
कोरोना की नई गाइडलाइन की पालना जरूरी, नहीं तो करनी सख्ती जरूरी- जिला कलक्टर
अलवर. जिला कलक्टर आनन्दी का कहना है कि दीपावली त्योहार के दौरान लोगों की ओर से मास्क व दो गज दूृरी की अनिवार्यता की पालना नहीं करने के कारण वर्तमान में अलवर जिले में कोरोना का संक्रमण तेजी से बढ़ा। आगामी दिनों में जिलावासियों को लॉकडाउन जैसी परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़े, इसके लिए लोगों को कोरोना गाइडलाइन की पालना करनी चाहिए। कोरोना संक्रमण पर रोक के लिए राज्य सरकार व प्रशासन को कुछ विशेष कदम उठाने पड़े हैं, लेकिन किसी को परेशान करने के लिए नहीं, बल्कि आमजन के बेहतर स्वास्थ्य की दृष्टि से निर्णय किए गए हैं। अलवर शहर में शनिवार को बाजार बंद रखने या फिर सार्वजनिक पार्कों में प्रवेश पर पाबंदी आदि फैसले लोगों की अच्छी सेहत के लिए किए गए हैं। जिले में कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए जिला प्रशासन की ओर से उठाए जा रहे कदमों को लेकर पत्रिका ने सोमवार को जिला कलक्टर आनन्दी से बात की। प्रस्तुत है जिला कलक्टर से बातचीत के प्रमुख अंश।
सवाल- वर्तमान में अलवर जिले में कोरोना की वास्तविक स्थिति क्या है
जवाब- अलवर जिले में वर्तमान में सेंपल जांच के 24 प्रतिशत तक कोरोना संक्रमित मिल रहे हैं, यह दर ज्यादा है। पूर्व में यह दर 13 से 14 प्रतिशत थी, गत जुलाई में जिले में कोरोना संक्रमण की दर 20 फीसदी तक पहुंच गई थी, जिसे बाद में नियंत्रित किया गया। दीपावली त्योहार के दौरान लोगों ने कोरोना गाइडलाइन की पालना में ढिलाई बरती, इस कारण वर्तमान में कोरोना संक्रमण बढ़ा है। इससे पहले भी लॉक डाउन खुलते ही एक बार कोरोना की स्थिति विस्फोटक हो गई थी, लेकिन बाद में सरकार ने प्रयास कर संक्रमण को संतुलित किया। संक्रमण पर रोक के कारण ही अलवर व भिवाड़ी में कफ्र्यू के निर्णय करने पड़े। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए सभी को अब सतर्क रहने की जरूरत है।
सवाल- जिले में कोरोना संक्रमण का आंकड़ा बढऩे का कारण सर्दी का मौसम है या अन्य कोई
जवाब- पहले लोगों को कोरोना के लक्षण का जल्दी पता नहीं चल पाता था, इस कारण जांच भी नहीं कराते थे। अब सर्दी का मौसम आते ही लोगों में लक्षण ज्यादा दिखने लगे है। कोरोना के लक्षण दिखने पर सभी को तुरंत जांच करानी चाहिए। इन दिनों संक्रमण का आंकड़ा बढऩे का मुख्य कारण लोगों की ओर से मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग, हाथ धोने आदि में लापरवाही बरतना रहा है।
सवाल- राज्य सरकार व प्रशासन को नाइट कफ्र्यू, बाजार बंद आदि के निर्णय क्यों लेने पड़े
जवाब- कोरोना संक्रमण के कारण जिले में फिर से लॉकडाउन जैसी परिस्थिति नहीं बने, इसके लिए कुछ कदम उठाए जा रहे हैं। कोरोना की विस्फोटक स्थिति होने के बाद आज भी कई लोग ऐसे हैं जो मास्क लगाने के बजाय उसे जेब में रखकर चलते हैं। जबकि हकीकत यह है कि लोग मास्क लगाकर अपना व दूसरों को जीवन सुरक्षित कर सकते हैं। यदि लोगों ने कोरोना गाइडलाइन की पालना में ढिलाई या लापरवाही बरती तो फिर से लॉकडाउन जैसी स्थिति में जाना भी पड़ सकता है।
सवाल- विवाह कार्यक्रमों को लेकर प्रशासन के क्या-क्या कानून हैं
जवाब- पहले भी रात में लोगों के बाहर घूमने पर प्रतिबंध लगा था, अब सरकार ने फिर से रात 8 बजे बाद बाहर घूमने पर पाबंदी लगाई है, लेकिन यह प्रतिबंध शादी समारोह में शामिल होने वाले लोगों पर लागू नहीं है। वे शादी का कार्ड दिखा दें, शादी कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए अलग से पास बनवाने की जरूरत नहीं है। सरकार ने यह छूट इसलिए दी है कि शादी समारोह में जाने वाले व्यक्ति नहीं हो, लेकिन लोग इस छूट का गलत तरीके से फायदा नहीं उठाएं। मंडप में शादी की अनुमति है, लेकिन बारात, निकासी आदि की मनाही है।
सवाल- शादी समारोह में सरकार ने 100 लोगों के शामिल होने की अनुमति दी है, लेकिन इसको चेक करने की क्या व्यवस्था है
जवाब- मैरिज होम में सीसीटीवी कैमरे लगाने की अनिवार्यता की गई है। मैरिज होम के लिए नोडल अधिकारी लगाए गए हैं। ये नोडल अधिकारी सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग चेक करेंगे तथा खुद भी जाकर देखेंगे। वैसे जो भी शादी की पूर्व सूचना देने आ रहे हैं, उन्हें अधिकारी कोरोना गाइडलाइन की पालना की जानकारी दे रहे हैं।
सवाल- जिले में रात्रिकालीन कफ्र्यू होने के कारण रात की शादियों के लिए अनुमति जरूरी है क्या
जवाब- शादी के लिए प्रशासन को पूर्व सूचना देना जरूरी होता है। शादी के लिए किसी प्रकार की अनुमति जरूरी नहीं है। पूर्व सूचना इसलिए जरूरी है कि शादी समारोह पर प्रशासन की नजर रह सके।
सवाल- हरियाणा व अन्य प्रदेशों से शादी के लिए आने वाले लोगों की परेशानी को लेकर वहां के प्रशासन से कोई बात हुई है क्या
जवाब- शादी समारोह पर किसी प्रकार की रोक नहीं है। इसलिए हरियाणा या अन्य प्रदेशों से यहां आकर शादी करने वाले लोग सरकार की गाइडलाइन की पालना करें, उनके लिए अलग से कोई नियम नहीं है।
सवाल- बाजारों का समय तय करने, नाइट कफ्र्यू लगाने का क्या औचित्य है
जवाब- नाइट कफ्र्यू लागू करने के पीछे संभवत: सरकार की मंशा यह रही है कि दिन के समय लोग किसी कार्य के लिए घर से बाहर निकलते हैं, लेकिन रात के समय बाहर निकलने के पीछे कोई कारण नहीं होता। रात के समय चिकित्सा या अन्य आपातकालीन कार्यों के लिए अनुमति है। लोगों को चाहिए कि रात के समय वे घरों से बाहर नहीं निकलें।
सवाल- कोरोना के चलते अलवर जिले में अब तक की सबसे लंबी धारा 144 लगी है, लेकिन फिर भी भीड़ नहीं रुक रही
जवाब- धारा 144 एक तरह से सरकार की ओर से खतरे से बचाव के लिए दिया गया संकेत है। सभी जानते हैं कि कोरोना का अभी कोई इलाज नहीं है, केवल बचाव ही उपाय है। कोरोना जैसी वैश्विक महामारी पर काबू पाने के लिए एक-एक व्यक्ति पर नजर रखना संभव नहीं है। इसकी रोकथाम के लिए जन जागरण व जन आंदोलन ही उपाय है। हम कोरोना की जंग जीत सकते हैं, केवल 4 सप्ताह तक लोग कोरोना गाइडलाइन की पूरी तरह पालना करें।
सवाल- शादी समारोह में शामिल होने वाले सरकारी कर्मचारियों से प्रशासन को क्या अपेक्षा है
जवाब- राजस्थान में शादी समारोह के लिए जारी गाइडलाइन सभी के लिए समान है। इसमें सरकारी कर्मचारियों के लिए अलग से कोई निर्देश नहीं हैं। शादी समारोह में किसी प्रकार की अनियमितता होने पर प्रशासन को जानकारी देना सभी की नैतिक जिम्मेदारी है, इसमें सरकारी कर्मचारी भी शामिल हैं। कोरोनाकाल में सरकारी कर्मचारियों ने बेहतर कार्य किया है।
सवाल- राज्य सरकार ने 8 जिलों में रात का कफ्र्यू लागू किया है, लेकिन अलवर में शनिवार को बाजार भी बंद करने के आदेश हैं
जवाब- अलवर में शनिवार को बाजार बंद करने का निर्णय व्यापारियों से बातचीत कर किया गया है। खुद व्यापारी भी कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए ऐसे निर्णयों को जरूरी मानते हैं। सप्ताह में एक दिन बाजार बंद का निर्णय केवल अलवर में ही नहीं, बल्कि उदयपुर में भी किया गया है। आगामी दिनों अन्य जिलों में भी ऐसे निर्णय किए जा सकते हैं।
सवाल- अलवर के अलावा बहरोड़, भिवाड़ी व अन्य बड़े कस्बों में बाजार बंद करने को लेकर कोई निर्णय किया है क्या
जवाब- जिले में सभी जगह कोरोना संक्रमण की स्थिति समान नहीं है। आवश्यकता होने पर पहले भी कस्बों में वहां के व्यापारियों से बात कर बाजार बंद करने का समय तय किया गया था। अभी जरूरत कोरोना पर लगाम लगाने की है।
सवाल- बाहर से आने वाले लोगों की पहले जांच की जाती थी, अब भी क्या यह की जाएगी
जवाब- बाहर से आने वाले लोगों की जांच की व्यवस्था अब भी जारी है। कोरोना पॉजिटिव मिलने पर उसकी कांटेक्ट हिस्ट्री का पता लगाया जाता है और उसके सम्पर्क में आने वाले लोगों की जांच कराई जाती है।
सवाल- कोरोना से बचाव को लेकर अस्पतालों में ऑक्सीजन की उपलब्धता, वेंटिलेटर व आइसीयू की क्या व्यवस्था है
जवाब- कोरोना संक्रमितों के इलाज के लिए जिले में करीब 700 बेड की व्यवस्था है, जिले में कहीं भी ऑक्सीजन की कमी नहीं है। निजी अस्पतालों में भी 350 बेड की व्यवस्था है। कोरोना संक्रमण में वृद्धि को देखते हुए जिले में इलाज की सुविधाएं और बढ़ाई जा रही हैं। अभी 20 आइसीयू बेड तैयार कराए जा रहे हैं। वहीं निजी अस्पतालों में करीब 30 आइसीयू बेड हैं।
सवाल- कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए लागू बाध्यताएं क्या अनिश्चितकाल के लिए हैं
जवाब- ये बाध्यताएं सरकार की ओर से लागू की गई हैं। कोरोना के केसेज बढऩे पर बाध्यताएं जरूरी है, हां लेकिन कोरोना केस कम होने पर पहले की तरह इन्हें कम किया जा सकता है। आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है हम जागरूक होंगे तो अलवर जिला कोरोना मुक्त होगा।
सवाल- पिछले दिनों अलवर के इएसआइसी मेडिकल कॉलेज देखने के लिए केन्द्र व राज्य सरकार की टीम और स्वयं कलक्टर भी वहां गई। क्या इस भवन में मेडिकल कॉलेज शुरू करने का कोई विचार है
जवाब- केन्द्र व राज्य सरकार की टीम ने अलवर के इएसआइसी मेडिकल कॉलेज भवन का अवलोकन किया है, इसके संचालन को लेकर केन्द्र व राज्य सरकार को ही फैसला लेना है।
कलक्टर का संदेश-
अलवर जिलावासियों को कोरोना से मुक्त होना है तो बस एक ही उपाय मास्क, मास्क, मास्क, मास्क, मास्क, मास्क, मास्क लगाना होगा। लोग दो गज दूरी की अनिवार्यता की पालना करें, जरूरी कार्य होने पर भी घरों से बाहर निकलें। एक सप्ताह, 10 दिन लोग कोरोना गाइडलाइन की पूरी तरह पालना करें। पार्क जाना सेहत के लिए जरूरी है, लेकिन पर पार्कों में जाने पर रोक भी सेहत के जरूरी होने के कारण ही लगाई है।
Published on:
23 Nov 2020 11:56 pm
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