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भारत छोड़ो आंदोलन की जन क्रांति में रहा अलवर का योगदान

अलवर 1938 -1939 ई. में छात्र फीस माफी आंदोलन हुआ जिसमें पं. हरिनारायण शर्मा, लक्ष्मण स्वरूप त्रिपाठी, इंदर सिंह आजाद, नत्थू राम मोदी, राधा चरण गुप्ता टप्पल वालों को सजा दी गई ।

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अलवर

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Prem Pathak

Aug 08, 2020

भारत छोड़ो आंदोलन की जन क्रांति में रहा अलवर का योगदान

भारत छोड़ो आंदोलन की जन क्रांति में रहा अलवर का योगदान

अलवर 1938 -1939 ई. में छात्र फीस माफी आंदोलन हुआ जिसमें पं. हरिनारायण शर्मा, लक्ष्मण स्वरूप त्रिपाठी, इंदर सिंह आजाद, नत्थू राम मोदी, राधा चरण गुप्ता टप्पल वालों को सजा दी गई । वहीं 1940 में खादी भंडार बना और 1941 में जागीर माफी कॉन्फ्रेंस हुई, 9 अगस्त 1942 में नीमूचाना के रामजी लाल अग्रवाल के नेतृत्व में सनातन धर्म कॉलेज कानपुर में 10 हजार छात्रों ने जुलूस निकालकर कॉलेज भवन पर झंडा फहराने का प्रयास किया। इस पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिसमें अग्रवाल बेहोश होकर गिर पड़े। बाद में उन्होंने तिलक भवन पर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया। अग्रवाल को जेल हुई और उन्हें 1943 के अंत में छोड़ा गया।
साथ ही राधा चरण गुप्ता टप्पल वाले अलीगढ़ में आंदोलन करते हुए जेल गए, लक्ष्मण प्रसाद त्रिपाठी व इंदर सिंह आजाद दिल्ली में क्रांतिकारियों का सहयोग करते रहे। केके रायजादा ने लखनऊ में स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेकर जेल यात्रा की। पूर्व रियासत अलवर के छात्र जो बाहर पढ़ रहे थे, उन्होंने बनारस, कानपुर, लखनऊ, अलीगढ़ आदि जगहों पर आजादी के आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई।

अलवर में 9 अगस्त 1942 को यशवंत स्कूल, प्रताप स्कूल, राजर्षि कॉलेज छात्रों ने अंग्रेजों भारत छोड़ो के नारे लगाते हुए जुलूस निकाला तथा मोतीलाल शर्मा, कांति मोदी लक्ष्मणगढ़ वाले के नेतृत्व में कार्यक्रम हुआ, जिसमें छात्रों को पुलिस ने बेंते (डंडे) लगाई और उनके परिवारजनों को बुलाकर अंडरटेकिंग ली गई कि वह अपने पुत्रों को भविष्य में ऐसी गतिविधियों में भाग नहीं लेने देंगे। उस समय पूर्व अलवर रियासत के युवा आक्रोशित थे। इसी के परिणाम स्वरूप क्रांतिकारी छात्रों ने जेल के पीछे, रावण देवरा, आडा पाडा, भूरा सिद्ध और पहाड़ों में अपनी गतिविधियां चलाई। मास्टर भोलानाथ ने प्रधानमंत्री हार्वे को पत्र लिखा कि छात्रों का जीवन बर्बाद नहीं करें, उन्हें छोड़ दिया जाए। आंदोलनकारियों की पैरवी कृपा दयाल माथुर, शोभाराम, इंद्र लाल मित्तल, रामचंद्र उपाध्याय, बद्री प्रसाद गुप्ता, रामअवतार गुप्ता एडवोकेट ने की।

प्रोफेसर जी आर जैमन, उमा माथुर, मास्टर नंदकिशोर, मास्टर रमेश चंद्र पंत, विशंभर दयाल माथुर, मास्टर बंशीधर मिश्रा ने छात्रों को सहयोग किया, लाला काशीराम गुप्ता ने आर्थिक व मन से सहयोग प्रदान किया।

हरिशंकर गोयल
एडवोकेट