
अलवर के Law College में चरम पर भ्रष्टाचार! फर्जीवाड़े से दे रहे प्रवेश, RTI के जवाब में कहा कि दस्तावेजों को दीमक खा गए
अलवर. राजकीय स्नातकोत्तर विधि महाविद्यालय अलवर के दाखिलों में भ्रष्टाचार की दीमक लगी है। विधि महाविद्यालय में भ्रष्टाचार कर फर्जी तरीके से प्रवेश देने का एक मामला सामने आया है। सत्र 2015-16 में महाविद्यालय प्रशासन ने फर्जी अंकतालिका के जरिए एक विद्यार्थी को एल.एल.बी में प्रवेश दे दिया, यह कारगुजारी सामने आने के बाद जब विवेकानंद नगर निवासी एडवोकेट महेश शर्मा ने आरटीआई के जरिए वर्ष 2015-16 की कट ऑफ लिस्ट और आवेदन पत्रों की जानकारी मांगी तो विश्वविद्यालय प्रशासन ने आरटीआई के जवाब में एक कार्यालय आदेश दिया जिसमें लिखा कि सत्र 2013-14 से लेकर 2016-17 के आवेदन पत्रों को दीमक ने खाकर नष्ट कर दिया।
इस कारण उक्त रेकॉर्ड को जलाकर नष्ट करने की अनुमति दी गई है। दरअसल, विधि महाविद्यालय में सत्र 2014-15 में विवेकानंद नगर निवासी वीरेन्द्र कुमार शर्मा उर्फ बिट्टू पंडित पुत्र मुकेश चंद शर्मा ने प्रवेश के लिए आवेदन किया।
वीरेन्द्र शर्मा के बी.ए. में 54.27 प्रतिशत अंक थे, लेकिन कट ऑफ अधिक जाने के कारण वीरेन्द्र का प्रवेश नहीं हो सका। अगले वर्ष 2015-16 में वीरेन्द्र शर्मा ने फिर प्रवेश के लिए कॉलेज में आवेदन किया और इस बार आवेदन पत्र में उन्होंने बी.ए. की अंकतालिका में 62 प्रतिशत दर्शाया, जिससे उन्हें कॉलेज में विधि प्रथम वर्ष में प्रवेश मिल गया। इस मामले में वीरेन्द्र शर्मा से बात की तो उन्होंने कहा कि मुझे याद नहीं है कि मैंने विधि महाविद्यालय में प्रवेश कब लिया था। सवाल ये है कि महाविद्यालय ने बिना दास्तावेजों की जांच कर प्रवेश दे दिया, या फिर जानबूझकर यह कारगुजारी की गई। आशंका तो यह है कि विधि महाविद्यालय में इस तरह कई विद्यार्थियों को फर्जी तरीके से प्रवेश दिया गया है।
आरटीआई के जरिए जानकारी मांगी तो जवाब मिला-दीमक खा गई
महाविद्यालय प्रशासन का प्रवेश में गड़बड़झाला सामने आने के बाद महेश शर्मा की ओर से आरटीआई के जरिए उक्त वर्ष की कट ऑफ और प्रवेश सबंधी दास्तावेजों का निरीक्षण करने के लिए आवेदन किया तो पहले महाविद्यालय प्रशासन ने आरटीआई आवेदक को इसकी अनुमति दे दी। जब आवेदक महाविद्यालय पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि कई दस्तावेज जलाकर नष्ट कर दिए हैं।
आरटीआई के जवाब में दस्तावेज नष्ट करने का दिया गया कार्यालय आदेश भी कूटरचित तरीके से गलत बना दिया गया। एक कार्यालय आदेश को दो बार तैयार किया गया। इस कार्यालय आदेश में वर्ष 19 के क्रमांक में 2018 की तारीख लिख दी गई। एक ही कार्यालय आदेश का क्रमांक अलग-अलग लिखा गया। दोनों आदेशों में तत्कालीन प्राचार्य सतीश यादव के हस्ताक्षर की लिखावट भी अलग-अलग है।
महाविद्यालय के पास कट ऑफ सूची ही उपलब्ध नहींआरटीआई में आवेदक ने विधि स्नातक 2015-16 की कट ऑफ सूची, छात्र वीरेन्द्र शर्मा को प्रवेश देने का आधार, प्रवेश फॉर्म आदि की प्रतिलिपि मांगी तो विश्वविद्यालय ने केवल इतना जवाब दिया कि प्रवेश मेरिट के आधार पर दिया है। इसके अलावा विद्यार्थी से जुड़े अन्य दस्तावेज, कट ऑफ सूची नहीं होने का हवाला दिया गया। जबकि आरटीआई एक्ट 2005 की धारा 4 के तहत सार्वजनिक सूचना उपलब्ध होनी चाहिए। अजमेर और सीकर विधि महाविद्यालय से कट ऑफ सूची मांगी गई तो वहां से यह जानकारी आसानी से उपलब्ध हो गई।
पुनर्मूल्यांकन में भी गड़बड़
छात्र वीरेन्द्र शर्मा के प्रवेश में ही नही, परीक्षा परिणाम में भी अनियमितता बरती गई। वीरेन्द्र शर्मा के एलएलबी फाइनल इयर में एक विषय में 100 में से 1 अंक आया, जब पुनर्मूल्यांकन किया गया तो उस विषय में 43 अंक हो गए। नियमानुसार पुनर्मूल्यांकन में 20 से अधिक अंक बढऩे पर उक्त विद्यार्थी का अलग से परिणाम जारी होता है, एक कमेटी इसका अवलोकन करती है, लेकिन वीरेन्द्र शर्मा का परिणाम भी अन्य विद्यार्थियों के साथ जारी कर दिया गया।
प्राचार्य का फोन बंद
इस मामले में विधि महाविद्यालय के प्राचार्य अनिल जेफ का पक्ष जानने के लिए उन्हें कई बार फोन किए गए, लेकिन उनका फोन बंद मिला।
मैं अक्टूबर 2018 में सेवानिवृत हो गया था, अगर वर्ष 2019 में मेरे हस्ताक्षर से कार्यालय आदेश तैयार किया गया है तो यह सही नहीं है। सोमवार को महाविद्यालय में जाकर इसकी जानकारी करता हूं।
सतीश यादव, सेवानिवृत प्राचार्य, विधि महाविद्यालय
दिखवाकर करते हैं कार्रवाई
किसी भी विद्यार्थी के इतने अंक एक साथ बढ़ जाना चौंकाने वाला है। इस मामले पर अवश्य संज्ञान लिया जाएगा, अगर गड़बड़ी मिलती है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
-शैलेन्द्र भाटी, परीक्षा नियंत्रक, मत्स्य विश्वविद्यालय
Published on:
10 Feb 2020 12:10 pm
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