
बदलाव के दावों के बीच कार्यकारी को ही कांग्रेस ने बनाया जिलाध्यक्ष
अलवर. बदलाव के दावों के बीच कार्यकारी पर ही कांग्रेस ने दांव खेला है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से योगेश मिश्रा को कांगे्रस का अलवर जिले का अध्यक्ष घोषित किया गया है। इससे पूर्व मिश्रा गत विधानसभा चुनाव के दौरान से ही कांग्रेस के कार्यकारी जिलाध्यक्ष दायित्व निभाते रहे हैं। इससे पूर्व वर्ष 2016 में टीकाराम जूली को कांग्रेस का जिलाध्यक्ष घोषित किया गया था। राज्य सरकार में मंत्री बनने के बाद कांग्रेस कार्यालय के भूमि पूजन के दौरान उन्होंने पार्टी के जिलाध्यक्ष पद छोडऩे की पेशकश की थी, लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की ओर से उन्हें मंत्री पद के साथ ही जिलाध्यक्ष पद का दायित्व भी संभालने को कहा गया था। तभी से योगेश मिश्रा ही कार्यकारी के रूप से जिलाध्यक्ष का दायित्व संभालते आ रहे थे।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष की घोषणा का लंबे समय से कार्यकर्ताओं को इंतजार था। पूर्व में जिलाध्यक्ष पद के लिए कांग्रेस के जिला प्रभारी सचिव जसवंत गुर्जर को जिले में कांग्रेस के 8 से 10 कार्यकर्ताओं ने जिलाध्यक्ष पद के लिए नाम भी दिए थे। पार्टी की ओर से सभी नामों पर विचार किया गया। इनमें शामिल कांग्रेस के दो तीन वरिष्ठ नेताओं के नामों पर अंतिम समय तक विचार हुआ। बाद में योगेश मिश्रा के नाम पर पार्टी की मुहर लगी।
सोशल इंजीनियरिंग में पड़े भारी
कांग्रेस जिलाध्यक्ष पद पर योगेश मिश्रा के नाम की घोषणा में सोशल इंजीनियरिंग का बड़ा रोल रहा। हालांकि पार्टी में अल्पसंख्यक, यादव, अनुसूचित जाति, जाट व अन्य वर्गों के दावेदारों के नामों पर भी विचार किया गया। लेकिन अन्य वर्ग को पार्टी की ओर से कहीं न कहीं प्रतिनिधित्व दिए जाने के कारण ब्राह्मण को जिलाध्यक्ष पद के लिए तरजीह दी गई।
कई वरिष्ठ नेताओं के नामों पर भी हुआ विचार
पार्टी सूत्रों के अनुसार जिलाध्यक्ष पद के लिए कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं के नामों पर भी विचार किया गया। इनमें पूर्व मंत्री दुर्रूमियां, पूर्व विधायक पं. कृष्णमुरारी गंगावत, पूर्व प्रदेश सचिव अजीत यादव, युवा कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष बलराम यादव सहित कई अन्य वरिष्ठ एवं युवा नेताओं के नामों पर भी विचार हुआ।
नए जिलाध्यक्ष के लिए चुनौतियां कम नहीं
नव नियुक्त जिलाध्यक्ष योगेश मिश्रा के समक्ष चुनौतियां कम नहीं है। सबसे बड़ी चुनौती आगामी विधानसभा चुनाव, लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को विजय दिलाना है। इससे पूर्व पार्टी कार्यकर्ताओं को संगठन में उचित प्रतिनिधित्व देते हुए छोटी कार्यकारणी का गठन तथा तात्कालिक चुनौती नगर परिषद में कांग्रेसी सभापति के रिश्वत लेते पकड़े जाने के बाद नए सभापति का मनोनयन कर पार्टी की धूमिल हुई छवि को फिर से निखारना है। वहीं नगर परिषद में कांग्रेस के पार्षदों में सामंजस्य बिठाना भी चुनौती रहेगी।
Published on:
02 Dec 2021 12:49 am
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