनियों को लेकर कार्रवाई की जाएगी। ताकि राज्य सरकार को राजस्व का नुकसान नहीं हो।- राजेश यादव, सहायक अभियंता बीडा
Updated on:
13 Jan 2025 12:36 pm
Published on:
13 Jan 2025 12:33 pm
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