कोरोना ने छीना रोजगार, अब सरकारी योजनाओं की आर्थिक मदद भी हुई दूर

अलवर. कोरोनाकाल में लॉक डाउन व बाजार में मंदी के दौर ने बड़ी संख्या में लोगों का रोजगार छीन लिया और अब स्वरोजगार पर बैंकिंग सिस्टम भारी पडऩे लगा है। स्थिति यह है कि विभिन्न विभागों की योजनाओं में स्वरोजगार के लिए सस्ती दरों पर ऋण मुहैया कराने के प्रावधान के बावजूद जिले के अनेक बैंकों की ओर से अब तक बेरोजगारों के 10 फीसदी आवेदनों को भी मंजूरी नहीं दी है।

By: Prem Pathak

Published: 14 Sep 2021, 12:57 AM IST

अलवर. कोरोनाकाल में लॉक डाउन व बाजार में मंदी के दौर ने बड़ी संख्या में लोगों का रोजगार छीन लिया और अब स्वरोजगार पर बैंकिंग सिस्टम भारी पडऩे लगा है। स्थिति यह है कि विभिन्न विभागों की योजनाओं में स्वरोजगार के लिए सस्ती दरों पर ऋण मुहैया कराने के प्रावधान के बावजूद जिले के अनेक बैंकों की ओर से अब तक बेरोजगारों के 10 फीसदी आवेदनों को भी मंजूरी नहीं दी है। जबकि जिला कलक्टर बैंकर्स की मीटिंग में कई बार योजना में स्वीकृत आवेदनों पर ऋण राशि जल्द मंजूर करने के आदेश दे चुके हैं।

अलवर सहित पूरा प्रदेश और देश डेढ़ साल से ज्यादा समय से कोरोना की मार झेल रहा है। लंबे कोरोनाकाल में जिले में बड़ी संख्या में लोगों को पारिवारिक व आर्थिक हानि के साथ ही रोजगार से भी हाथ धोना पड़ा है। लंबे लॉक डाउन से बाजार व उद्योग में भारी मंदी का दौर आया। इसका परिणाम यह हुआ कि उद्योगों एवं बाजार के साथ ही निजी सेक्टर में भी रोजगार का संकट खड़ा हो गया, हजारों लोगों का रोजगार छिन गया। रोजगार की तलाश में अन्य स्थानों पर गए लोगों को भी घर वापसी कर रोजगार का संकट झेलना पड़ा। इस समस्या से उबरने के लिए स्वरोजगार बड़ा उपाय साबित हो सकता था, लेकिन बैंकों की टालमटोल नीति लोगों के स्वरोजगार पर आड़े आ गई।

सरकारी योजनाएं भी नहीं हो पाई मददगार
कोरोना की मार झेल रहे बेरोजगारों के लिए विभिन्न विभागों की सरकारी योजनाएं भी मददगार साबित नहीं हो सकी। केन्द्र व राज्य सरकार की ओर से स्वरोजगार के लिए सरकारी योजनाओं में अधिकाधिक ऋण मुहैया कराने के निर्देश दिए गए। सरकारी विभागों ने भरपूर संख्या में योजनाओं में ऋण आवेदन भी स्वीकृत कर बैंकों में भिजवाए, लेकिन बैंकों की लचर कार्यप्रणाली लोगों के स्वरोजगार में बाधक साबित हुई। नतीजतन उद्योग विभाग, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, नगर परिषद, महिला अधिकारिता विभाग सहित अन्य विभागों की योजनाओं में स्वीकृत आवेदनों की तुलना में अब तक 10 फीसदी लोगों को ऋण नहीं मुहैया नहीं कराया जा सका है। ऐसे में बेरोजगारी की मार झेल रहे लोगों का स्वरोजगार से मोहभंग होने लगा है।

मुख्यमंत्री विशेष योग्यजन स्वरोजगार योजना

सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता विभाग की ओर से दिव्यांगों के लिए मुख्यमंत्री विशेष योग्यजन स्वरोजगार योजना का संचालन किया जा रहा है। अलवर जिले में 2021 में 53 आवेदन प्राप्त हुए हैं, इनमें से 35 आवेदन बैंकों के पास लंबित है। वहीं 15 आवेदनों को कमी के चलते रोक दिया है। सहायक निदेशक रविकांत ने बताया कि इस योजना में अधिकतम 50 हजार की सब्सिडी देय है। विभाग के पास कोई आवेदन लंबित नहीं है। किसी भी दिव्यांग को बैंक से ऋण मिलने की सूचना अभी तक विभाग को नहीं मिली है।

इंदिरा महिला शक्ति उद्यम प्रोत्साहन योजना

महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए महिला अधिकारिता विभाग की ओर से इंदिरा महिला शक्ति उद्यम प्रोत्साहन योजना का संचालन पिछले साल कोरोना काल में शुरू हुआ। योजना के तहत अभी तक विभाग को 343 आवेदन प्राप्त हुए हैं। जिसमें से बैंकों की ओर से अभी तक मात्र 3 महिलाओं के ही ऋ ण स्वीकृत किए गए हैं। शेष आवेदन बैंकों में लंबित हैं। इस योजना में अब तक एक महिला को 9 लाख 12 हजार और 2 महिलाओं को 1 लाख 80 हजार, 1 लाख 80 हजार की राशि स्वीकृत की गई है। महिला अधिकारिता विभाग के उपनिदेशक ऋ षि राज सिंघल ने बताया कि बैंकों से लगातार संपर्क कर महिलाओं को ऋ ण उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसमें महिलाओं को बैंक लोन पर 25 से 30 प्रतिशत की सब्सिडी आरक्षण वर्ग के अनुसार दी जाती है।

उद्योग विभाग व नगर परिषद की योजनाओं के हाल भी बेहाल

उद्योग विभाग की ओर से स्वरोजगार के लिए मुख्यमंत्री लघु उद्योग प्रोत्साहन और प्रधानमंत्री स्वरोजगार योजना में बीते वर्ष 900 युवाओं के आवेदन स्वीकृत कर बैंकों को भेजे गए, इनमें से 313 बैंकों ने स्वीकृत किए। वहीं इस वर्ष अभी तक 210 आवेदन स्वीकृत कर भेजे गए हैं, इनमें से बैंकों ने 19 को ही ऋण की मंजूरी दी है। नगर परिषद की पंडित दीनदयाल शहरी आजीविका मिशन योजना में 113 के लख्य की तुलना में 232 आवेदन बैंकों को भेजे गए, जिनमें बैंकों ने 56 को अभी तक स्वीकृत कर 52 लोगों को ऋण मुहैया कराया है।

Prem Pathak Reporting
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