
जिला कलक्टर ने फर्जी शस्त्र लाइसेंस प्रकरण की जांच एडीएम प्रथम की अध्यक्षता में कमेटी को सौंपी
अलवर. कलक्टर कार्यालय में बाबू व संविदा पर लगे कम्प्यूटर सहायक की ओर से फर्जी शस्त्र लाइसेंस बनाने की करतूत की जांच जिला कलक्टर इंद्रजीत सिंह ने अतिरिक्त जिला कलक्टर प्रथम रामचरण शर्मा की अध्यक्षता में गठित पांच सदस्यीय जांच समिति को सौंपी है। समिति फर्जीवाड़े के मामले की जांच कर रिपोर्ट जिला कलक्टर को सौंपेंगी। फर्जी शस्त्र लाइसेंस बनाने के मामले की अतिरिक्त जिला कलक्टर शहर उत्तमङ्क्षसह शेखावत ने रविवार को सरकारी बाबू व संविदाकर्मी कम्प्यूटर सहायक के खिलाफ शहर कोतवाली में एफआइआर दर्ज कराई है।
कलक्टर कार्यालय में जिला कलक्टर की मोहर का गलत तरीके से उपयोग एवं फर्जी हस्ताक्षर कर शस्त्र लाइसेंस बनाने के खेल का पर्दाफाश तब हुआ जब अतिरिक्त जिला कलक्टर शहर जिले में बनाए गए शस्त्र लाइसेंस प्रकरणों की जांच कर रहे थे। जांच के दौरान कुछ शस्त्र लाइसेंस पर शक हुआ तो फोन कर फर्जी तरीके से लाइसेंस बनवाने वालों को बुलवाया गया, उनके शस्त्र लाइसेंस के कागजात आदि की जांच की गई तो वे फर्जी मिले।
बाबू की आईडी और मास्टर माइंड संविदाकर्मी
कलक्ट्रेट में चर्चा रही कि फर्जी तरीके से शस्त्र लाइसेंस बनाने के कार्य में आईडी कलक्टर कार्यालय में कार्यरत बाबू दुर्गेश चौहान का उपयोग किया गया तथा इस फर्जीवाड़े का मास्टर माइंड संविदाकर्मी कम्प्यूटर सहायक सुनील अरोड़ा रहा।अतिरिक्त जिला कलक्टर शहर ने प्रारंभिक तौर पर दोनों को फर्जीवाड़े का दोषी मान उनके खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई है।
शस्त्र लाइसेंस प्रकरणों की जांच होगी
फर्जीवाडा उजागर होने के बाद अब कलक्टर कार्यालय से पिछले दिनों जारी किए गए सभी शस्त्र लाइसेंसों की पत्रावली की जांच की जाएगी। अतिरिक्त जिला कलक्टर प्रथम की अध्यक्षता में गठित कमेटी इन पत्रावली की जांच कर विधिक प्रक्रिया से जारी शस्त्र लाइसेंस व फर्जी लाइसेंस प्रकरणों का पता लगाएगी। कमेटी में डीआइओ एनआइसी सत्येन्द्र सिंह, आइटी के राकेश कुमार भाटिया, जिला कोषाधिकारी ऋतु जैन, डीएलआर सुभावन खां को शामिल किया गया है।
बाबू निलम्बित, संविदाकर्मी की सेवा भी खत्म
शस्त्र लाइसेंस बनाने में फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद जिला कलक्टर ने प्रकरण में लिप्त बाबू दुर्गेश चौला को निलम्बित कर दिया है, वहीं इस फर्जीवाडे में लिप्त संविदाकर्मी कम्प्यूटर सहायक की सेवाएं भी समाप्त मानी जा रही है। प्रकरण उजागर होने के बाद से संविदाकर्मी कम्प्यूटर सहायक कार्यालय से गायब है।
नवीनीकरण में फर्जीवाडे की आशंका कम
अधिकारियों का मानना है कि फर्जीवाडे के प्रकरण में लिप्त रहे दोनों आरोपियों की ओर से फर्जी तरीके से शस्त्र लाइसेंस बनाने की बात सामने आई है, लेकिन शस्त्र नवीनीकरण में भी फर्जीवाडे की आशंका कम है। जांच के दौरान फर्जीवाड़े के प्रकरण में आरोपियों की ओर से भ्रष्टाचार करने की बात भी उजागर होने की संभावना जताई गई है। जानकारों का मानना है कि इस प्रकरण में दोषियों की ओर से भ्रष्टाचार करने की बात पुष्ट होने पर मामला एसीबी को भी भेजा जा सकता है।
यह था शस्त्र लाइसेंस फर्जीवाड़ा प्रकरण
शहर कोतवाली में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार जिला कलक्टर कार्यालय के लिपिक दुर्गेश चौला और संविदाकर्मी कम्प्यूटर ऑपरेटर सुशील अरोड़ा ने जिला कलक्टर की मुहर लगा और फर्जी हस्ताक्षर कर शहर के विवेकानंद नगर सेक्टर-4 निवासी संतोष मीणा पुत्र लल्लूराम मीणा तथा कोटकासिम तहसील के गांव पुर निवासी गोविंद सिंह पुत्र दानसिंह और उत्तमसिंह पुत्र भगवान सिंह को फर्जी आम्र्स लाइसेंस जारी कर दिए।
अभी गिरफ्तारी नहीं
फर्जी तरीके से शस्त्र लाइसेंस जारी करने की एफआइआर शहर कोतवाली में दर्ज कराने के बाद सोमवार को आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। पुलिस का कहना है कि इस मामले में अभी अनुसंधान किया जा रहा है।
अनुसंधान जारी
फर्जी लाइसेंस जारी करने के मामले में पुलिस की ओर से अनुसंधान जारी है फिलहाल इस मामले में अभी कोई गिरफ्तारी नहीं की गई है।
-अध्यात्म गौतम, शहर कोतवाल, अलवर।
Published on:
23 Jun 2020 12:04 am
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