अलवर में 9 अगस्त 1942 को यशवंत स्कूल, प्रताप स्कूल, राजर्षि कॉलेज छात्रों ने अंग्रेजों भारत छोड़ो के नारे लगाते हुए जुलूस निकाला तथा मोतीलाल शर्मा, कांति मोदी लक्ष्मणगढ़ वाले के नेतृत्व में कार्यक्रम हुआ, जिसमें छात्रों को पुलिस ने बेंते (डंडे) लगाई और उनके परिवारजनों को बुलाकर अंडरटेकिंग ली गई कि वह अपने पुत्रों को भविष्य में ऐसी गतिविधियों में भाग नहीं लेने देंगे। उस समय पूर्व अलवर रियासत के युवा आक्रोशित थे। इसी के परिणाम स्वरूप क्रांतिकारी छात्रों ने जेल के पीछे, रावण देवरा, आडा पाडा, भूरा सिद्ध और पहाड़ों में अपनी गतिविधियां चलाई। मास्टर भोलानाथ ने प्रधानमंत्री हार्वे को पत्र लिखा कि छात्रों का जीवन बर्बाद नहीं करें, उन्हें छोड़ दिया जाए। आंदोलनकारियों की पैरवी कृपा दयाल माथुर, शोभाराम, इंद्र लाल मित्तल, रामचंद्र उपाध्याय, बद्री प्रसाद गुप्ता, रामअवतार गुप्ता एडवोकेट ने की।