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अलवर की विरासत…विनय विलास, अब राजर्षि महाविद्यालय विद्यार्थियों को बांट रहा ज्ञान

पूर्व शासक विनय सिंह ने 1840-45 के बीच अलवर में विनय विलास का निर्माण कराया था। शुरुआती दौर में यहां पूर्व अलवर रियासत के शासक रहे विनय सिह, बाद में मंगल सिंह और अंत में सवाई जयसिंह इस महल में रहे।

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Lubhavan Joshi

Oct 11, 2020

अलवर. कभी अलवर की पूर्व रियासत का आलीशान महल विनय विलास अब अलवर जिला ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों के विद्यार्थियों को भी ज्ञान बांटने का प्रमुख स्रोत बन चुका है। पूर्व शासक विनय सिंह ने 1840-45 के बीच अलवर में विनय विलास का निर्माण कराया था। शुरुआती दौर में यहां पूर्व अलवर रियासत के शासक रहे विनय सिह, बाद में मंगल सिंह और अंत में सवाई जयसिंह इस महल में रहे। बाद में पूर्व शासक जयसिंह ने वर्ष 1930 में इस महल को इंटर कॉलेज संचालन के लिए दे दिया, तभी से यहां कॉलेज संचालित है। पहले राजर्षि महाविद्यालय का संचालन शुरू हुआ, फिर कला व विधि कॉलेज के भवन दूसरे स्थान पर बनने से दोनों कॉलेज नए भवनों में शिफ्ट हो गए। लेकिन राजर्षि महाविद्यालय व कॉमर्स कॉलेज अभी पूर्व के विनय विलास महल परिसर में ही संचालित है।

अलवर की पूर्व रियासत से जुड़े नरेन्द्र सिंह राठौड़ बताते हैं कि विनय विलास (अब राजर्षि कॉलेज) परिसर के मध्य में बना संगमरमर का टैंकनुमा स्वीमिंग पुल बेजोड़ कारीगरी का अनूठा नमूना है। टैंक के बीच में प्लेट फार्म अब भी कायम है, जो कि पूर्व रियासतकाल की याद ताजा कर जाता है। यहां से पूर्व शासक स्वीमिंग पुल में स्नान करने के लिए छंलाग लगाते थे।

वहीं वर्तमान कॉलेज परिसर दांई और प्रयोगशाला के पास महिलाओं के स्नान के लिए स्वीमिंग पुल था, जिसके चारों ओर बने परकोटे अब भी यहां की सुरक्षा व्यवस्था को बयां करते दिखाई पड़ते हैं। वहीं विनय विलास का प्लेट फार्म जहां पूर्व शासक जयसिंह की बारात चढ़ाई के दौरान गन सैल्यूट दिया जाता था। आज भी अपनी पहचान को बरकरार रखे हुए है। इसी परिसर में करीब 200 बीघा में एक उद्यान था जो कि पूर्व रियासत के वीआइपी लोगों के घूमने के काम आता था। यहां आम, संतरा, आंवला समेत कई फलों के पौधे लगे थे, जिनके अब तक कई शहरवासी साक्षी हैं।