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प्रत्याशी पहुंचे बागियों के द्वार, मनुहार कर दी रिश्तों की दुहाई

अलवर. जिले की छह नगर पालिकाओं के चुनाव में नामांकन दाखिल करने की समय सीमा खत्म होने के साथ ही सिम्बल वाले प्रत्याशियों ने अब बागियों के द्वार पहुंचना शुरू कर दिया है। प्रत्याशी बागी व अन्य निर्दलीय प्रत्याशियों को चुनाव मैदान से हटाने के लिए प्रत्याशी बागियों को रिश्तों की दुहाई दे रहे हैं तथा आगे साथ मिलकर कार्य करने की मिन्नतें कर रहे हैं।

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अलवर

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Prem Pathak

Nov 28, 2020

प्रत्याशी पहुंचे बागियों के द्वार, मनुहार कर दी रिश्तों की दुहाई

प्रत्याशी पहुंचे बागियों के द्वार, मनुहार कर दी रिश्तों की दुहाई

अलवर. जिले की छह नगर पालिकाओं के चुनाव में नामांकन दाखिल करने की समय सीमा खत्म होने के साथ ही सिम्बल वाले प्रत्याशियों ने अब बागियों के द्वार पहुंचना शुरू कर दिया है। प्रत्याशी बागी व अन्य निर्दलीय प्रत्याशियों को चुनाव मैदान से हटाने के लिए प्रत्याशी बागियों को रिश्तों की दुहाई दे रहे हैं तथा आगे साथ मिलकर कार्य करने की मिन्नतें कर रहे हैं। हालांकि बागियों को बिठाने के लिए कांग्रेस व भाजपा के बड़े नेता अभी ज्यादा सक्रिय नहीं हुए हैं, लेकिन आगामी एक-दो दिनों प्रमुख पार्टियों के बड़े नेताओं को भी बागियों को चुनाव मैदान से हटाने की जिम्मेदारी सौंपी जाने की उम्मीद है।

नगर पालिका चुनाव में आगामी 3 दिसम्बर तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। नाम वापसी में कम समय देख पालिका चुनाव लड़ रहे ज्यादातर प्रत्याशियों ने अपनी चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। प्रमुख पार्टियों के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती अपनी ही पार्टी के उन बागी प्रत्याशियों को बिठाना है, जो कुछ दिन पहले तक उनके साथ ही टिकट की कतार में लगे थे, लेकिन टिकट लेने में विफल होने के बाद भी चुनाव मैदान में डटे हैं। हालांकि यह समस्या दोनों ही प्रमुख पार्टियों की है, लेकिन कांग्रेस में टिकट के दावेदार ज्यादा होने के कारण अब खतरा पार्टी के सामने बगावत का खतरा भी बड़ा है। वहीं भाजपा टिकट के कई दावेदार भी चुनावी रण में अभी ताल ठोक रहे हैं।

अभी प्रत्याशियों को ही भेजा मनुहार करने

प्रमुख पार्टियों की चुनावी रणनीति के तहत शनिवार को प्रत्याशियों को ही बागियों के पास मनुहार करने के लिए भेजा गया है। पार्टियों के बड़े नेता अभी इससे दूर हैं। इसका कारण है कि टिकट नहीं मिलने से सबसे ज्यादा नाराजगी बागियों की सिम्बल वाले प्रत्याशियों से है। पार्टियों के चुनाव रणनीतिकारों का मानना है कि पार्टी का अधिकृत प्रत्याशी के जाने से कई बागियों की नाराजगी दूर हो सकती है। इस कारण पहले अधिकृत प्रत्याशियों को ही इस कार्य में लगाया जाए। अभी एक-दो दिन कुछ ऐसे प्रयास दिखाई देने की उम्मीद है।

बड़े नेता आखिरी दांव लगाएंगे

कांग्रेस व भाजपा के चुनाव रणनीतिकारों का मानना है कि नाम वापसी से पूर्व बड़े नेताओं को भी बागियों को चुनाव मैदान से हटाने की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। इनमें कांग्रेस की ओर से विधायकों व विधानसभा चुनाव में पार्टी के प्रत्याशियों के साथ ही जिला व ब्लॉक स्तर के नेताओं को यह जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। इसके अलावा जिले के मंत्री व पार्टी के राष्ट्रीय स्तर के नेताओं का उपयोग इस कार्य में किया जाएगा। भाजपा की ओर से ब्लॉक से लेकर जिला स्तर के बड़े नेताओं, पदाधिकारियों को यह जिम्मेदारी सौंपी जाने की उम्मीद है। इस कार्य में प्रदेश नेताओं व पदाधिकारियों का भी सहयोग लेने की योजना है।