
अलवर ही नहीं, अब पूरे प्रदेश में बंद होंगी सरकारी प्रेस
अलवर. राज्य सरकार की ओर से अब जयपुर को छोड़ शेष जिलों में संचालित सरकारी प्रेस बंद होंगी। अलवर जिले में सरकार पहले ही सरकारी प्रेस पर ताला लगा चुकी है। यह जानकारी मंगलवार को विधानसभा में शहर विधायक संजय शर्मा की ओर से पूछे गए सवाल के जवाब में राजस्व मंत्री ने दी।
शहर विधायक शर्मा के सवाल जवाब में राजस्व मंत्री ने बताया कि राज्य सराकर ने 20 जनवरी को राजकीय मुद्रणालय को बंद कर दिया। सरकार ने यह निर्णय राजस्व आय के खिलाफ ज्यादा व्यय होने के कारण किया। उन्होंने बताया कि प्रदेश में तीन जिले जयपुर, जोधपुर व उदयपुर में राजकीय मुद्रणालय संचालित हैं।
आय से कई गुना ज्यादा खर्च, बंद होने की यही वजह
अलवर सहित प्रदेश में अन्य स्थानों पर राजकीय मुद्रणालय बंद करने का कारण इनसे होने वाली आय से कई गुना ज्यादा खर्चा होना है। राजस्व मंत्री ने बताया कि अलवर, उदयपुर, जोधपुर व जयपुर में वर्ष 2017-18 में 223.92 लाख रुपए का खर्च हुआ और इनसे आय केवल 27.75 लाख रुपए, यानि 196.17 लाख रुपए का सरकार को घाटा हुआ। इसी प्रकार 2018-19 में राशि खर्च हुई 245.74 लाख रुपए और आय हुई केवल 57.76 लाख ही, यानि सरकार को 187.98 लाख रुपए का घाटा हुआ। वहीं 2019-20 में खर्चा आया 198.43 लाख और आय हुई 19.64 लाख, यानि 178.79 लाख रुपए का घाटा हुआ, 2020-21 में राजकीय मुद्रणालय में 175.87 लाख रुपए और आय हुई 17.23 लाख रुपए की। यानि सरकार को घाटा हुआ 158.64 लाख रुपए का। यह राशि भी केवल तनख्वाह में ही खर्च हुई।
ऑनलाइन सिस्टम के बाद नगण्य रहा काम
विधानसभा में राजस्व मंत्री ने बताया कि यतीन्द्र सिंह की अध्यक्षता वाली कमेटी की सिफारिश पर ये सरकारी प्रेस बंद करने का निर्णय किया गया है। समिति की रिपोर्ट में बताया कि ये राजकीय मुद्रणालय वर्ष 1964 के बाद से बने हैं, उस समय विधानसभा सहित सारे काम इन मुद्रणालयों मे होते थे। अब ऑनलाइन सिस्टम आने के कारण इनमें नाम मात्र का काय रह गया है। इसलिए ही अलवर, बीकानेर की सरकारी प्रेसों को बंद किया गया। इस रिपोर्ट के आधार पर जयपुर को छोड़ अन्य राजकीय मुद्रणालय भी बंद होंगे।
Published on:
22 Mar 2022 11:38 pm
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